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Gorakhpur News: तय मानक से कम जमीन पर भी सीबीएसई की मान्यता, 17 स्कूलों की होगी जांच
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कई विद्यालयों के भवनों का नक्शा पास नहीं, फिर भी मिल गई बेसिक शिक्षा विभाग से संबद्धता
शिकायत पर अपर जिलाधिकारी ने तहसीलदार को सौंपी जांच
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। शहर और जिले के कई निजी स्कूलों की सीबीएसई और बेसिक शिक्षा विभाग से संबद्धता में बड़ा खेल सामने आया है। ऐसे 17 विद्यालयों की शिकायत प्रशासन से की गई है। इसमें तय मानक से कम जमीन होने के बावजूद सीबीएसई की मान्यता देने का आरोप लगाया गया है। साथ ही इसमें कुछ विद्यालय ऐसे भी हैं, जिनका जीडीए की ओर से नक्शा पास नहीं होने के बावजूद उसे बेसिक शिक्षा विभाग से संबद्धता मिल गई है। शिकायत पर अपर जिलाधिकारी ने तहसीलदार सदर, सहजनवां और बांसगांव को जांच सौंपी है।
शिकायतकर्ता मनीष ने इस संबंध में मंडलायुक्त से शिकायत की थी। उन्होंने आरोप लगाया है कि शहर के कई विद्यालयों में समिति से प्राप्त की गई मान्यता में इंगित भूमि है ही नहीं। उन्होंने जांच कराकर मान्यता निरस्त करने की मांग की है।
उन्होंने यह भी शिकायत की है कि शहर में 80 प्रतिशत से अधिक स्कूल बिना नक्शे के संचालित हो रहे हैं। समय-समय पर शिक्षा निदेशालय की तरफ से नियमों में संशोधन होते रहे हैं, लेकिन नक्शा स्वीकृत कराना अनिवार्य है।
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वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश खुल्लर ने बताया कि सीबीएसई की तरफ से तय मानक से कम क्षेत्रफल में विद्यालय के भवन बनेंगे तो कमरे छोटे होंगे। कमरों का आकार छोटा होने पर बच्चों की आंखों पर पढ़ते समय जोर पड़ेगा। शुरुआती उम्र में बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ना उनके भविष्य के लिए खतरनाक होगा। स्कूल संचालक निजी लाभ के चक्कर में बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।
मान्यता के लिए कठिन कसौटियां
दरअसल, कक्षा 8 तक के स्कूल के लिए शिक्षा निदेशालय की तरफ से मान्यता दी जाती है। इसके बाद 9वीं, 10वीं और 12वीं के लिए बोर्ड से संबद्धता ली जाती है। ऐसे में स्कूल प्रबंधन को सभी विभागों की एनओसी, जैसे विद्युत सुरक्षा, फायर, जीडीए से स्वीकृत नक्शा, जमीन, तय मानक के अनुसार भवन का निर्माण, क्रीड़ा स्थल, कैंटीन, लाइब्रेरी और अन्य मानकों की पूरी जांच कर शिक्षा विभाग की तरफ से कमेटी और प्रबंधन को दी जाती है। इसी आधार पर संबद्धता की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाता है। आवेदन के बाद सीबीएसई बोर्ड की टीम भौतिक निरीक्षण और सत्यापन कर अपनी रिपोर्ट लगाती है।
जीडीए ने नहीं की कोई कार्रवाई
शिकायतकर्ता मनीष का कहना है कि प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर की कक्षाओं के लिए जमीन के साथ भवन का नक्शा स्वीकृत होना अनिवार्य है। बेसिक शिक्षा विभाग की तरफ से इसके लिए मानक बनाए गए हैं। भवन निजी होने के साथ भू-उपयोग शैक्षणिक मद में पंजीकृत होना भी अनिवार्य है। इसके अलावा स्कूल के सामने 30 फीट का रोड भी जरूरी है, लेकिन इन नियमों को दरकिनार कर आराम से लोगों ने निजी स्कूल की संबद्धता बोर्ड से करवा ली और संचालन कर रहे हैं। जीडीए हाल के दिनों में अवैध कटरे, बिना नक्शा पास भवन व अन्य संपत्तियों पर कार्रवाई तो कर रही है, लेकिन इन विद्यालयों की जांच नहीं की। न ही इनके खिलाफ कार्रवाई हो सकी है।
बिना मान्यता के भी चल रहे हैं स्कूल
शहर के तारामंडल इलाके में भी कई स्कूल ऐसे हैं, जिनकी किसी भी बोर्ड से मान्यता नहीं है। फिर भी ये अपने स्कूल का संचालन कर रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि बोर्ड से संबद्ध दूसरे स्कूलों से अपने स्कूल को अटैच कर छात्रों को शिक्षा दे रहे हैं।
वर्जन
शिकायती पत्र का संज्ञान लेकर जांच के लिए 17 विद्यालयों की सूची तहसीलदार सदर, सहजनवां और बांसगांव को दी गई है। इन्हें मौके पर जाकर जांच कर रिपोर्ट देनी है। इसी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
-सुशील कुमार गोंड, अपर जिलाधिकारी
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शिकायत पर अपर जिलाधिकारी ने तहसीलदार को सौंपी जांच
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। शहर और जिले के कई निजी स्कूलों की सीबीएसई और बेसिक शिक्षा विभाग से संबद्धता में बड़ा खेल सामने आया है। ऐसे 17 विद्यालयों की शिकायत प्रशासन से की गई है। इसमें तय मानक से कम जमीन होने के बावजूद सीबीएसई की मान्यता देने का आरोप लगाया गया है। साथ ही इसमें कुछ विद्यालय ऐसे भी हैं, जिनका जीडीए की ओर से नक्शा पास नहीं होने के बावजूद उसे बेसिक शिक्षा विभाग से संबद्धता मिल गई है। शिकायत पर अपर जिलाधिकारी ने तहसीलदार सदर, सहजनवां और बांसगांव को जांच सौंपी है।
शिकायतकर्ता मनीष ने इस संबंध में मंडलायुक्त से शिकायत की थी। उन्होंने आरोप लगाया है कि शहर के कई विद्यालयों में समिति से प्राप्त की गई मान्यता में इंगित भूमि है ही नहीं। उन्होंने जांच कराकर मान्यता निरस्त करने की मांग की है।
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उन्होंने यह भी शिकायत की है कि शहर में 80 प्रतिशत से अधिक स्कूल बिना नक्शे के संचालित हो रहे हैं। समय-समय पर शिक्षा निदेशालय की तरफ से नियमों में संशोधन होते रहे हैं, लेकिन नक्शा स्वीकृत कराना अनिवार्य है।
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वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश खुल्लर ने बताया कि सीबीएसई की तरफ से तय मानक से कम क्षेत्रफल में विद्यालय के भवन बनेंगे तो कमरे छोटे होंगे। कमरों का आकार छोटा होने पर बच्चों की आंखों पर पढ़ते समय जोर पड़ेगा। शुरुआती उम्र में बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ना उनके भविष्य के लिए खतरनाक होगा। स्कूल संचालक निजी लाभ के चक्कर में बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।
मान्यता के लिए कठिन कसौटियां
दरअसल, कक्षा 8 तक के स्कूल के लिए शिक्षा निदेशालय की तरफ से मान्यता दी जाती है। इसके बाद 9वीं, 10वीं और 12वीं के लिए बोर्ड से संबद्धता ली जाती है। ऐसे में स्कूल प्रबंधन को सभी विभागों की एनओसी, जैसे विद्युत सुरक्षा, फायर, जीडीए से स्वीकृत नक्शा, जमीन, तय मानक के अनुसार भवन का निर्माण, क्रीड़ा स्थल, कैंटीन, लाइब्रेरी और अन्य मानकों की पूरी जांच कर शिक्षा विभाग की तरफ से कमेटी और प्रबंधन को दी जाती है। इसी आधार पर संबद्धता की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाता है। आवेदन के बाद सीबीएसई बोर्ड की टीम भौतिक निरीक्षण और सत्यापन कर अपनी रिपोर्ट लगाती है।
जीडीए ने नहीं की कोई कार्रवाई
शिकायतकर्ता मनीष का कहना है कि प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर की कक्षाओं के लिए जमीन के साथ भवन का नक्शा स्वीकृत होना अनिवार्य है। बेसिक शिक्षा विभाग की तरफ से इसके लिए मानक बनाए गए हैं। भवन निजी होने के साथ भू-उपयोग शैक्षणिक मद में पंजीकृत होना भी अनिवार्य है। इसके अलावा स्कूल के सामने 30 फीट का रोड भी जरूरी है, लेकिन इन नियमों को दरकिनार कर आराम से लोगों ने निजी स्कूल की संबद्धता बोर्ड से करवा ली और संचालन कर रहे हैं। जीडीए हाल के दिनों में अवैध कटरे, बिना नक्शा पास भवन व अन्य संपत्तियों पर कार्रवाई तो कर रही है, लेकिन इन विद्यालयों की जांच नहीं की। न ही इनके खिलाफ कार्रवाई हो सकी है।
बिना मान्यता के भी चल रहे हैं स्कूल
शहर के तारामंडल इलाके में भी कई स्कूल ऐसे हैं, जिनकी किसी भी बोर्ड से मान्यता नहीं है। फिर भी ये अपने स्कूल का संचालन कर रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि बोर्ड से संबद्ध दूसरे स्कूलों से अपने स्कूल को अटैच कर छात्रों को शिक्षा दे रहे हैं।
वर्जन
शिकायती पत्र का संज्ञान लेकर जांच के लिए 17 विद्यालयों की सूची तहसीलदार सदर, सहजनवां और बांसगांव को दी गई है। इन्हें मौके पर जाकर जांच कर रिपोर्ट देनी है। इसी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
-सुशील कुमार गोंड, अपर जिलाधिकारी