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यूपी: यहां युवा वैज्ञानिक ने बनाया बैटरी से चलने वाला ये खास ट्रैक्टर, जानिए क्या है इसकी खासियत
Sun, 27 Dec 2020 04:28 PM IST
vivek shukla
संवाद न्यूज एजेंसी, महराजगंज।
संवाद न्यूज एजेंसी, महराजगंज।
Published by: vivek shukla
Updated Sun, 27 Dec 2020 04:28 PM IST
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तीन घंटे में एक एकड़ खेत जोतने वाले ट्रैक्टर पर बैठे राहुल।
- फोटो : अमर उजाला।
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उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले के निचलौल तहसील के सिसवा बाजार से सटे बीजापार आसमन छपरा गांव के राहुल सिंह ने अपने वैज्ञानिक प्रतिभा का नमूना दिखाकर सुर्खियां बटोर रहे हैं। वह अक्सर नया शोध करते रहते हैं। उनके द्वारा बनाया गया ट्रैक्टर इन दिनों ज्यादा चर्चा में है। सोशल मिडिया, यूट्यूब पर इनका विडियो खुब देखा जा रहा है।
बीजापार आसमन छपरा गांव के राहुल सिंह गोरखपुर एबीसी पब्लिक स्कूल दिव्यनगर में 12वीं के छात्र हैं। वह मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के डिजाइन इनोवेटर एंड इंक्यूशन सेंटर में इनोवेटर हैं। राहुल ने बताया कि पिता संजय पेशे से किसान हैं। ऐसे में खेतीबाड़ी की समस्या को देखते हुए कुछ अलग करने की हमेशा सोचता था। मेरा यही सोच है कि कम लागत में ज्यादा फायदा किसान को कैसे होगा। इसके लिए उन्नत किस्म के यंत्रों का होना जरूरी है। ऐसे में बैटरी चलित ट्रैक्टर बनाने के लिए सोचा।
इसके पहले अक्तूबर माह में बैटरी से चलने वाली साइकिल बनाया था। जिसकी काफी लोगों ने सराहना की। ट्रैक्टर ने इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल में पहला स्थान हासिल किया है। इससे तीन घंटे में एक एकड़ खेत जोता जा सकता है। सबसे खास बात यह है कि ट्रैक्टर स्वतः चार्ज होने के साथ ही ईको-फ्रैंडली है। इसकी गति 70 किलोमीटर प्रति घंटा है।
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बीजापार आसमन छपरा गांव के राहुल सिंह गोरखपुर एबीसी पब्लिक स्कूल दिव्यनगर में 12वीं के छात्र हैं। वह मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के डिजाइन इनोवेटर एंड इंक्यूशन सेंटर में इनोवेटर हैं। राहुल ने बताया कि पिता संजय पेशे से किसान हैं। ऐसे में खेतीबाड़ी की समस्या को देखते हुए कुछ अलग करने की हमेशा सोचता था। मेरा यही सोच है कि कम लागत में ज्यादा फायदा किसान को कैसे होगा। इसके लिए उन्नत किस्म के यंत्रों का होना जरूरी है। ऐसे में बैटरी चलित ट्रैक्टर बनाने के लिए सोचा।
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इसके पहले अक्तूबर माह में बैटरी से चलने वाली साइकिल बनाया था। जिसकी काफी लोगों ने सराहना की। ट्रैक्टर ने इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल में पहला स्थान हासिल किया है। इससे तीन घंटे में एक एकड़ खेत जोता जा सकता है। सबसे खास बात यह है कि ट्रैक्टर स्वतः चार्ज होने के साथ ही ईको-फ्रैंडली है। इसकी गति 70 किलोमीटर प्रति घंटा है।
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बैट्री से चलने के कारण ट्रैक्टर में आवाज नहीं
ट्रैक्टर पर बैठे राहुल।
- फोटो : अमर उजाला।
इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल में मिला पहला स्थान पाने वाले बारहवीं के छात्र राहुल सिंह की उम्र महज 16 वर्ष है। वह मदन मोहन मालवीय प्रोधोगिकी विश्वविद्यालय के डिजाइन इनोवेटर एंड इंक्यूशन सेंटर में इनोवेटर हैं। यहां पर पढ़ाई के साथ रिसर्च भी करते हैं।
राहुल बीते वर्षों से लगातार इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल में पहला स्थान हासिल कर दबदबा बनाए हुए हैं। वर्ष 2018 में रोटी मेकर, वर्ष 2019 में बैट्री से चलने वाली इको फ्रेंडली साइकिल और 2020 के वैश्विक महामारी के चलते ऑनलाइन हुए इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल में बैट्री से चलने वाली इको फ्रेंडली ट्रैक्टर बनाकर पहला स्थान बरकरार रखा।
युवा वैज्ञानिक राहुल सिंह बताते है कि ट्रैक्टर में लगी बैट्री को चार्ज करने की जरूरत नहीं है। वह ट्रैक्टर चलने के साथ ही खुद चार्ज होता रहेगा। यह ट्रैक्टर पूरी तरह से इको फ्रेंडली है। बैट्री से चलने के कारण ट्रैक्टर में आवाज नहीं है। वहीं इसमें डीजल पेट्रौल का प्रयोग नहीं होने से प्रदूषण भी नहीं निकलता है। ट्रैक्टर में लगे बैट्री और मोटर का निर्माण राहुल ने खुद किया है।
राहुल बीते वर्षों से लगातार इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल में पहला स्थान हासिल कर दबदबा बनाए हुए हैं। वर्ष 2018 में रोटी मेकर, वर्ष 2019 में बैट्री से चलने वाली इको फ्रेंडली साइकिल और 2020 के वैश्विक महामारी के चलते ऑनलाइन हुए इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल में बैट्री से चलने वाली इको फ्रेंडली ट्रैक्टर बनाकर पहला स्थान बरकरार रखा।
युवा वैज्ञानिक राहुल सिंह बताते है कि ट्रैक्टर में लगी बैट्री को चार्ज करने की जरूरत नहीं है। वह ट्रैक्टर चलने के साथ ही खुद चार्ज होता रहेगा। यह ट्रैक्टर पूरी तरह से इको फ्रेंडली है। बैट्री से चलने के कारण ट्रैक्टर में आवाज नहीं है। वहीं इसमें डीजल पेट्रौल का प्रयोग नहीं होने से प्रदूषण भी नहीं निकलता है। ट्रैक्टर में लगे बैट्री और मोटर का निर्माण राहुल ने खुद किया है।
ट्रैक्टर बनने में खर्च आया डेढ़ लाख
युवा वैज्ञानिक राहुल के अनुसार ट्रैक्टर बनाने में करीब डेढ़ लाख रुपये का खर्च आया है। अभी वह इस तैयारी में हैं कि इसे बल्क में तैयार कर 45 से 50 हजार रुपये में किसानों को उपलब्ध करा सकें। ट्रैक्टर में चार इंडिकेटर भी लगे हैं। इसके साथ ही इसमें दो हेडलाइट लगा है। इसका वजन सवा क्विंटल के करीब है।
ट्रैक्टर में लगा है पावर स्टेयरिंग
राहुल ने बताया कि इसमें पावर स्टेयरिंग लगाया गया है। जिससे ट्रैक्टर हल्के में चल सके। ट्रैक्टर में एक स्विच भी लगा है। जिसका प्रयोग करने पर ट्रैक्टर आगे और पीछे की ओर चल सकता है। यही नहीं इस ट्रैक्टर में गेयर नहीं लगाना है। इसे चलाना काफी आसान है। इसकी बैट्री को बोनट के नीचे रखी गई है। इसे ठंडा करने के लिए चार पंखे भी लगे हैं। उन्होंने बताया कि उनके कोआर्डिनेटर प्रो.ज्यूस सर और वीसी प्रो.जेपी पांडेय का काफी सहयोग मिला।
ट्रैक्टर में लगा है पावर स्टेयरिंग
राहुल ने बताया कि इसमें पावर स्टेयरिंग लगाया गया है। जिससे ट्रैक्टर हल्के में चल सके। ट्रैक्टर में एक स्विच भी लगा है। जिसका प्रयोग करने पर ट्रैक्टर आगे और पीछे की ओर चल सकता है। यही नहीं इस ट्रैक्टर में गेयर नहीं लगाना है। इसे चलाना काफी आसान है। इसकी बैट्री को बोनट के नीचे रखी गई है। इसे ठंडा करने के लिए चार पंखे भी लगे हैं। उन्होंने बताया कि उनके कोआर्डिनेटर प्रो.ज्यूस सर और वीसी प्रो.जेपी पांडेय का काफी सहयोग मिला।