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डीडीयू : ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ के चयन की प्रक्रिया जल्द

Sat, 21 Feb 2026 02:41 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 21 Feb 2026 02:41 AM IST
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Recruitment will be done in subjects like Law, Engineering, Pharmacy, Agriculture, Commerce and Journalism.
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ के चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यूजीसी के दिशा-निर्देशों और एनईपी-2020 के उद्देश्यों के क्रम में चयन किया जाएगा।
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यह पहल विशेष रूप से प्रबंधन, अभियांत्रिकी, कृषि, फार्मेसी, पत्रकारिता, वाणिज्य एवं विधि जैसे विषयों के लिए की जा रही है। इसका उद्देश्य उद्योग, प्रशासन, उद्यमिता एवं पेशेवर क्षेत्रों के विशिष्ट अनुभव को सीधे कक्षाओं तक ले आना है। विशिष्ट क्षेत्रों के विशेषज्ञों से छात्र-छात्राएं संबंधित क्षेत्रों की बारीकियां जान पाएंगे। डीडीयू प्रशासन शीघ्र ही विस्तृत अधिसूचना जारी कर नामांकन आमंत्रित करेगा।
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‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ से मिलेंगे ये लाभ
‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ का उद्देश्य उद्योग-शिक्षा समन्वय को सुदृढ़ करना है। वे पाठ्यक्रम विकास में सहयोग देंगे और विद्यार्थियों को कौशल-आधारित शिक्षा प्रदान करेंगे। इसके लिए ऐसे विशेषज्ञ पात्र होंगे, जिनके पास अपने क्षेत्र में कम से कम 15 वर्ष का अनुभव (विशेषकर वरिष्ठ स्तर पर) हो। औपचारिक शैक्षणिक योग्यता अनिवार्य नहीं है, यदि संबंधित व्यक्ति का पेशेवर अनुभव उत्कृष्ट हो। ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ की संख्या स्वीकृत पदों के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी। उनकी नियुक्ति एक वर्ष के लिए होगी, जिसे तीन या चार वर्ष तक के लिए बढ़ाया जा सकता है। उनका कार्य पाठ्यक्रम निर्माण, नवाचार एवं उद्यमिता को बढ़ावा देना, उद्योग-अकादमिक सहयोग विकसित करना एवं संयुक्त शोध व परामर्श गतिविधियां आदि संचालित करना होगा।
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प्रथम चरण में मानद आधार पर होंगी नियुक्तियां
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, प्रथम चरण में ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ की नियुक्ति मानद आधार पर की जाएगी। इच्छुक एवं पात्र विशेषज्ञों से नामांकन आमंत्रित किए जाएंगे। उनके नामों पर एक चयन समिति विचार करेगी। समिति की रिपोर्ट के आधार पर वैधानिक निकाय अंतिम निर्णय लेगा।


बोलीं कुलपति
इस संबंध में कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ की पहल से विभिन्न क्षेत्रों के अनुभवी विशेषज्ञ हमारे विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान, नवाचार दृष्टि और पेशेवर मार्गदर्शन प्रदान करेंगे। इससे उद्योग-अकादमिक साझेदारी को नई मजबूती मिलेगी और हमारे छात्र वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए अधिक सक्षम बनेंगे।
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