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इन लोगों के सामने गिरा था विवादित ढ़ाचा, कोठारी बंधू को लगी थी गोली

Wed, 05 Aug 2020 12:38 PM IST
vivek shukla संजय कुमार पांडेय, महराजगंज।
संजय कुमार पांडेय, महराजगंज। Published by: vivek shukla Updated Wed, 05 Aug 2020 12:38 PM IST
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Special story Ram Mandir and Babri Masjid in ayodhya
Babri Masjid demolition

6 दिसंबर वर्ष 1992 की घटना आज ताजा हो गई। सभी दुख दर्द भूल गया। आज ऐसा लग रहा है मानो हर मुराद पूरी हो गई हो। गांव की गलियों से होकर पैदल दौड़ते हुए, ठेला, जीप, ट्रैक्टर की सवारी कर अयोध्या पहुंचने में जो पीड़ा हुई थी, वह सब श्रीराम मंदिर शिलान्यास के बाद दूर हो गई। भगवान श्रीराम मंदिर निर्माण को लेकर वर्षो पुरानी मनोकामना अब पूरी हुई।

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इन बातों का जिक्र करते हुए महराजगंज शहर के आजाद नगर मोहल्ले के रहने सानंदन पटेल ने कहा कि आज बेहद खुशी हो रही है। उस खुशी को बयां करने के लिए शब्द भी कम पड़ जाएंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने अयोध्या में श्रीराम मंदिर का शिलान्यास कर कारसेवक ही नहीं सभी हिंदू जनमानस के सपने को पूरा कर दिया है। उन्होंने बताया कि महराजगंज से अयोध्या जाने के दौरान पुलिस की नजरों से बचना था।
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इस वजह से कुछ दूर पैदल तो कुछ दूर ट्रैक्टर पर सवार होकर अयोध्या तक पहुंचे। सरकार भाजपा की थी, इसलिए यह डर नहीं था कि गोली चलेगी, लेकिन गोली चली तो कोठारी बंधू की मौत हो गई। ऐसी भगदड़ मची की कुछ समझ में नहीं आ रहा था। जान बचाकर भागते वक्त घुटने में चोट लगी। इतना बदहवाश हो गया था कि चोट का पता ही नहीं चला। ठेले पर बैठकर बस्ती तक पहुंचा तो दर्द का एहसास हुआ। जब तक गोरखपुर में पहुंचा कर्फ्यू लग चुका था। साइकिल एवं पैदल किसी तरह महराजगंज रात में पहुंचा था।

कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि भगवान श्रीराम भक्ति, शक्ति, प्रेम, करुणा, न्याय, सत्य के प्रतिक हैं। वह मर्यादा पुरुषोत्तम हैं। हर जीव में वह व्याप्त हैं। इसीलिए हर प्राणी के प्रति प्रेम ही सच्ची श्रद्धा है।
 

गुब्बार बेचते हुए अयोध्या पहुंचे थे बाबू जी

सिसवा के कपड़ा व्यवसायी कृष्णचंद अग्रवाल बुधावार को बात करते हुए भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि बाबू जी का सपना था कि उनके जीते जी श्रीराम मंदिर बने। लेकिन शिलान्यास हुआ तो आज उनकी आत्मा का शांति मिली होगी। उन्होंने बताया पिता सीताराम गुब्बार बेचते हुए अयोध्या तक पहुंचे थे। बाबू जी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सक्रिय कार्यकर्ता और विश्व हिंदू परिषद के जिला उपाध्यक्ष थे। 6 दिसंबर 1992 को ढाचा गिरने के दौरान अयोध्या में ही थे। आज बहुत अच्छा लग रहा कि श्रीराम मंदिर का शिलान्यास हो गया।

तहसील गेट से हुई थी गिरफ्तारी
बजरंग दल के पूर्व जिला संयोजक रमेश मोदनवाल ने बताया कि वर्ष 1992 का संघर्ष रोमांचकारी रहा। तीन बार गिरफ्तारी हुई थी। भाजपा के तत्कालीन जिलाध्यक्ष डॉ. स्व. रविंद्र त्रिपाठी की अध्यक्षता में आजाद नगर में रात में बैठक हो रही थी। साथ में शिवकुमार पटवा, रूदल दास, सत्यनारायण, डॉ. आरवी लाल, मोहनलाल निगम, मधुसुदन पाण्डेय आदि रहे। बैठक के बाद तहसील गेट पर ही गिरफ्तार कर लिया गया।

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सरयू में कूदकर जान बचाए
चोखराज तुलस्यान सरस्वती विद्या मंदिर के प्रधानाचार्य ज्योतिष मणि त्रिपाठी रामजन्म भूमि आंदोलन से रहे। उन्होंने बताया कि वर्ष 1991 में राम ज्योति यात्रा को लेकर गांव गांव भ्रमण किया। पुलिस पकड़ने के लिए पीछे पड़ी रहती थी, लेकिन चकमा दे कर भगते रहे। कार सेवा के लिए सिसवा से बस्ती तक रेल गाड़ी फिर पैदल अयोध्या तक यात्रा हुई।

सपा सरकार के दौरान निहत्थे कार सेवकों पर गोली चली थी। उस वक्त सरयू नदी में कूद कर जान बचाकर भागा था। 6 दिसंबर वर्ष 1992 में विवादित ढांचा गिराया गया था। तब भी अयोध्या पहुंचा था। आज जब प्रधानमंत्री श्रीराम मंदिर का शिलान्यास किए तो ह्रदय में असीम सुख की प्राप्ति हो रही है।

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