कोरोना की चुनौतियों से लड़ने का दावा भूले निजी अस्पताल, सोशल डिस्टेंसिंग की उड़ रहीं धज्जियां, देखें तस्वीरें
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लॉकडाउन खुलने के बाद सहूलियत मिली तो निजी अस्पतालों में सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ने लगीं। कुछ निजी अस्पतालों के अंदर और बाहर की व्यवस्था की शनिवार को अमर उजाला संवाददाता नीरज मिश्र ने पड़ताल की तो स्थिति कुछ ऐसी ही दिखी। ऐसा लगा कि कोरोना का खौफ खत्म हो गया है।
अब किसी को मास्क, सैनिटाइजर की जरूरत नहीं है। मरीज-तीमारदार सटकर खड़े दिखे। कुछ अस्पताल संचालकों ने अंदर बेहतर व्यवस्था का दावा किया, लेकिन अस्पताल के बाहर की व्यवस्था कोविड-19 प्रोटोकाल के खिलाफ मिली।
सबसे जरूरी मानक सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कहीं नहीं मिला, जबकि इमरजेंसी सेवा शुरू करने से पहले निजी अस्पताल संचालकों ने सोशल डिस्टेंसिंग का सख्ती से अनुपालन का भरोसा दिलाया था। यह भरोसा कागजों तक सिमटा है।
अगर कोई कोरोना संक्रमित निजी अस्पतालों में गलती से पहुंच गया तो कइयों की शामत आएगी। यह निजी अस्पताल संचालक भी जानते हैं। इस पड़ताल का उद्देश्य लोगों को केवल जागरूक करना है। आप भी पढ़ें, व्यवस्था की पड़ताल करती रिपोर्ट-
दाउदपुर स्थित चैतन्य हॉस्पिटल का बड़ा गेट पूरी तरह बंद था। बाहर धक्कामुक्की करके मरीज छोटे गेट के रास्ते अंदर जाने का रास्ता तलाश रहे थे। इस बीच अंदर से एक व्यक्ति पीपीई किट पहने आया और लोगों को एक-एक करके अंदर आने की सलाह दी। लेकिन लोग उसकी बातों को नजर अंदाज करके एक-दूसरे से सटकर आगे जाने की कोशिश करते रहे।
सोशल डिस्टेंसिंग पूरी तरह से तार-तार होती दिखी। अंदर पीपीई किट पहना व्यक्ति थर्मल स्कैनर से अंदर जाने वालों की जांच करता मिला।
छात्रसंघ चौराहा स्थित पल्स हॉस्पिटल का छोटा सा गेट खुला था। बाहर खड़े लोग इसी गेट से अंदर जाने का प्रयास कर रहे थे। सोशल डिस्टेंसिंग दरकिनार कर लोग निर्धारित दूरी से ज्यादा करीब खड़े मिले। अंदर जाने के दौरान रोकटोक पर गार्ड से कहासुनी का सिलसिला चलता रहा। अस्पताल के बाहर इलाज कराने वालों की भीड़ ऐसी थी कि लग नहीं रहा था कि लोग इमरजेंसी में इलाज कराने आए हैं। ज्यादातर के चेहरे पर मास्क नहीं दिखा।
रचित हॉस्पिटल डॉ विनय राय ने बताया कि अस्पताल के गेट पर तीन स्टाफ खड़ा रहता है। इमरजेंसी ओपीडी में केवल मरीज को आने दिया जा रहा है। इनडोर मरीजों के लिए पास जारी किया गया है। अस्पताल के अंदर सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा पालन किया जा रहा है। हॉस्पिटल के बाहर भी मरीजों के तीमारदारों को समझाया जाता है।
पल्स हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. राकेश दूबे ने बताया कि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन सुनिश्चित करने के लिए अस्पताल में 50 प्रतिशत बेड कम कर दिए गए हैं। गेट पर गार्ड भी लगाया है। केवल मरीजों को ही इंट्री दी जा रही है। इसके बाद भी लोग गार्ड से लड़ जा रहे हैं। हॉस्पिटल के अंदर पूरी तरह से सोशल डिस्टेंसिंग का पालन हो रहा है।
ये एहतियात जरूरी
गोरखपुर सीएमओ डॉ. श्रीकांत तिवारी ने बाताया कि कोरोना से बचाव के लिए सोशल डिस्टेंसिंग बेहद जरूरी है। निजी अस्पतालों को इमरजेंसी इलाज की अनुमति इसी शर्त पर दी गई है कि वे सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करेंगे। अस्पताल के अंदर और बाहर की यह जिम्मेदारी प्रबंधकों को उठानी होगी। स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार निरीक्षण कर रही है। अगर लापरवाही मिली तो कार्रवाई की जाएगी।
- अस्पताल में बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम होना जरूरी।
- कोविड-19 के तहत हैंड सैनिटाइजर, मास्क और थर्मल स्कैनिंग की व्यवस्था अनिवार्य।
- अस्पताल के अंदर व बाहर सोशल डिस्टेंसिंग का सख्ती से पालन।