राष्ट्रीय बालिका दिवस: हैंडबाल खिलाड़ी युक्ता तिवारी और आरती यादव ने रोशन किया गोरखपुर का नाम
टियों ने कभी विषम हालात में थक कर हार नहीं मानी, बल्कि पारिवारिक रोक टोक, आर्थिक तंगी सरीखी समस्याओं से लड़कर हैंडबाल खेल में आगे बढ़ीं और अपनी चमक पूरे देश में बिखेरी है।
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चांद सी बेटियों को सूरज बनाने लगे हैं, बुरी नजर से घूरने वाले कतराने लगे हैं... किसी शायर की ये पंक्तियां गोरखपुर की माटी में पली बढ़ी दो होनहार बेटियों युक्ता तिवारी और आरती यादव पर सटीक बैठती हैं। इन बेटियों ने कभी विषम हालात में थक कर हार नहीं मानी, बल्कि पारिवारिक रोक टोक, आर्थिक तंगी सरीखी समस्याओं से लड़कर हैंडबाल खेल में आगे बढ़ीं और अपनी चमक पूरे देश में बिखेरी है।
सैयद मोदी रेलवे स्टेडियम में मुख्य कोच अरविंद यादव और सहायक कोच अश्विनी यादव की देखरेख में प्रैक्टिस करने वाली युक्ता तिवारी और आरती यादव ने जूनियर नेशनल और सीनियर नेशनल प्रतियोगिताओं में यूपी टीम को अपने खेल के दम पर पदक दिलाया है। युक्ता ने गुजरात स्थित स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया साई में प्रशिक्षण लिया है, जबकि आरती ने लखनऊ हॉस्टल में रहकर अपने खेल को बेहतर बनाने का गुर सीखा है। लेफ्ट बैग और सेंटर पोजिशन की खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा से निर्णायकों का ध्यान कई बार अपनी ओर आकृष्ट किया है।
जो रोकते थे, वो खुद बेटी को आगे बढ़ाने की करते हैं बात
इंजीनियरिंग कॉलेज स्थित मालवीय नगर में प्राइवेट नौकरी करने वाले पिता अभय तिवारी और मां पूनम तिवारी के साथ रहने वाली युक्ता की चार बहनें और एक छोटा भाई है। परिवार में खेल की पृष्ठभूमि से कोई नहीं है, मगर इस बिटिया ने दसवीं की पढ़ाई के दौरान एमपी बालिका इंटर कॉलेज में हैंडबाल खेलना शुरू किया।
असल चुनौती तब शुरू हुई जब घर वालों के साथ रिश्तेदारों को खेल से लगाव की बात पता चली। खेल में नहीं कोई भविष्य, कौन लेकर जाएगा, कैसा माहौल होगा, चुस्त कपड़े पहनकर कैसे खेलेगी, सरीखे सवालों के तीर बिटिया के अरमान तोड़ने के लिए काफी थे। लेकिन, बिटिया ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करके आलोचकों का मुंह बंद कर दिया। आज इस बिटिया पर पूरे परिवार को गर्व महसूस होता है। युक्ता का सपना ओलंपिक में देश को स्वर्ण पदक दिलाना है। युक्ता अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, कोच के साथ बहन साक्षी, दीक्षा, सृष्टि और भाई शास्वत को देती हैं।
उपलब्धियां
- वर्ष 2020 (31 मार्च-4 अप्रैल)- जूनियर नेशनल- तृतीय स्थान।
- वर्ष 2020 (08-12 सितंबर)- जूनियर नेशनल- तृतीय स्थान।
- वर्ष 2019- सीनियर नेशनल- (गुजरात साई हॉस्टल) कोई स्थान नहीं।
पिता के सपने को हर हाल में करूंगी पूरा
दूध के व्यवसाय में लगे दिवंगत पिता सदरी यादव और मां लालमती देवी की छह संतानों में से एक आरती यादव का सफर काफी मुश्किलों भरा रहा है। गोरखनाथ में रहने वाली आरती ने 11 साल की उम्र से खिलाड़ी बनने का सपना देखना शुरू कर दिया था। चार बहनों और दो भाइयों में आरती के लिए भी मैदान पर जाकर खेलना कम चुनौतीपूर्ण नहीं था। शुरूआती रोकटोक का सामना इस बिटिया ने भी झेला, मगर पिता ने आगे चलकर साथ दिया तो आरती ने उन्हें निराश नहीं किया। आज आरती पूरे जोश के साथ दिवंगत पिता को किए वादे (भारतीय टीम में खेलने) को पूरा करने में जुटी हैं। आरती ने अपनी सफलता का श्रेय बड़े भाई सुभाष यादव, कुलदीप यादव के साथ बहन गायत्री, गूंजा और सपना को दिया है।उपलब्धियां
- वर्ष 2021- सीनियर नेशनल बरेली- तीसरा स्थान
- जूनियर नेशनल उत्तर प्रदेश- तीसरा स्थान
- सब जूनियर नेशनल गाजियाबाद- यूपी में पहला स्थान
- जूनियर नेशनल लखनऊ- यूपी में दूसरा स्थान
- इंटर साई टूर्नामेंट- पहला स्थान
- इंटर साई टूर्नामेंट- दूसरा स्थान