आंगनबाड़ी केंद्रों की हकीकत: कुपोषण मिटाने वाली ‘संजीवनी बूटी’ को है संजीवनी की जरूरत
सितंबर में आंगनबाड़ी केंद्रों पर लगाए गए, इससे पहले ग्राम पंचायतों में निशुल्क बंटवाए गए सहजन के अधिकांश पौधे हो चुके हैं नष्ट, औषधीय गुणों से भरपूर सहजन को कुपोषण मिटाने का अचूक हथियार बताते हैं।
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दही से नौ गुना अधिक प्रोटीन और केले से 15 गुना अधिक कैल्शियम वाले सहजन को जब सरकारी तंत्र ने लगाया तो इनकी जड़ें मजबूत नहीं हो पाईं। आंगनबाड़ी केंद्र हों या कोई अन्य सरकारी संस्थान, अधिकांश जगहों पर तो इनका वजूद भी सलामत नहीं है। महिला एवं बाल विकास विभाग ने इसे कुपोषण मिटाने का सबसे अचूक व प्राकृतिक उपाय बताया था। पत्ती से लेकर जड़ तक गुणों से भरे इस पौधे को लगाना बेहद आसान है, रखरखाव की भी खास जरूरत नहीं।
जिले में छह साल से कम उम्र के 368053 बच्चे हैं। इनमें से 54943 कुपोषण का शिकार हैं। इनमें भी 7151 बच्चे अति कुपोषित श्रेणी के हैं। इन बच्चों को स्वस्थ बनाने के लिए प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन, आयरन आदि पोषक तत्वों की जरूरत होती है। लेकिन, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों के लिए पौष्टिक आहार व दूध आदि का नियमित इंतजाम बेहद कठिन है।
ऐसे लोगों के लिए प्रकृति प्रदत सहजन का पौधा ‘संजीवनी बूटी’ के समान है। इस पौधे की पत्तियों को चूर्ण बनाकर खाया जा सकता है तो फली की सब्जी बनती है। पूर्वांचल की जलवायु भी इसके लिए बहुत अनुकूल है। इसी को ध्यान में रखते हुए जिले में जगह-जगह सहजन के पौधे लगाए गए थे, लेकिन अधिकांश पौधे या तो सूख गए हैं अथवा किसी ने नष्ट कर दिए हैं।
पौधे लगाकर भूल गया विभाग
सहजन के पौधे सभी आंगनबाड़ी केंद्रों के अलावा कुपोषित बच्चों के घर व अन्य जगहों पर भी लगाए गए थे। लेकिन इन पौधों का वजूद कम ही जगह दिखाई दे रहा है। शहर से सटे कोलिया उत्तरी, बहरामपुर, चकरा पूर्वी, शेरगढ़ आदि गांवों में सरकारी केंद्रों पर ये पौधे नहीं मिले। शहरी क्षेत्र में बिछिया, पादरी बाजार, रामदत्तपुर आदि कई वार्डों में आंगनबाड़ी केंद्र पर भी ये पौधे नहीं मिले। ग्रामीण क्षेत्र के आंगनबाड़ी केंद्र बेवरी में भी सहजन का पौधा सूख चुका है।
जहां जगह मिली वहां लगवाया
गोरखपुर शहर के महिला एवं बाल विकास विभाग के सीडीपीओ प्रदीप श्रीवास्तव का कहना है कि सितंबर में आंगनबाड़ी केंद्रों को सहजन का पौधा आवंटित किया गया था। जिन केंद्रों के सामने पौधा लगाने की जगह नहीं थी, वहां किसी लाभार्थी के घर या सरकारी भवन के खाली परिसर में पौधा लगाया गया। पौधरोपण की फोटोग्राफी भी कराई गई है। लोगों को भोजन में सहजन का प्रयोग बढ़ाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
गुणकारी सहजन के प्रयोग को लेकर जागरूक नहीं हैं लोग
जिला चिकित्सालय के फिजिशियन डॉ. राजेश कुमार का कहना है कि सहजन में विटामिन ए, बी, सी, कैल्शियम, आयरन, पोटेशियम और प्रोटीन भरपूर मात्रा पाई जाती है। यह बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक के लिए लाभप्रद है। कुपोषित बच्चों के लिए यह महत्वपूर्ण औषधि है। लेकिन, लोग इसके प्रयोग को लेकर बहुत जागरूक नहीं हैं। इसके प्रयोग को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
300 से अधिक आयुर्वेदिक दवाइयों में प्रयोग
आंगनबाड़ी विभाग की तरफ से जारी एक वीडियो में बताया गया है कि सहजन के पौधे में जड़ से लेकर पत्तियों तक में औषधीय गुण हैं। 300 से अधिक आयुर्वेदिक दवाइयों में इसका प्रयोग होता है। यह पौधा दुनिया के तमाम देशों में पाया जाता है और हर जगह पर लोग इसका प्रयोग स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए करते हैं।
विभागीय अभिलेख के अनुसार 100 ग्राम सहजन में
संतरा से सात गुना अधिक विटामिन सी।
गाजर से चार गुना अधिक विटामिन ए।
केले से 15 गुना अधिक पोटैशियम।
पालक से 25 गुना अधिक आयरन।
वृहद अभियान की जरूरत
डीपीओ हेमंत कुमार सिंह ने कहा कि सहजन औषधीय गुणों से भरपूर है। हालांकि, इसके प्रयोग को लेकर लोग जागरूक नहीं हैं। आंगनबाड़ी केंद्र के कार्यकर्ताओं के माध्यम से क्षेत्र में व्यापक जागरूकता कराई गई। सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर पौधरोपण कराया गया है। इसके अलावा लाभार्थियों को नि:शुल्क पौधा भी दिया गया है। जल्दी ही उद्यान विभाग के सहयोग से कुछ और पौधे वितरित कराने का लक्ष्य है। इसके खास गुणों को देखते हुए इसे पौधरोपण अभियान में शामिल कर लोगों को जागरूक करना होगा।