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Gorakhpur News: निबंधन कार्यालय की गलती, खामियाजा भुगत रहे जमीन खरीदार
Sat, 16 Sep 2023 01:43 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Sat, 16 Sep 2023 01:43 AM IST
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- कर्मचारियों की लापरवाही से आठ ग्राम पंचायतें हो गई हैं नगर पंचायत पीपीगंज में शामिल
सर्किल रेट के अनुसार दो फीसदी अधिक शुल्क वसूले जाने से लोगों में नाराजगी
संवाद न्यूज एजेंसी
कैंपियरगंज/जंगल कौड़िया। कैंपियरगंज तहसील क्षेत्र के ग्रामीण निबंधन कार्यालय की गलती का खामियाजा भुगत रहे हैं। कर्मचारियों की लापरवाही से आठ ग्राम पंचायतें नगर में दर्ज हो गई हैं। यहां के लोगों को जमीन की खरीद-बिक्री में नगरीय दर पर स्टांप शुल्क का भुगतान करना पड़ रहा है। इससे संबंधित गांवों में जमीन की बिक्री प्रभावित हो रही है। लोगों ने इसकी शिकायत उप निबंधक कैंपियरगंज से करते हुए ग्राम पंचायतों को नगर क्षेत्र से बाहर करने की मांग की है।
नगर पंचायतों का सीमा विस्तार होने पर कई नई ग्राम पंचायतें पीपीगंज में शामिल हुई हैं। कैंपियरगंज चौमुखा का गठन नया हुआ है। इसके बाद से नगर निकाय में शामिल गांवों में बुनियादी सुविधाएं नगर पंचायतों की ओर से मुहैया कराई जा रही हैं। इन क्षेत्रों की जमीन की रजिस्ट्री का शुल्क दो फीसदी बढ़ा दिया गया है।
सर्किल रेट के अनुसार महिलाओं के लिए छह फीसदी और पुरुषों के लिए आठ फीसदी स्टांप शुल्क तय हुआ है। जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में इसकी दर महिलाओं के लिए चार फीसदी और पुरुषों के लिए छह फीसदी निर्धारित है।
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कैंपियरगंज उप निबंधन कार्यालय के कर्मचारियों की गड़बड़ी से ग्राम पंचायत मथौली, बरहटा, जरहद, नयनसर, नरही, रायपुर, डाढ़ाडीह, रसूलपुर चकिया को नगर पंचायत की श्रेणी में शामिल कर लिया गया है। यहां पर नगर निकाय की कोई सुविधा नहीं मिलती है।
इसका गजट जारी होने के बाद इन गांवों के लोगों को भी जमीन की बिक्री में नगर के लिए निर्धारित शुल्क देना पड़ रहा है। इस वजह से आठ गांवों में जमीन की खरीद-बिक्री का काम पूरी तरह से ठप हो गया है।
लोगों का कहना है कि यदि इसे दूर नहीं किया गया तो सीएम योगी से मिलकर कार्रवाई की मांग करेंगे। भारतीय किसान यूनियन के सतीश ओझा ने कहा कि यह उप निबंधन कार्यालय की गलती है। इसलिए कर्मचारी इस गड़बड़ी को दूर करने के लिए खुद पहल करें।
निबंधन कार्यालय के कर्मचारियों की गलती का खामियाजा ग्रामीण भुगत रहे हैं। यदि किसी ने अपनी रजिस्ट्री कराई तो बाद में गड़बड़ी में सुधार होने पर जमा कराया गया अधिक स्टांप शुल्क भी वापस नहीं होगा। इससे लोगों को घाटा हो रहा है।
-उमाशंकर उर्फ बबलू सिंह, रसूलपुर चकिया
हमारा गांव नगर पंचायत की सीमा में शामिल नहीं है। यहां नगर निकाय की कोई सुविधा भी नहीं मिलती है। फिर भी रजिस्ट्री के लिए नगर पंचायत के समान शुल्क लिया जा रहा है।
-वीरू उपाध्याय, ग्राम डाढ़ाडीह
कोट
इस मामले में प्रभावित लोग डीएम कार्यालय में लिखित रूप से शिकायत करें। गड़बड़ी को दूर करने के लिए डीएम से अनुरोध किया जाएगा। ताकि लोगों को राहत मिल सके।
-दीनानाथ, उप निबंधक, कैंपियरगंज
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सर्किल रेट के अनुसार दो फीसदी अधिक शुल्क वसूले जाने से लोगों में नाराजगी
संवाद न्यूज एजेंसी
कैंपियरगंज/जंगल कौड़िया। कैंपियरगंज तहसील क्षेत्र के ग्रामीण निबंधन कार्यालय की गलती का खामियाजा भुगत रहे हैं। कर्मचारियों की लापरवाही से आठ ग्राम पंचायतें नगर में दर्ज हो गई हैं। यहां के लोगों को जमीन की खरीद-बिक्री में नगरीय दर पर स्टांप शुल्क का भुगतान करना पड़ रहा है। इससे संबंधित गांवों में जमीन की बिक्री प्रभावित हो रही है। लोगों ने इसकी शिकायत उप निबंधक कैंपियरगंज से करते हुए ग्राम पंचायतों को नगर क्षेत्र से बाहर करने की मांग की है।
नगर पंचायतों का सीमा विस्तार होने पर कई नई ग्राम पंचायतें पीपीगंज में शामिल हुई हैं। कैंपियरगंज चौमुखा का गठन नया हुआ है। इसके बाद से नगर निकाय में शामिल गांवों में बुनियादी सुविधाएं नगर पंचायतों की ओर से मुहैया कराई जा रही हैं। इन क्षेत्रों की जमीन की रजिस्ट्री का शुल्क दो फीसदी बढ़ा दिया गया है।
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सर्किल रेट के अनुसार महिलाओं के लिए छह फीसदी और पुरुषों के लिए आठ फीसदी स्टांप शुल्क तय हुआ है। जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में इसकी दर महिलाओं के लिए चार फीसदी और पुरुषों के लिए छह फीसदी निर्धारित है।
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कैंपियरगंज उप निबंधन कार्यालय के कर्मचारियों की गड़बड़ी से ग्राम पंचायत मथौली, बरहटा, जरहद, नयनसर, नरही, रायपुर, डाढ़ाडीह, रसूलपुर चकिया को नगर पंचायत की श्रेणी में शामिल कर लिया गया है। यहां पर नगर निकाय की कोई सुविधा नहीं मिलती है।
इसका गजट जारी होने के बाद इन गांवों के लोगों को भी जमीन की बिक्री में नगर के लिए निर्धारित शुल्क देना पड़ रहा है। इस वजह से आठ गांवों में जमीन की खरीद-बिक्री का काम पूरी तरह से ठप हो गया है।
लोगों का कहना है कि यदि इसे दूर नहीं किया गया तो सीएम योगी से मिलकर कार्रवाई की मांग करेंगे। भारतीय किसान यूनियन के सतीश ओझा ने कहा कि यह उप निबंधन कार्यालय की गलती है। इसलिए कर्मचारी इस गड़बड़ी को दूर करने के लिए खुद पहल करें।
निबंधन कार्यालय के कर्मचारियों की गलती का खामियाजा ग्रामीण भुगत रहे हैं। यदि किसी ने अपनी रजिस्ट्री कराई तो बाद में गड़बड़ी में सुधार होने पर जमा कराया गया अधिक स्टांप शुल्क भी वापस नहीं होगा। इससे लोगों को घाटा हो रहा है।
-उमाशंकर उर्फ बबलू सिंह, रसूलपुर चकिया
हमारा गांव नगर पंचायत की सीमा में शामिल नहीं है। यहां नगर निकाय की कोई सुविधा भी नहीं मिलती है। फिर भी रजिस्ट्री के लिए नगर पंचायत के समान शुल्क लिया जा रहा है।
-वीरू उपाध्याय, ग्राम डाढ़ाडीह
कोट
इस मामले में प्रभावित लोग डीएम कार्यालय में लिखित रूप से शिकायत करें। गड़बड़ी को दूर करने के लिए डीएम से अनुरोध किया जाएगा। ताकि लोगों को राहत मिल सके।
-दीनानाथ, उप निबंधक, कैंपियरगंज