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गोरखपुर में बोले आरएसएस प्रमुख डॉ. भागवत: धर्म सिखाता है मिलकर जीने का तरीका, इसे सुरखित रखना है

Wed, 23 Mar 2022 10:10 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 23 Mar 2022 10:10 AM IST
सार

संघ प्रमुख मोहन भागवत मंगलवार देर रात बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में आयोजित संघ के पारिवारिक स्नेहिल मिलन समारोह को संबोधित कर रहे थे। समारोह में एक हजार से अधिक स्वयंसेवकों और उनके परिजनों ने हिस्सा लिया।

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RSS chief Mohan bhagwat took part in family friendly meeting
आरएसएस के सर संघचालक डॉ. मोहन भागवत। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सर संघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि धर्म हमें मिलकर जीने का तरीका सिखाता है। परस्पर संघर्ष न हो, इसके लिए हम अपना हित साधें, लेकिन दूसरे का अहित न हो, इसकी चिंता जरूर करें। यही सनातन धर्म है। यही मानव धर्म है। यही आज हिंदू धर्म है। संपूर्ण विश्व को तारण देने वाला धर्म है, जिसके लिए कमाई भी देनी पड़ती है।
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संघ प्रमुख मोहन भागवत मंगलवार देर रात बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में आयोजित संघ के पारिवारिक स्नेहिल मिलन समारोह को संबोधित कर रहे थे। समारोह में एक हजार से अधिक स्वयंसेवकों और उनके परिजनों ने हिस्सा लिया। आरएसएस प्रमुख ने परिवार के लिए छह मंत्र दिए।
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उन्होंने कहा कि भाषा, भोजन, भजन, भ्रमण, भूषा और भवन के जरिए अपनी जड़ों से जुड़ा रहा जा सकता है। मेरा परिवार स्वस्थ और सुखी रहे, इसकी चिंता हमेशा करनी होगी। समाज के स्वस्थ व सुखी रखने के बारे में सोचना पड़ेगा। परिवार असेंबल की गई इकाई नहीं है, यह प्रकृति प्रदत्त संरचना है।
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कहा कि परिवार को सुरक्षित रखना और उसका संरक्षण करना हमारा दायित्व है। हमारे समाज की इकाई कुटुंब है, कोई व्यक्ति नहीं। दूसरे देशों में व्यक्ति को इकाई मानते हैं। भारत में ऐसा नहीं है। हम व्यक्ति तो हैं, लेकिन एक अकेले नहीं हैं।

 

समाज बनाने का काम करता है संघ : भागवत

आरएसएस प्रमुख डॉक्टर मोहन भागवत ने कहा कि संघ समाज बनाने का काम करता है, इसलिए धर्म भी है। उन्होंने कहा कि हम संघ के कार्यकर्ता के घर से हैं, इसलिए व्रतस्थ हैं। यह व्रत परिवार के किसी अकेले व्यक्ति का नहीं, पूरे परिवार का होता है। संघ की अपनी कुलरीति है।  

सर संघचालक मोहन भागवत मंगलवार देर रात बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में आयोजित संघ के पारिवारिक स्नेहिल मिलन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि संघ पर दो बार प्रतिबंध लगा था, लेकिन किसी स्वयंसेवक ने माफी नहीं मांगी। इसके पीछे पारिवारिक शक्ति रही। स्वयंसेवकों के साथ परिवार खड़ा रहा। परिवार सदा अड़ा रहा, इसलिए संघ का काम निरंतर चल रहा है। स्वयंसेवकों के परिजनों को संघ के बारे में जानना चाहिए। संघ का काम गंभीर है। हम सौभाग्यशाली हैं कि इस कार्य को आगे बढ़ा रहे हैं। यह हर स्वयंसेवक को समझना चाहिए।

आरएसएस प्रमुख के साथ मंच पर प्रांत संघचालक डॉ पृथ्वीराज सिंह व सह संघचालक डॉ महेंद्र अग्रवाल उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन विभाग कार्यवाह आत्मा सिंह व डॉ आशीष श्रीवास्तव ने किया। अखिल भारतीय सह व्यवस्था अनिल ओक, गंगा समग्र के राष्ट्रीय संगठन मंत्री रामाशीष, क्षेत्र प्रचारक अनिल, क्षेत्र सेवा प्रमुख नवल, प्रांत प्रचारक सुभाष, सह प्रांत प्रचारक अजय, प्रांत संपर्क प्रमुख प्रो संजीत गुप्त, सह व्यवस्था प्रमुख हरे कृष्ण, विद्या भारती के संगठन मंत्री रामय, विद्यार्थी परिषद के संगठन मंत्री आनंद गौरव, भाग बौद्धिक प्रमुख संकर्षण त्रिपाठी, प्रचार प्रमुख उपेंद्र प्रसाद द्विवेदी व पुनीत पांडेय मौजूद रहे।

 

परंपरागत वेश-भूषा में रहना जरूरी

आरएसएस प्रमुख ने मणिपुर का उदाहरण देते हुए कहा कि हमें अपने परंपरागत वेश-भूषा में रहना चाहिए। मंगल प्रसंग व अवसरों पर तो वेश-भूषा में ही रहना चाहिए। हम क्या हैं? हमारे माता-पिता कहां से आए, इसकी जानकारी रखनी चाहिए। इसकी भी चिंता करनी चाहिए कि अपने पूर्वजों के रीति-रिवाजों का पालन कर रहे हैं या नहीं। हमें परिवार के साथ बैठकर विचार करना चाहिए। बच्चों से खुले दिल से बात करनी चाहिए। यह भी सोचना चाहिए कि समाज के लिए क्या कर सकते हैं?  

होली-चैता गीत का रंग जमा

सांस्कृतिक कार्यक्रम में संस्कार भारती के कलाकारों ने भजन प्रस्तुत किया। होली व चैता गीत का रंग जमा। विद्या भारती के विद्यार्थियों ने राम कथा की प्रस्तुति दी। दूसरी तरफ, प्रचार विभाग ने साहित्य बिक्री का स्टॉल लगाया। इसमें संघ साहित्य व चित्रों को रखा गया था। परिजनों के साथ आए स्वयं सेवकों ने साहित्य व चित्रों की जमकर खरीदारी की।

अब वाराणसी में प्रवास

पारिवारिक स्नेहिल मिलन समारोह के समापन के बाद डॉ मोहन भागवत वाराणसी के लिए रवाना हो गए। गोरखपुर में वह चार दिन रहे। अब 23 से 27 मार्च तक वाराणसी में प्रवास करेंगे। काशी प्रांत के अलग-अलग कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे।

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