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माह-ए-रमजान : दीदार ए चांद के साथ रमजान पर्व शुरू, घरों में करेंगे इबादत
Wed, 14 Apr 2021 10:15 AM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Wed, 14 Apr 2021 10:15 AM IST
सार
- तरावीह की नमाज के साथ इबादतों का दौर शुरु हुआ। इस दौरान कोविड गाइडलाइन का पालन करते हुए मस्जिदों में एशा की नमाज अदा हुई।
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रमजान 2021
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
चांद का दीदार मंगलवार की शाम होने के साथ ही पाक माह रमजान शुरू हो गया है। बुधवार यानी आज पहला रोजा रखा गया है। पिछले एक सप्ताह से घरों और मस्जिदों में माह-ए-रमजान के आने का इंतजार मुस्लिम समाज के लोग कर रहे थे। आखिरकार मंगलवार की शाम चांद का दीदार हो गया।
उलेमा-ए-अहले सुन्नत ने चांद का ऐलान किया। लोगों ने एक-दूसरे से मिलकर और सोशल मीडिया पर बधाई देनी शुरू कर दी। पुरुषों ने एशा की नमाज के बाद तरावीह की नमाज अदा की। कोविड-19 का पालन करते हुए मस्जिदों में सीमित संख्या में लोगों ने एशा व तरावीह की नमाज अदा की। वहीं महिलाओं ने घरों में एशा व तरावीह की नमाज अदा कर दुआ मांगी।
पहला रोजा सबसे छोटा, अंतिम रोजा सबसे बड़ा
इस बार पहला रोजा करीब 14 घंटा 8 मिनट व अंतिम रोजा 14 घंटा 52 मिनट का होगा। इस बार भी शिद्दत की गर्मी में मुसलमान रमजान का रोजा रख अल्लाह को राजी करेंगे। पहले रोजे में सुबह 4:13 बजे सहरी का आखिरी वक्त और शाम 6:21 बजे इफ्तार किया जाएगा। आखिरी रोजे में सुबह 3:44 बजे सहरी का आखिरी वक्त और शाम 6:36 बजे इफ्तार होगा।
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बाजार में बढ़ी चहल-पहल
रमजान की आमद के साथ बाजारों में भी चहल-पहल बढ़ गई है। लोगों ने शाम तक सहरी व इफ्तार के लिए सामान खरीदे। बाजार में रोजा इफ्तार व सहरी के सामान की बिक्री तेज हो गई है। विभिन्न तरह के पैक में खजूर बाजार में उपलब्ध हैं। ईरानी खजूर के साथ ही मुनक्का खजूर भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
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उलेमा-ए-अहले सुन्नत ने चांद का ऐलान किया। लोगों ने एक-दूसरे से मिलकर और सोशल मीडिया पर बधाई देनी शुरू कर दी। पुरुषों ने एशा की नमाज के बाद तरावीह की नमाज अदा की। कोविड-19 का पालन करते हुए मस्जिदों में सीमित संख्या में लोगों ने एशा व तरावीह की नमाज अदा की। वहीं महिलाओं ने घरों में एशा व तरावीह की नमाज अदा कर दुआ मांगी।
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पहला रोजा सबसे छोटा, अंतिम रोजा सबसे बड़ा
इस बार पहला रोजा करीब 14 घंटा 8 मिनट व अंतिम रोजा 14 घंटा 52 मिनट का होगा। इस बार भी शिद्दत की गर्मी में मुसलमान रमजान का रोजा रख अल्लाह को राजी करेंगे। पहले रोजे में सुबह 4:13 बजे सहरी का आखिरी वक्त और शाम 6:21 बजे इफ्तार किया जाएगा। आखिरी रोजे में सुबह 3:44 बजे सहरी का आखिरी वक्त और शाम 6:36 बजे इफ्तार होगा।
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बाजार में बढ़ी चहल-पहल
रमजान की आमद के साथ बाजारों में भी चहल-पहल बढ़ गई है। लोगों ने शाम तक सहरी व इफ्तार के लिए सामान खरीदे। बाजार में रोजा इफ्तार व सहरी के सामान की बिक्री तेज हो गई है। विभिन्न तरह के पैक में खजूर बाजार में उपलब्ध हैं। ईरानी खजूर के साथ ही मुनक्का खजूर भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
बोले उलेमा-ए-किराम
प्रशासन का करें सहयोग
मुकद्दस रमजान माह की शुरुआत चांद के दीदार के साथ होती है। इस माह में दीन-ए-इस्लाम को मानने वाले लोग पूरे महीने रोजा रखते हैं। जो मुसलमान रोजा नहीं रखता है वह अल्लाह की रहमत से महरूम रहता है। कोविड-19 संक्रमण को देखते हुए प्रशासन का सहयोग किया जाए।
मौलाना इसहाक, शिक्षक मकतब इस्लामी तालीमात
कोरोना में सतर्कता बरतें
रोजा न रखना बहुत बड़ा गुनाह है। रमजान में मुसलमान अल्लाह की हम्द व सना बयान करें। पांचों वक्त की फर्ज नमाजों के साथ रमजान में पढ़ी जाने वाली बीस रकात तरावीह की नमाज पाबंदी के साथ अदा करें। तहज्जुद की नमाज अदा करें। कोविड-19 के मद्देनजर सतर्कता बरतें।
हाफिज आमिर हुसैन निजामी, नायक इमाम गाजी मस्जिद, गाजी रौजा
मुकद्दस रमजान माह की शुरुआत चांद के दीदार के साथ होती है। इस माह में दीन-ए-इस्लाम को मानने वाले लोग पूरे महीने रोजा रखते हैं। जो मुसलमान रोजा नहीं रखता है वह अल्लाह की रहमत से महरूम रहता है। कोविड-19 संक्रमण को देखते हुए प्रशासन का सहयोग किया जाए।
मौलाना इसहाक, शिक्षक मकतब इस्लामी तालीमात
कोरोना में सतर्कता बरतें
रोजा न रखना बहुत बड़ा गुनाह है। रमजान में मुसलमान अल्लाह की हम्द व सना बयान करें। पांचों वक्त की फर्ज नमाजों के साथ रमजान में पढ़ी जाने वाली बीस रकात तरावीह की नमाज पाबंदी के साथ अदा करें। तहज्जुद की नमाज अदा करें। कोविड-19 के मद्देनजर सतर्कता बरतें।
हाफिज आमिर हुसैन निजामी, नायक इमाम गाजी मस्जिद, गाजी रौजा
कोविड गाइडलाइन का पालन करें
घरों में इबादत के लिए कोई खास जगह तय कर लें। कुरआन-ए-पाक की तिलावत करें। दरूदो सलाम का नजराना पेश करें। जकात, सदका व फित्रा हकदारों तक पहुंचा दें। मदरसों को चंदा दें। जरूरतमंदों की मदद करें। कोविड गाइडलाइन का पालन कर मुसलमान प्रशासन का सहयोग करें।
कारी मो. अनस रजवी, मकतब इस्लामियात के शिक्षक
नाइट कर्फ्यू में बाहर न घूमें
अल्लाह इस महीने में नेक काम करने वाले मुसलमानों के सारे गुनाह माफ कर देता है। एक नेकी का सवाब कई गुना बढ़ा कर मिलता है। घर से निकलते वक्त मास्क जरूर लगाएं। घर से वुजू करके ही निकलें। नाइट कर्फ्यू के दौरान बाहर न घूमें। प्रशासन का सहयोग करें।
हाफिज सद्दाम हुसैन इमाम, मस्जिद जामेनूर बहरामपुर
जरूरतमंदों की मदद करें
मुकद्दस रमजान को तीन हिस्सों में बांटा गया है। पहला हिस्सा रहमत, दूसरा मगफिरत (बख्शिश) और आखिरी हिस्सा जहन्नम से आजादी का है। तरावीह की बीस रकात नमाज पूरे रमजान तक पढ़ें। सामूहिक रोजा इफ्तार व दावतों से परहेज करें। जरूरतमंदों की दिल खोलकर मदद करें।
कारी मो. शाबान, इमाम ईदगाह रोड मस्जिद बेनीगंज
कारी मो. अनस रजवी, मकतब इस्लामियात के शिक्षक
नाइट कर्फ्यू में बाहर न घूमें
अल्लाह इस महीने में नेक काम करने वाले मुसलमानों के सारे गुनाह माफ कर देता है। एक नेकी का सवाब कई गुना बढ़ा कर मिलता है। घर से निकलते वक्त मास्क जरूर लगाएं। घर से वुजू करके ही निकलें। नाइट कर्फ्यू के दौरान बाहर न घूमें। प्रशासन का सहयोग करें।
हाफिज सद्दाम हुसैन इमाम, मस्जिद जामेनूर बहरामपुर
जरूरतमंदों की मदद करें
मुकद्दस रमजान को तीन हिस्सों में बांटा गया है। पहला हिस्सा रहमत, दूसरा मगफिरत (बख्शिश) और आखिरी हिस्सा जहन्नम से आजादी का है। तरावीह की बीस रकात नमाज पूरे रमजान तक पढ़ें। सामूहिक रोजा इफ्तार व दावतों से परहेज करें। जरूरतमंदों की दिल खोलकर मदद करें।
कारी मो. शाबान, इमाम ईदगाह रोड मस्जिद बेनीगंज