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बांसगांव के नगर पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ घोटाला केस मामले ने लिया नया मोड़, सामने आई ये बड़ी बात

Wed, 27 May 2020 08:06 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 27 May 2020 08:06 AM IST
सार

  • बांसगांव खरीद घोटाला केस: न तहरीर में नाम, न शासन से अनुमति, बनाया नामजद अभियुक्त
  • नगर पंचायत अध्यक्ष बांसगांव वेदप्रकाश शाही-तत्कालीन अधिशासी अधिकारी अविनाश मल्ल को नामजद अभिुयुक्त बनाने के मामले की जांच सीओ को
  • तहरीर में सिर्फ फर्म का था जिक्र

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SSP order to CO to investigate case of making accused chairman and executive officer at gorakhpur
बांसगांव नगर पंचायत के सभासदों ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

आखिर किसके इशारे पर बांसगांव नगर पंचायत खरीद घोटाले की तहरीर में नाम-पदनाम न होने के बावजूद नगर पंचायत अध्यक्ष बांसगांव वेद प्रकाश शाही और तत्कालीन अधिशासी अविनाश मल्ल को नामजद आरोपित बना दिया गया ?
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आरोपित के परिजनों के सवाल पर मामले ने तूल पकड़ा तो एसएसपी ने पूरे प्रकरण की जांच सीओ बांसगांव को सौंपी दी है, ताकि यह पता चल सके कि इसके पीछे आखिर क्या साजिश है ?
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साजिश का शक इस लिहाज से कि नगर पंचायत अध्यक्ष या सरकारी अफसर पर केस दर्ज, करने से पहले शासन की अनुमति जरूरी है, बावजूद इसके इस सामान्य कानूनी प्रावधान को नजरअंदाज करके केस दर्ज कर लिया गया।
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मंगलवार को अमर उजाला के सवाल करने पर थानेदार ने जांच रिपोर्ट के हवाले से इस एफआईआर में नामजदगी की बात कही तो एसपी (साउथ) ने हेड मुंशी की गलती की आशंका जताई। कुल मिलाकर नगर पंचायत में घोटाले के आरोप में दर्ज इस मामले में तहकीकात करने के लिए जिम्मेदार पुलिस ही फिलहाल साजिश के शक के घेरे में आ गई है।

जानकारी के मुताबिक, अधिशासी अधिकारी कमलेश शाही द्वारा दी गई तहरीर में लिखा गया था कि क्षेत्रीय प्रबंधक लद्यु उद्योग निगम लिमिटेड मुरादाबाद के खिलाफ सुसंगत धाराओं में केस दर्ज कराने के संबंध में। इसमें एक जांच रिपोर्ट का हवाला दिया गया और 19 पन्ने की रिपोर्ट संलग्न करते हुए तहरीर दी गई।

तहरीर में नगर पंचायत अध्यक्ष बांसगांव वेदप्रकाश शाही, तत्कालीन अधिशासी अधिकारी अविनाश मल्ल के नाम का जिक्र नहीं था। विधि विशेषज्ञ कहते हैं कि ऐसे में पुलिस विवेचना में तो नाम बढ़ा सकती थी, लेकिन इस तहरीर के आधार पर एफआईआर में नामजद अभियुक्त नहीं बना सकती थी।

इसके बावजूद पुलिस ने एफआईआर में अभियुक्तों के नाम के कॉलम में नगर पंचायत अध्यक्ष वेद प्रकाश शाही, तत्कालीन अधिशासी अधिकारी अविनाश मल्ल का नाम अंकित किया है। कुल मिलाकर नामदजगी के इस खेल ने घोटाले के आरोप में दर्ज केस को चोट पहुंचाई है।

यह है मामला

उत्तर प्रदेश लद्यु उद्योग लिमिटेड क्षेत्रीय कार्यालय मुरादाबाद को टाटा 407 गाड़ी के लिए टेंडर दिया गया था। इस गाड़ी की कीमत 18 लाख 29 हजार थी। गाड़ी नगर पंचायत तक नहीं आई और पूरा भुगतान कर दिया गया। इसकी जानकारी होने पर सभासद विनय सिंह सहित 11 सभासदों ने 27 फरवरी 2020 को डीएम से शिकायत की थी।

डीएम ने पूरे प्रकरण की जांच एसडीएम को सौंपी थी। एसडीएम ने 6 अप्रैल को जांच रिपोर्ट डीएम को दी जिसके बाद डीएम ने घोटाला पाए जाने पर केस दर्ज करने का आदेश दिया था। आदेश के मुताबिक, उन्होंने उप्र लद्यु उद्योग लिमिटेड के खिलाफ तहरीर दी थी।

बांसगांव के इंस्पेक्टर सीपी जैसल ने बताया कि तहरीर के साथ ही एक जांच आख्या भी मिली है। इसमें नगर पंचायत अध्यक्ष और तत्कालीन अधिशासी अधिकारी दोषी पाए गए हैं। इसी आधार पर उनका नाम एफआईआर में दर्ज किया गया है।

एसपी साउथ विपुल कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि मामले की जानकारी एसएसपी को है। एसएसपी के आदेश पर ही सीओ बांसगांव को जांच सौंपी गई है। हेड मुंशी ने गलती से नाम लिखा होगा। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

‘नगर पंचायत अध्यक्ष के प्रशासनिक अधिकार व कामकाज पर रोक लगाएं’

बांसगांव नगर पंचायत के सभासदों ने मंगलवार को उप जिलाधिकारी पंकज दीक्षित को ज्ञापन दिया। सभासदों की मांग थी कि नगर पंचायत अध्यक्ष वेद प्रकाश शाही उर्फ पप्पू के प्रशासनिक अधिकार और कामकाज पर रोक लगाई जाए। नगर पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ मुकदमा दर्ज है। वह जांच को प्रभावित कर सकते हैं।

अब मामला दर्ज हुआ तो सभासद विनय सिंह, संजय सिंह, अमित कुमार सिंह, आशीष सिंह, अमरनाथ यादव, श्रीराम गौड़, तारा देवी, संध्या सिंह और रोशन आरा तहसील मुख्यालय पहुंच गए। इन सबने जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन उप जिलाधिकारी को सौंपा। सबने कहा कि नगर पंचायत अध्यक्ष का प्रशासनिक अधिकार सीज नहीं हुआ तो जांच प्रभावित हो सकती है।

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