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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   Shabd-Samvad: A gathering of literary and cultural workers from across the country will be organised.

शब्द-संवाद: गोरखपुर लिटफेस्ट का छठा संस्करण शुरू, सजेगी देशभर के साहित्य-संस्कृतिकर्मियों की महफिल

Mon, 18 Dec 2023 10:30 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Mon, 18 Dec 2023 10:30 AM IST
सार

आयोजन समिति के अध्यक्ष प्रो. हर्ष सिन्हा ने बताया कि हमेशा की तरह इस बार भी शब्द संवाद में साहित्यिक चर्चा के साथ साथ समकालीन मुद्दों पर भी गंभीर विमर्श के सत्र आयोजित किए गए हैं। लोकतंत्र और साहित्य विषयक उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि प्रख्यात साहित्यकार अग्निशेखर होंगे, जबकि उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता साहित्य अकादमी के पूर्व अध्यक्ष व पद्मश्री प्रो. विश्वनाथ प्रसाद तिवारी करेंगे।

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Shabd-Samvad: A gathering of literary and cultural workers from across the country will be organised.
गोरखपुर लिटफेस्ट - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

गोरखपुर शहर की साहित्यिक, सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध बनाने वाले गोरखपुर लिटरेरी फेस्टिवल 'शब्द संवाद' के छठे संस्करण का आयोजन 23 व 24 दिसंबर को बैंक रोड स्थित विवेक उत्सव लॉन में किया जाएगा। दो दिन में कुल 16 सत्रों में होने वाले इस कार्यक्रम में देश के नामचीन साहित्यकार, पत्रकार, अभिनेता एवं संस्कृति कर्मी शामिल होंगे।

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आयोजन समिति के अध्यक्ष प्रो. हर्ष सिन्हा ने बताया कि हमेशा की तरह इस बार भी शब्द संवाद में साहित्यिक चर्चा के साथ साथ समकालीन मुद्दों पर भी गंभीर विमर्श के सत्र आयोजित किए गए हैं। लोकतंत्र और साहित्य विषयक उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि प्रख्यात साहित्यकार अग्निशेखर होंगे, जबकि उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता साहित्य अकादमी के पूर्व अध्यक्ष व पद्मश्री प्रो. विश्वनाथ प्रसाद तिवारी करेंगे। सत्र के मुख्य वक्ता ख्यातिप्राप्त कवि व साहित्यकार अरुण कमल होंगे। इस सत्र में निर्वासन और विस्थापन की पीड़ा के कवि अग्निशेखर भी उपस्थित रहेंगे।
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प्रो. सिन्हा ने बताया कि विभिन्न विमर्श सत्रों के अलावा आयोजन के पहले दिन दास्तानगोई के मशहूर प्रस्तोता महमूद फारूकी और दारेन शाहिदी इस बार श्रीलाल शुक्ल की अमर कृति राग दरबारी पर आधारित दास्तानगोई प्रस्तुत करेंगे। दूसरे दिन की शाम सम्मान सत्र और सांस्कृतिक संगम की नाट्य प्रस्तुति दुखवा में बीतल रतिया के मंचन से होगी।
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निशुल्क रहेगा प्रवेश
लिटफेस्ट के संयोजक अचिंत्य लाहिड़ी ने बताया कि बैंक रोड स्थित विवेक उत्सव लॉन में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रवेश इस बार भी पूरी तरह निशुल्क है। आयोजन सचिव संजय कुमार ने साहित्य प्रेमियों से आयोजन में बढ़-चढ़कर प्रतिभाग करने की अपील करते हुए उम्मीद जताई कि महानगर की समृद्ध साहित्यिक सांस्कृतिक परंपरा और विरासत को आगे बढ़ाने के इस विनम्र प्रयास में इस बार भी समृद्ध जन भागीदारी होगी ।

ये हस्तियां रहेंगी मौजूद
साहित्य
प्रो. विश्वनाथ तिवारी, अरुण कमल, अलका सरावगी, अग्निशेखर, प्रियदर्शन, देवेंद्र आर्य, सत्यानंद निरुपम, डाॅ अजीज़, डाॅ कलीम क़ैसर, अंकिता सिंह, नवीन चौधरी, विनीता अस्थाना, प्रवीण कुमार, केशव मोहन पांडेय।

मीडिया
विजय त्रिवेदी, नागेंद्र, आशुतोष, रुबिका लियाकत, हर्षवर्धन त्रिपाठी

सिनेमा, रंगकर्म
अन्नू कपूर, रवि किशन, संजय मिश्रा, डाॅ सागर, महमूद फारूकी, दारेन शाहिदी

 

वर्तमान समाज को लेकर देशभर में क्या लिखा जा रहा है, यह हमें ऐसे आयोजनों से पता चलता है। यह मौका होता है कि देश भर के विख्यात साहित्यकारों के विचारों को रूबरू सुन सकते हैं। छोटे शहरों में भी ऐसे आयोजन होने से अभिव्यक्ति को मुखरता मिलती है।-रणविजय सिंह, व्यंग्यकार।

लिटरेरी फेस्ट जैसे आयोजन के पीछे एक बड़ा उद्देश्य होता है। इसके माध्यम से साहित्य में अभिरुचि वालों को उन प्रख्यात लोगों को रूबरू सुनने और संवाद करने का अवसर मिल सके, जिन्हें वे अब तक उनकी किताबों से और उनकी तस्वीरों से देखते, सुनते और जानते आए हैं। केवल मोबाइल की खिड़की से दुनिया देख रहे युवाओं के लिए भी ऐसे आयोजन प्रत्यक्ष संवाद की ताकत समझने का मौका देते हैं।-प्रो हर्ष सिन्हा, अध्यक्ष जीएलएफ व आचार्य गोविवि।

लोकतंत्र का मौलिक तत्व है विचारों की स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आजादी। साहित्य आधारित आयोजनों में हमें मौका मिलता है कि प्रबुद्ध लोगों तक साहित्य के माध्यम से अपने विचारों को साझा कर सकें। साहित्यिक गतिविधियों को गति प्रदान करने में ऐसे आयोजन मददगार साबित हो सकते हैं, बशर्ते वे किसी प्रछन्न आयोजकीय दबाव और उद्देश्य से मुक्त हों।-देवेंद्र आर्य कवि-गज़लकार।

हम लोग देश-विदेश में साहित्य उत्सवों और कवि सम्मलनों में बुलाए जाते हैं। जब अपने शहर में इस तरह के आयोजन होते देखते हैं तो गर्व की अनुभूति होती है। एक ही मंच पर साहित्य, मीडिया, रंगमंच, संगीत, राजनीति व हिंदी सिनेमा के दिग्गजों से मिलना शहरवासियों के लिए एक अवसर है।-डॉक्टर कलीम कैसर, शायर, मंच संचालक व संस्कृतिकर्मी।
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