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गोरखपुर: भालोटिया मार्केट की नींव रखने वाले श्रीप्रकाश भालोटिया नहीं रहे, श्रद्धांजलि देने वालों का लगा ताता

Sun, 24 Sep 2023 12:16 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sun, 24 Sep 2023 12:16 PM IST
सार

भालोटिया मार्केट की शुरुआत करीब 50 साल पहले हुई थी। अब यहां लगभग 700 दुकानें हैं जिनमें थोक और फुटकर दवाओं की बिक्री होती है। यहां से गोरखपुर-बस्ती और आजमगढ़ मंडल के अलावा पड़ोसी राज्य बिहार के गोपालगंज व बगहा तक के व्यापारी दवा खरीदने आते हैं।

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Shriprakash Bhalotia who laid foundation of Bhalotia Market is no more
भालोटिया मार्केट की फाइल फोटो( - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

पूर्वांचल में दवा की सबसे बड़ी मंडी भालोटिया मार्केट की नींव रखने वाले श्रीप्रकाश भालोटिया (80) का शनिवार को निधन हो गया है। रविवार को अयोध्या में अंतिम संस्कार किया जाएगा। निधन की सूचना पर भालोटिया के सभी दवा विक्रेताओं समेत शहर के तमाम गणमान्य लोगों ने घर पहुंचकर श्रद्धांजलि दी।
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शहर के बीचोबीच स्थित भालोटिया मार्केट की शुरुआत करीब 50 साल पहले हुई थी। अब यहां लगभग 700 दुकानें हैं जिनमें थोक और फुटकर दवाओं की बिक्री होती है। यहां से गोरखपुर-बस्ती और आजमगढ़ मंडल के अलावा पड़ोसी राज्य बिहार के गोपालगंज व बगहा तक के व्यापारी दवा खरीदने आते हैं।
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कहा जाता है कि जो दवा भालोटिया में नहीं मिलती, वह आसपास कहीं नहीं मिलती। श्रीप्रकाश भालोटिया के निधन की खबर सुनकर दवा विक्रेता योगेंद्र द्विवेदी, आलोक चौरसिया, राजेश अग्रवाल, अर्जुन अग्रवाल, संतोष श्रीवास्तव आदि ने घर पहुंचकर श्रद्धांजलि दी।
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बोले व्यापारी
श्रीप्रकाश भलोटिया ने ही इस मार्केट की नींव रखी थी। धीरे-धीरे दुकानों की संख्या बढ़ती चली गई। आज भालोटिया मार्केट की दवा बाजार में अच्छी खास पहचान है। श्रीप्रकाश भालोटिया के निधन की खबर से मर्माहत हूं। - योगेंद्र नाथ द्विवेदी, अध्यक्ष दवा विक्रेता समिति गोरखपुर

एक प्रयास से गोरखपुर को विशिष्ट पहचान दिलाने वाले श्रीप्रकाश भलोटिया के निधन से सभी दवा विक्रेता मर्माहत हैं। उनके प्रयासों की बदौलत ही यह मंडी इतनी फल फूल रही है।- आलोक चौरसिया, महामंत्री

जब भी भलोटिया मार्केट की चर्चा होगी तो श्रीप्रकाश भलोटिया की याद जरूर आएगी। शहर के बीच में न केवल उन्होंने एक बड़ा बाजार दिया, बल्कि लोगों के लिए सहूलियत भी दी। यहां दिल्ली-लखनऊ की दवाएं मिलती हैं।- अरुण बंका, दवा विक्रेता



पूरे पूर्वांचल में आज भी भलोटिया से बड़ी दवा की कोई मंडी नहीं है। श्रीप्रकाश भलोटिया ने जिस सकारात्मक सोच के साथ इस मंडी को विकसित किया होगा, उसी का नतीजा है कि यह बाजार अपने आप में खास बन गया।- दिलीप सिंह, दवा विक्रेता
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