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महाभारत के भीष्म पितामह की तरह महंत दिग्विजय नाथ ने अपने प्रतिद्वंदी को दिया था आशीर्वाद, पढ़िए ये रोचक कहानी
Thu, 18 Jun 2020 05:43 PM IST
vivek shukla
टीपी शाही, गोरखपुर।
टीपी शाही, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Thu, 18 Jun 2020 05:43 PM IST
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महंत दिग्विजय नाथ।
- फोटो : अमर उजाला।
आजकल की राजनीति इस कदर बदल गई है कि एक प्रत्याशी दूसरे प्रत्याशी के के खिलाफ मानों चुनाव नहीं युद्ध लड़ रहा हो। हालांकि पहले की राजनीति ऐसी नहीं थी। महाभारत में भीष्म पितामह और कृपाचार्य द्रोणाचार्य युधिष्ठिर को हमेशा विजयी भव: का आशीर्वाद देते थे।
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ठीक इसकी तरह का आशीर्वाद लोकसभा के चुनाव में ब्रह्मलीन महंत दिग्विजय नाथ अपने प्रतिद्वंदी सिंहासन सिंह जो कांग्रेस के प्रत्याशी हुआ करते थे, उनको देते थे। ब्रह्मलीन दिग्विजय नाथ के निधन के बाद सिंहासन सिंह ने अपनी शोक संवेदना में लिखा है कि 1952 में जब पहली बार लोकसभा का चुनाव हो रहा था तब गोरखपुर संसदीय क्षेत्र से वह कांग्रेस के प्रत्याशी थे।
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हिंदू कोड बिल के विरोध के कारण दिग्विजय नाथ, हिंदू महासभा से प्रत्याशी थे। वे लिखते हैं कि नामांकन करने के बाद दिग्विजय नाथ महाराज से आशीर्वाद लेने गोरखनाथ मंदिर पहुंचे तो उन्होंने मुझे विजयी भव: का आशीर्वाद दिया।
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चुनाव से पहले या बाद में ना वो हमें कुछ कहते, ना हम कभी उनके खिलाफ कुछ बोले। चुनाव जीतने और हारने के बाद भी हमारे संबंध उसी तरह से तरह थे, जैसे एक गुरु और शिष्य का होता है।
सिंहासन सिंह ने लिखा है कि 1962 के चुनाव में उनका मुकाबला एक बार फिर मुझसे हुआ। राजनीति को हम लोग किसी खेल का मैच समझते थे। जीत हार के बाद जिस तरह से दोनों खिलाड़ी आपस में मिलते हैं और प्रेम भाव से रहते हैं ठीक उसी तरह का भाव मेरे मन में उनके और उनके मन में मेरे प्रति रहा।