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Gorakhpur News: किसानों से नो ड्यूज के लिए वसूली भारी पड़ी माल बाबू को, चार सौ रुपये लेता था रिश्वत

Wed, 18 Oct 2023 11:04 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर Updated Wed, 18 Oct 2023 11:04 AM IST
सार

नरेंद्र सहित उनके परिवार के अन्य भू स्वामियों के लिए नो ड्यूज प्रमाणपत्र की आवश्यकता थी। इसका आवेदन लोगों ने किया तो माल बाबू नितिन श्रीवास्तव ने पत्रावली देने के लिए रुपये मांगे थे। नरेंद्र का कहना है कि नो ड्यूज देने के लिए प्रति किसान चार सौ रुपये की दर तहसील में तय की गई है। इसलिए उनसे पांच हजार रुपये देने को कहा गया था।
 

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Recovery of no dues from Balapar farmers proved costly for Mal Babu
तहसील में आए लोग। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

गोरखपुर तहसील के माल बाबू की गिरफ्तारी के दूसरे दिन परिसर में सिर्फ कार्रवाई की चर्चा रही। मंगलवार को अधिवक्ता, फरियादी सहित अन्य लोग माल बाबू की कारगुजारी को लेकर बात करते रहे। पूरी तहसील में चर्चा है कि नो-ड्यूज के लिए माल बाबू ने प्रति आवेदन चार सौ रुपये की दर निर्धारित की थी। बालापार के किसानों से नो ड्यूज के लिए घूस मांगना माल बाबू को भारी पड़ गया।

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यह भी चर्चा है कि पीड़ित और उनके परिवार के 13 लोगों का नो ड्यूज बनाने के बदले में माल बाबू ने पांच हजार की रकम मांगी थी। भूमि अधिग्रहण के बदले किसानों को मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया में बिना चढ़ावा दिए कोई काम नहीं हो रहा है। तंग आकर पीड़ित ने शिकायत दर्ज कराई थी।
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चिलुआताल क्षेत्र के बालापार निवासी नरेंद्र कुमार मिश्रा की शिकायत पर एंटी करप्शन की टीम ने सोमवार दोपहर माल बाबू को पांच हजार रुपये घूस लेते हुए रंगे हाथ दबोचकर कैंट थाना में केस दर्ज कराया था। जंगल कौड़िया-जगदीशपुर फोरलेन रिंग रोड में बालापार सहित 26 गांवों के किसानों की भूमि अधिग्रहित की गई है। इससे 1700 किसान प्रभावित हैं। मुआवजा के लिए किसान दस्तावेज जमा कर रहे हैं।
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नरेंद्र सहित उनके परिवार के अन्य भू स्वामियों के लिए नो ड्यूज प्रमाणपत्र की आवश्यकता थी। इसका आवेदन लोगों ने किया तो माल बाबू नितिन श्रीवास्तव ने पत्रावली देने के लिए रुपये मांगे थे। नरेंद्र का कहना है कि नो ड्यूज देने के लिए प्रति किसान चार सौ रुपये की दर तहसील में तय की गई है। इसलिए उनसे पांच हजार रुपये देने को कहा गया था।

उधर, एचएसओ कैंट रणधीर मिश्रा ने बताया कि आरोपी के खिलाफ केस दर्ज हुआ था। मंगलवार को आरोपी को कोर्ट में पेश कर जेल भिजवाया गया।

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बिना चढ़ावा नहीं होता कोई काम
भूमि अधिग्रहण में किसानों का मुआवजा देने की प्रक्रिया कुछ कर्मचारियों के लिए कमाई का जरिया बन गई है। किसानों से वसूली किए बिना उनका कोई काम नहीं हो रहा है। नरेंद्र की मानें तो हर किसान से हर स्तर पर कुछ न कुछ रकम ली जा रही है। तहसील में नामांतरण, दाखिल खारिज, प्रमाण पत्र बनाने, खतौनी लेने सहित अन्य कामों में जमकर वसूली की जाती है। इसमें निजी कर्मचारियों और बिचौलियों की मदद ली जाती है।

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