Gorakhpur News: गोरखपुर महोत्सव में खाली कुर्सियां देख मंत्री ने पर्यटन अधिकारी को लगाई फटकार, जताई नाराजगी
गोरखपुर महोत्सव की तैयारियां उद्घाटन समारोह के बाद भी चलती नजर आईं। सुबह जब पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह मंच पर उद्घाटन करने पहुंचे तब वीवीआईपी गेट के रास्तों को रोलर चलाकर बराबर किया जा रहा था। मंच पर भाषण दे रहे थे, तो मुख्य मंच के सामने और बगल में स्टॉल लगाए जा रहे थे।
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तीन दिवसीय गोरखपुर महोत्सव के शुभारंभ के मौके पर बुधवार को ज्यादातर कुर्सियों का खाली रहना, महोत्सव स्थल से लेकर शहर में भी चर्चा का विषय बना रहा। कुर्सियां खाली देख पर्यटन मंत्री ने क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी पर कड़ी नाराजगी भी जताई।
दीप प्रज्ज्वलित कर महोत्सव की शुरूआत करने के बाद जैसे ही वह मंच से उतरे, पर्यटन अधिकारी को बुलाया और खाली कुर्सियों की तरफ इशारा करते हुए कहा कि नजारा बता रहा है कि महोत्सव का प्रचार-प्रसार ठीक से नहीं हुआ है।
हालांकि खाली कुर्सियों को लेकर जब पत्रकारों ने सवाल किया तो पर्यटन मंत्री अपनी नाराजगी छिपा गए। कहा कि कड़ाके की ठंड और आचार संहिता लागू होने की वजह से लोगों की भीड़ नहीं हो पाई है।
पर्यटन मंत्री ने कहा कि कार्यक्रम के आयोजन में किसी भी तरह की लापरवाही बरती गई है तो इसके लिए वह, अधिकारियों से बातचीत करेंगे। जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि गोरखपुर महोत्सव में आएं और कार्यक्रम का आनंद लें।
पर्यटन मंत्री के साथ मौजूद सदर सांसद रवि किशन ने कहा कि ठंड की वजह से इस समय कार्यक्रम में भीड़ नहीं दिख रही है। अगर किसी तरह की कमी रह गई है तो अधिकारियों से वार्ता कर व्यवस्था को दुरुस्त किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि कोरोना की वजह से दो साल बाद गोरखपुर महोत्सव का आयोजन हो रहा है। इसमें कैलाश खेर और सोनू निगम जैसे पार्श्वगायक परफार्म करेंगे। लोगों से अपील है कि वे ठंड से खुद को बचाते हुए महोत्सव में आएं और कार्यक्रम का आनंद उठाएं।
महोत्सव के शुभारंभ के बाद भी चलती रहीं तैयारियां
गोरखपुर महोत्सव की तैयारियां उद्घाटन समारोह के बाद भी चलती नजर आईं। सुबह जब पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह मंच पर उद्घाटन करने पहुंचे तब वीवीआईपी गेट के रास्तों को रोलर चलाकर बराबर किया जा रहा था। मंच पर भाषण दे रहे थे, तो मुख्य मंच के सामने और बगल में स्टॉल लगाए जा रहे थे।
दोपहर 12 बजे तक पुस्तक प्रदर्शनी, शिल्प मेला, खाने-पीने के स्टॉल लगाए जाने का सिलसिला जारी था। कितने स्टॉल सज गए हैं, कितने बाकी हैं इसका जवाब किसी भी जिम्मेदार के पास नहीं था। आयोजन स्थल पर दिन में अलाव का कोई प्रबंध नहीं किया गया था।