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Exclusive: गोवर्धन मठ पुरी के जगतगुरु ने आदित्य से किया संवाद, बोले- तुम हो आदित्यनाथ के उत्तराधिकारी
Fri, 29 Oct 2021 10:08 AM IST
vivek shukla
राजन राय, गोरखपुर।
राजन राय, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Fri, 29 Oct 2021 10:08 AM IST
सार
शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती महाराज श्रद्धालुओं के बीच बस 10 मिनट तक ही रहे। इस दौरान उन्होंने बस एक बच्चे से संवाद किया। इसके बाद वे अपने कमरे में चले गए और देर रात तक ग्रंथ लिखते रहे।
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गोरखपुर में शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती महाराज
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
गोवर्धन मठ पुरी के जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती महाराज गुरुवार को गोरखपुर में अपने प्रवास के दौरान महज दस मिनट ही श्रद्धालुओं के बीच रहे। इस दौरान सिर्फ एक बच्चे आदित्य सिंह से ही उन्होंने बात की। इसके बाद वे अपने कमरे में चले गए और देर रात तक ग्रंथ लिखते रहे।
शंकराचार्य इन दिनों अपनी धार्मिक यात्रा के दौरान दो ग्रंथ (किताब) लिख रहे हैं। इसमें एक हिंदू अस्तित्व पर आधारित है। शंकराचार्य का दर्शन करने बहुत सारे श्रद्धालु पहुंचे थे लेकिन वे किसी से नहीं मिले। करीब सात बजे अपने कमरे चले गए और उसके बाद मुख्य दरवाजा बंद कर दिया गया। जिस घर में ठहरे हैं, वहां के लोग भी पीछे की ओर से आते-जाते रहे।
उनके अनुयायी एवं आदित्य वाहिनी के अध्यक्ष प्रेम चंद्र झा ने बताया कि शंकराचार्य खुद ही लिखते हैं। एक बार में तीन से चार घंटे तक लिखते रहते हैं। उस वक्त किसी को उनके पास जाने की इजाजत नहीं होती है। एक ग्रंथ अब पूरी होने की प्रक्रिया में है। करीब 200 ग्रंथों को अब तक लिख चुके हैं।
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आदित्य से कहा, तुम आदित्य के उत्तराधिकारी
शंकराचार्य जब अपनी पीठ पर बैठे तो उनकी निगाह एक बच्चे पर गई। बच्चा भी उन्हें बड़े गौर से देख रहा था। बच्चे को इशारे कर बुलाया। पास आने पर पूछा कि क्या नाम है? बच्चे ने तपाक से कहा, आदित्य। दो मिनट तक उसे देखते रहे फिर शंकराचार्य बोले। आदित्य, तुम आदित्य यानी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उत्तराधिकारी बनोगे। बच्चे के पिता राजेश सिंह से बोले, आपके बच्चे में बहुत तेज है। यह आगे चलकर राजनीति में जाएगा।
रात 12:30 बजे किए भोजन
शंकराचार्य ने रात करीब 12:30 बजे भोजन ग्रहण किया। उनका भोजन भी उनके पीठ से साथ आए रसोइए ने बनाया। बताया कि भोजन में उन्होंने सब्जी, रोटी ही खाया।
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शंकराचार्य इन दिनों अपनी धार्मिक यात्रा के दौरान दो ग्रंथ (किताब) लिख रहे हैं। इसमें एक हिंदू अस्तित्व पर आधारित है। शंकराचार्य का दर्शन करने बहुत सारे श्रद्धालु पहुंचे थे लेकिन वे किसी से नहीं मिले। करीब सात बजे अपने कमरे चले गए और उसके बाद मुख्य दरवाजा बंद कर दिया गया। जिस घर में ठहरे हैं, वहां के लोग भी पीछे की ओर से आते-जाते रहे।
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उनके अनुयायी एवं आदित्य वाहिनी के अध्यक्ष प्रेम चंद्र झा ने बताया कि शंकराचार्य खुद ही लिखते हैं। एक बार में तीन से चार घंटे तक लिखते रहते हैं। उस वक्त किसी को उनके पास जाने की इजाजत नहीं होती है। एक ग्रंथ अब पूरी होने की प्रक्रिया में है। करीब 200 ग्रंथों को अब तक लिख चुके हैं।
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आदित्य से कहा, तुम आदित्य के उत्तराधिकारी
शंकराचार्य जब अपनी पीठ पर बैठे तो उनकी निगाह एक बच्चे पर गई। बच्चा भी उन्हें बड़े गौर से देख रहा था। बच्चे को इशारे कर बुलाया। पास आने पर पूछा कि क्या नाम है? बच्चे ने तपाक से कहा, आदित्य। दो मिनट तक उसे देखते रहे फिर शंकराचार्य बोले। आदित्य, तुम आदित्य यानी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उत्तराधिकारी बनोगे। बच्चे के पिता राजेश सिंह से बोले, आपके बच्चे में बहुत तेज है। यह आगे चलकर राजनीति में जाएगा।
रात 12:30 बजे किए भोजन
शंकराचार्य ने रात करीब 12:30 बजे भोजन ग्रहण किया। उनका भोजन भी उनके पीठ से साथ आए रसोइए ने बनाया। बताया कि भोजन में उन्होंने सब्जी, रोटी ही खाया।