कोरोना पर वार: वैक्सीन की वजह से संक्रमितों को खतरा बेहद कम, पांच हजार में बस 50 मरीजों को करना पड़ा भर्ती
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अमरेश सिंह ने बताया कि अब तक, जो तथ्य सामने आए हैं उसके मुताबिक कोरोना वैक्सीन संक्रमण को रोकने में सबसे अच्छा माध्यम है।
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गोरखपुर में कोरोना वैक्सीन की वजह से संक्रमितों को खतरा बेहद कम है। तीसरी लहर में संक्रमितों के ठीक होने के आंकड़े इस बात की गवाही दे रहे हैं। अब तक पांच हजार से अधिक संक्रमित जिले में मिल चुके हैं। इनमें केवल 50 मरीजों को भर्ती करने की जरूरत पड़ी है।
इन 50 में 20 मरीज ऐसे थे, जिन्होंने वैक्सीन की कोई भी डोज नहीं लगवाई थी। जबकि, तीन हजार के आसपास मरीज होम आइसोलेशन में रहकर कोरोना को मात दे चुके हैं। अच्छी बात यह है कि सभी ने कोरोना की वैक्सीन लगवाई थी।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अमरेश सिंह ने बताया कि अब तक, जो तथ्य सामने आए हैं उसके मुताबिक कोरोना वैक्सीन संक्रमण को रोकने में सबसे अच्छा माध्यम है। वैक्सीन की वजह से इस बार वायरस का असर लोगों को गंभीर नहीं बना रहा है। यही वजह है कि लोगों को हल्का सर्दी-जुकाम हो रहा और वह सामान्य दवाओं से ठीक हो जा रहे हैं। जबकि, पहली और दूसरी लहर में यह स्थिति बिल्कुल अलग थी।
पांच की मौत, किसी ने नहीं लगवाई थी वैक्सीन
कोरोना की तीसरी लहर में अब तक पांच संक्रमितों की मौत हो चुकी है। इनमें दो देवरिया के रहने वाले थे, जिनकी उम्र 13 और 15 साल थी। 15 साल के किशोर को कोरोना का टीका नहीं लगा था। इनके अलावा जिले के दो संक्रमितों की मौत भी हो चुकी है। इसमें एक की उम्र 33 वर्ष और दूसरा 70 वर्ष का बुजुर्ग था। दोनों ने कोरोना की कोई वैक्सीन नहीं लगवाई थी। जबकि, एक संक्रमित की मौत 23 जनवरी को हुई थी। उसकी पहचान भी अब तक नहीं हो सकी है।
95 प्रतिशत लोग लगवा चुके हैं कोरोना की पहली डोज
कोरोना वैक्सीन की पहली डोज 95 प्रतिशत लोग लगवा चुके हैं। जबकि, दूसरी डोज के लिए अब तक केवल 60 फीसदी लोग आगे आए हैं।