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खुशखबर: आरबीआई सिखाएगा सुरक्षित डिजिटल लेनदेन का तरीका, बैंक के विशेषज्ञ बताएंगे ये खास बात
Mon, 15 Nov 2021 10:35 AM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Mon, 15 Nov 2021 10:35 AM IST
सार
कार्यशाला में मालवीयंस को इलेक्ट्रानिक बैंकिंग उत्पादों और उनके लाभ की जानकारी दी जाएगी। साथ ही जालसाजों द्वारा की जा रही तरह-तरह की धोखाधड़ी से बचने के उपाय भी बताए जाएंगे।
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RBI
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
सुरक्षित डिजिटल लेनदेन सिखाने के लिए मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) में एक कार्यशाला का आयोजन जल्द रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया करेगा। इसके लिए बैंक की ओर से विश्वविद्यालय प्रशासन को प्रस्ताव भेजा गया है। विश्वविद्यालय ने अपनी सहमति भी दे दी है। जल्द ही कार्यशाला की तारीख तय हो जाएगी।
कार्यशाला में मालवीयंस को इलेक्ट्रानिक बैंकिंग उत्पादों और उनके लाभ की जानकारी दी जाएगी। साथ ही जालसाजों द्वारा की जा रही तरह-तरह की धोखाधड़ी से बचने के उपाय भी बताए जाएंगे। बैंक से जुड़े मामलों की शिकायत निवारण का तरीका भी बैंक के विशेषज्ञ बताएंगे। बैंक ने कार्यशाला में प्रतिभागियों की न्यूनतम भागीदारी भी सुनिश्चित की है।
हर कार्यशाला में 100 से अधिक प्रतिभागी मौजूद होने चाहिए। एमएमएमयूटी के मैनेजमेंट विभाग के सहायक आचार्य डॉ. अभिजीत मिश्र ने बताया कि डिजिटल लेनदेन युवा ही ज्यादा करते हैं, इसलिए पहले उन्हें जागरूक करने पर बैंक का विशेष फोकस है। दूसरा पहलू यह भी है कि युवा अगर जागरूक होंगे तो उनके माध्यम से समाज के हर व्यक्ति को इसे लेकर जागरूक करना आसान हो जाएगा।
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एमएमएमयूटी के कुलपति प्रो. जेपी पांडेय ने बताया कि आए दिन डिजिटल लेनदेन में जालसाजी के मामले सामने आ रहे हैं। तकनीकी रूप से सक्षम व्यक्ति भी साइबर जालसाजों के झांसे में आ रहे हैं। ऐसे में रिजर्व बैंक के डिजिटल लेनेदेन के जागरुकता कार्यक्रम का प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय स्वागत करता है। कार्यशाला आयोजन में बैंक की हरसंभव मदद की जा रही है।
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कार्यशाला में मालवीयंस को इलेक्ट्रानिक बैंकिंग उत्पादों और उनके लाभ की जानकारी दी जाएगी। साथ ही जालसाजों द्वारा की जा रही तरह-तरह की धोखाधड़ी से बचने के उपाय भी बताए जाएंगे। बैंक से जुड़े मामलों की शिकायत निवारण का तरीका भी बैंक के विशेषज्ञ बताएंगे। बैंक ने कार्यशाला में प्रतिभागियों की न्यूनतम भागीदारी भी सुनिश्चित की है।
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हर कार्यशाला में 100 से अधिक प्रतिभागी मौजूद होने चाहिए। एमएमएमयूटी के मैनेजमेंट विभाग के सहायक आचार्य डॉ. अभिजीत मिश्र ने बताया कि डिजिटल लेनदेन युवा ही ज्यादा करते हैं, इसलिए पहले उन्हें जागरूक करने पर बैंक का विशेष फोकस है। दूसरा पहलू यह भी है कि युवा अगर जागरूक होंगे तो उनके माध्यम से समाज के हर व्यक्ति को इसे लेकर जागरूक करना आसान हो जाएगा।
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एमएमएमयूटी के कुलपति प्रो. जेपी पांडेय ने बताया कि आए दिन डिजिटल लेनदेन में जालसाजी के मामले सामने आ रहे हैं। तकनीकी रूप से सक्षम व्यक्ति भी साइबर जालसाजों के झांसे में आ रहे हैं। ऐसे में रिजर्व बैंक के डिजिटल लेनेदेन के जागरुकता कार्यक्रम का प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय स्वागत करता है। कार्यशाला आयोजन में बैंक की हरसंभव मदद की जा रही है।