Exclusive: गोरखपुर की सात राइस मिलों की करतूत, हड़प लिया 34,451 कुंतल सरकारी चावल
आरटीआई से रिपोर्ट सार्वजनिक हुई, जांच के दौरान यह घोटाला उजागर हुआ। 9.62 करोड़ रुपये का चावल हड़प कर मिलर बैठ गए। एक करोड़ से ज्यादा के कीमत का गेहूं भी हजम किया है। 293 धान क्रय केंद्र बने थे, लेकिन 38 की जांच से ही यह घोटाला पकड़ में आ गया।
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गोरखपुर जिले में सात राइस मिलर 34,451.49 कुंतल सरकारी चावल हड़प कर गए। अब चावल की निर्धारित कीमत 9.62 करोड़ से ज्यादा की रकम भी नहीं जमा कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश कोऑपरेटिव फेडरेशन लिमिटेड (यूपी पीसीएफ) ने मिलरों को रिकवरी नोटिस (आरसी) जारी करके खानापूर्ति कर दी। घोटाला पकड़े 11 महीने से ज्यादा का समय बीत गया है, फिर भी कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई।
अब (22 नवंबर 2021) सूचना के अधिकार अधिनियम (आरटीआई) से घोटाले की प्रारंभिक रिपोर्ट सार्वजनिक हुई है। यह आरटीआई राप्तीनगर फेज चार के निवासी संजय मिश्रा ने लगाई थी। इस रिपोर्ट के मुताबिक सरकारी गेहूं खरीदा गया, लेकिन गोदाम तक नहीं पहुंचा। इसके जरिए एक करोड़ से ज्यादा की चपत सरकार को लगाई गई है।
जानकारी के मुताबिक जिले में 2017-18, 2018-19 और 2019-20 में धान के 293 क्रय केंद्र बनाए गए थे। यूपीपीसीएफ के इन केंद्रों से धान खरीदे गए, फिर चावल बनाकर सरकारी गोदामों में भेजने की जिम्मेदारी गोरखपुर के अलग-अलग राइस मिलों को दी गई। इसी बीच मिलरों ने धान कुटाई से जो चावल (कस्टम मिल्ड) निकला, उसे गायब करना शुरू कर दिया। नियमानुसार, धान कुटाई से निकले 67 फीसदी चावल को सरकारी गोदामों तक पहुंचाना होता है, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। सरकारी चावल गोदाम तक नहीं पहुंच सका है।
शासन तक पहुंचा मामला
मामला शासन तक पहुंचा तो सहकारिता के चार अफसरों से जांच कराई गई। इन अफसरों ने 239 की जगह 38 क्रय केंद्रों के धान खरीद व मिलरों को भेजे गए स्टॉक का मिलान किया तो घोटाला सामने आ गया। पता चला कि गोरखपुर के अलग-अलग मिलरों ने तैयार किया गया 34,451.49 कुंतल चावल वापस नहीं किया। इससे सरकार को बड़ा नुकसान हुआ है।
अफसरों ने अलग-अलग मिलरों की जिम्मेदारी तय करते हुए रिपोर्ट पीसीएफ को भेजी है, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। रिपोर्ट दबा दी गई। इसी का नतीजा है कि पीसीएफ के तत्कालीन जिला प्रबंधक शैलेश कुमार के खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। जब घोटाला उजागर हुआ तो उन्हें मुख्यालय से संबद्ध करके खानापूर्ति कर दी गई।
वह अब भी काम कर रहे हैं। आरटीआई के जरिए मिली जांच रिपोर्ट के मुताबिक 38 क्रय केंद्रों की जांच हुई थी, लेकिन 28 क्रय केंद्रों के रजिस्टर पर प्रभारी के हस्ताक्षर नहीं थे। 10 केंद्रों के स्टॉक रजिस्टर पर ही प्रभारी के हस्ताक्षर मिले थे। यह भी बड़ी गड़बड़ी की तरफ इशारा करता है।
गोरखपुर के सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता सुनील कुमार गुप्ता ने कहा कि जिन मिलरों ने चावल नहीं दिया है, उन सबके खिलाफ आरसी जारी की गई है। तहसील स्तर से वसूली होनी है। सबसे बड़े बकाएदार मेसर्स स्वास्तिक एग्रो इंडिया गीडा की जमीन कुर्क कर दी गई है। जल्द नीलामी कराई जाएगी। तत्कालीन जिला प्रबंधक शैलेश कुमार को पीसीएफ मुख्यालय से संबद्ध किया गया था। कुछ रिकवरी भी हुई है।