महराजगंज जिला मुख्यालय को रेल मार्ग से जोड़ने की मंशा रह गई अधूरी, इस आंदोलनकारी ने की थी पहल
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आज से 56 साल पहले प्रोफेसर शिब्बन लाल सक्सेना ने महराजगंज, निचलौल एवं ठूठीबारी कस्बे को रेल मार्ग से जोड़ने का प्रयास किया था। लेकिन उनके द्वारा किया गया प्रयास आज तक पूरा नहीं हो सका। इस बात का क्षेत्रवासियों को मलाल है। प्रोफेसर सक्सेना के प्रस्ताव को संसद में स्वीकृत नहीं किया गया। तब से लेकर आज तक जिला मुख्यालय को रेल मार्ग से जोड़ने का प्रयास करने का दावा हवाहवाई साबित हो रहा है।
बात वर्ष 1964 की है। उस वक्त सांसद प्रोफेसर शिब्बन लाल सक्सेना ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से गोरखपुर को महराजगंज, निचलौल, ठूठीबारी से जोड़ने के लिए 50 मिल रेलवे लाइन बिछाने के लिए प्रयास किया। वर्ष 1978 में प्रोफेसर सक्सेना ने एक प्रस्ताव संसद में रखा था। लेकिन वह स्वीकार नहीं हुआ।
उस वक्त प्रोफेसर सक्सेना ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि रेल मंत्रालय के पक्षपात से मेरी आत्मा को गहरा दुःख हुआ है। प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई को पत्र लिखकर उन्होंने कहा कि मेरी मांग है कि खलीलाबाद से बलरामपुर तक प्रस्तावित 100 मील लंबी रेलवे लाइन के स्थान पर 50 मील लंबी गोरखपुर से महराजगंज, निचलौल और ठूठीबारी तक रेल लाइन का निर्माण कराया जाय।
तब से लेकर आज तक जिला मुख्यालय महराजगंज को रेलवे से जोड़ने की कवायद की गई। लेकिन प्रयास कारगर नहीं हुआ। अभी रेल लाइन से जोड़ने का प्रयास ठंडा पड़ गया है।
पूरे मनोयोग से हो रहा प्रयास
डॉ. सिद्धार्थनाथ शुक्ल ने बताया कि जिला मुख्यालय को रेल लाइन से जोड़ने के लिए अगर कारगर प्रयास हुआ होता तो शायद प्रोफेसर सक्सेना का सपना पूरा हो गया होता। लेकिन पूरे मनोयोग से प्रयास नहीं हुआ। अब तो ऐसा लगता है कि जिला मुख्यालय को रेल लाइन से जोड़ने की मंशा स्वप्न बन कर रह जाएगा।
सांसद पंकज चौधरी ने कहा कि जिला मुख्यालय को रेल मार्ग से जोड़ने के लिए हर संभव कोशिश की गई। इसके लिए रेल मंत्रालय से लेकर संसद में आवाज उठाई गई। क्षेत्रवासियों की भावनाओं को देखते हुए पूरे मनोयोग से प्रयास हो रहा है। उम्मीद है कि जल्दी ही जिला मुख्यालय रेल मार्ग से जुड़ेगा।