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घर में पसरा मातम: तेज रफ्तार ऑटो ने परिवार को रौंदा, 2 साल के बच्चे की मौत; 4 माह की बच्ची घायल
Fri, 25 Sep 2026 11:11 AM IST
Rohit Singh
संवाद न्यूज एजेंसी, उरुवा बाजार
संवाद न्यूज एजेंसी, उरुवा बाजार
Published by: Rohit Singh
Updated Fri, 25 Sep 2026 11:11 AM IST
सार
उरुवा थाना क्षेत्र के पिपरा पांडेय गांव निवासी विनय पांडेय के दो वर्षीय बेटे देवांश की बृहस्पतिवार सुबह सड़क हादसे में मौत हो गई। रामजानकी मार्ग पर बस का इंतजार कर रहे परिवार को उरुवा की ओर से आ रहे तेज रफ्तार अनियंत्रित ऑटो ने टक्कर मार दी। हादसे में 4 माह की बच्ची त्रिशा और रिश्तेदार श्रवण सिंह भी घायल हो गए।
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रोते बिलखते परिजन
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
उरुवा थाना क्षेत्र के पिपरा पांडेय गांव निवासी विनय पांडेय के दो वर्षीय बेटे देवांश की बृहस्पतिवार को सड़क हादसे में मौत हो गई। रामजानकी मार्ग पर बस का इंतजार कर रहे परिवार के लोगों को उरुवा की ओर से आ रहे तेज रफ्तार अनियंत्रित ऑटो ने टक्कर मार दी। हादसे में देवांश गंभीर रूप से घायल हो गया जबकि चार माह की बच्ची त्रिशा और अमोढ़ा गांव निवासी श्रवण सिंह भी चोटिल हो गए।
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त्रिशा का गोला बाजार के निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है। पुलिस ने मुरारपुर निवासी चालक श्रीराम के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ऑटो को कब्जे में ले लिया है। जानकारी के अनुसार, पिपरा पांडेय निवासी बुद्धिसागर पांडेय बृहस्पतिवार सुबह करीब नौ बजे अपनी बहू श्वेता को डॉक्टर को दिखाने के लिए गोरखपुर ले जा रहे थे।
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उनके साथ दो वर्षीय पोता देवांश और बहु श्वेता और बेटी पुनीता की चार माह की बेटी त्रिशा भी थी। पुनीता की शादी गोला थाना क्षेत्र के मेडरी गांव में हुई है। सभी गांव के पास रामजानकी मार्ग पर बस का इंतजार कर रहे थे। इसी दौरान उरुवा की ओर से आए तेज रफ्तार ऑटो ने उन्हें टक्कर मार दी।
गंभीर रूप से घायल देवांश को पीएचसी उरुवा ले जाया गया, जहां से जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। रास्ते में उसकी मौत हो गई। घटना की सूचना मिलने पर दिल्ली में नौकरी कर रहे देवांश के पिता विनय पांडेय घर के लिए रवाना हो गए।
परिजन के अनुसार, विनय का दो माह का एक और बेटा है, जिसका ऑपरेशन से जन्म हुआ है। टांके में दर्द की शिकायत के कारण श्वेता को डॉक्टर को दिखाने के लिए गोरखपुर ले जाया जा रहा था। पिता के पहुंचने के बाद शुक्रवार को देवांश का अंतिम संस्कार किया जाएगा।
तीर्थयात्रा पर जाने की खुशी थी, पोते की मौत ने सबकुछ बदल दिया
रविवार को दादा-दादी को तीर्थ यात्रा पर जाना था। घर में इसकी तैयारियां चल रही थीं। रिश्तेदार भी विदाई के लिए पहुंचने लगे थे। परिवार में खुशी का माहौल था। दादा-दादी अपने लाडले पोते देवांश के साथ कुछ पल बिताने में जुटे थे। किसी को क्या पता था कि कुछ ही देर में खुशियों का यह माहौल मातम में बदल जाएगा। दो साल के देवांश की मौत ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया।
रविवार को दादा-दादी को तीर्थ यात्रा पर जाना था। घर में इसकी तैयारियां चल रही थीं। रिश्तेदार भी विदाई के लिए पहुंचने लगे थे। परिवार में खुशी का माहौल था। दादा-दादी अपने लाडले पोते देवांश के साथ कुछ पल बिताने में जुटे थे। किसी को क्या पता था कि कुछ ही देर में खुशियों का यह माहौल मातम में बदल जाएगा। दो साल के देवांश की मौत ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया।
देवांश अपनी दादी तारा पांडेय के बेहद करीब था। वह उनसे ज्यादा देर दूर नहीं रहता था। घर आने वाले रिश्तेदार भी सबसे पहले देवांश को ही ढूंढते थे। तीर्थ यात्रा पर जाने से पहले दादी भी पोते के साथ समय बिताकर रवाना होने की तैयारी कर रही थीं।
देवांश की मौत के बाद दादी तारा पांडेय का रो-रोकर बुरा हाल है। वह बार-बार पोते को याद कर रही हैं। उनकी आंखों के सामने देवांश का चेहरा और घर में उसका खेलना-कूदना घूम रहा है। जिस घर से रविवार को तीर्थ यात्रा के लिए विदाई होनी थी, वहां अब सन्नाटा और सिसकियां हैं।
दिल्ली से घर के लिए रवाना हुए पिता
देवांश के पिता विनय दिल्ली में नौकरी करते हैं। बेटे की मौत की खबर मिलते ही वह घर के लिए रवाना हो गए। परिवार में देवांश का दो माह का छोटा भाई भी है। एक तरफ मासूम बच्चे की देखभाल की जिम्मेदारी है तो दूसरी ओर बड़े बेटे को खोने का गम। इस घटना ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया है।
देवांश के पिता विनय दिल्ली में नौकरी करते हैं। बेटे की मौत की खबर मिलते ही वह घर के लिए रवाना हो गए। परिवार में देवांश का दो माह का छोटा भाई भी है। एक तरफ मासूम बच्चे की देखभाल की जिम्मेदारी है तो दूसरी ओर बड़े बेटे को खोने का गम। इस घटना ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया है।