यहां घर के भूतल से तीसरे तल तक खिलखिलाती है हरियाली, लोग कहते हैं 'हवा महल'
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राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष और पूर्व मेयर अंजू चौधरी सामाजिक दायित्वों का निर्वहन करने के बाद बागवानी के लिए वह रोजाना दो घंटे का समय निकालती है। घंटाघर में 1882 में बने कोठीनुमा भवन के भूतल पर तो भरा पूरा गार्डेन है ही, घर के तीसरे तल पर टैरेस लॉन हैं।
रोटरी क्लब के अध्यक्ष विक्रम चौधरी और उनकी पत्नी दिशा चौधरी, डॉ. निखिल चौधरी की भी पौधों की देखभाल में समान रुचि है। तीसरे तल पर गमलों में नीम, तुलसी, धनिया, पुदीना, अजवाइन, एलोवेरा ड्रेसीना व क्रोटन की विभिन्न प्रजातियां लगाई गईं हैं। भूतल पर एक तरफ फलदार वृक्ष जैसे बादाम, चेरी, शरीफा, इलायची, केला तो दूसरी ओर वैरीकेटेड साइकस, लिली, बोगनविलिया व केना के पौधे हैं। 55 साल पुराना साइकस गार्डन का आकर्षण है।
बच्चों की तरह पौधों की देखभाल करती हैं उमा
राजेंद्रनगर की उमा चंद्र उपाध्याय को बागवानी से बेहद लगाव है। बड़े बेटे चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. अमिताभ उपाध्याय और छोटे बेटे व्यवसायी डॉ. अभिजीत उपाध्याय के साथ रहने वाली उमा ने घर में 500 स्क्वायर फीट में सुंदर लॉन तैयार किया है। टैरेंस और पोर्टिको में भी करीब तीन सौ गमले लगाए हैं। उन्होंने बताया कि पौधों की देखभाल बच्चों की ही तरह करती हैं। अमरूद, जामुन, बसंत मासी, क्रिसमस ट्री, जावेरिया, बेला, जुही, क्रोटन, पॉम ट्री आदि उनके गार्डेन की शोभा बढ़ाते हैं।
प्रवीण ने 1200 स्क्वायर फीट में तैयार किया टैरेस गार्डेन