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जानिए किस वजह से रमा एकादशी का है खास महत्व, इस व्रत को करने से मिलता है यह लाभ
Sun, 08 Nov 2020 05:00 PM IST
vivek shukla
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sun, 08 Nov 2020 05:00 PM IST
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एकादशी 2020।
- फोटो : अमर उजाला
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रमा एकादशी व्रत बुधवार को रखा जाएगा। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने के कारण इस एकादशी का विशेष महत्व है। इस व्रत को करने से मनुष्य के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। पद्म पुराण के अनुसार रमा एकादशी का व्रत करने से मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस व्रत को करने से विष्णु जी के साथ मां लक्ष्मी की कृपा भी मिलती है, जिससे जीवन में धन-धान्य की कमी नहीं रहती है।
रमा एकादशी का महत्व
पंडित अरविंद गिरि के अनुसार रमा एकादशी का नाम भगवान विष्णु की पत्नी लक्ष्मी जी के नाम पर है। माता लक्ष्मी का एक नाम रमा भी है। इस पावन एकादशी के बारे में मान्यता है कि इस दिन उपवास रखने वालों श्रद्धालुओं पर भगवान विष्णु के साथ ही माता लक्ष्मी की कृपा बरसती है और व्रती को सभी सुखों की प्राप्ति होती है। अंत में वह सभी पापों से मुक्त होकर मोक्ष को प्राप्त करता है।
एकादशी व्रत और पूजा विधि
ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार एकादशी के दिन ब्रह्ममुहूर्त में स्नानादि करने के पश्चात व्रत का संकल्प लें और भगवान विष्णु की पूजा करें। भगवान विष्णु के समक्ष दीप जलाएं धूप दिखाएं, फल-फूल व मिष्ठान के साथ तुलसी के पत्ते अर्पित करें। दिनभर फलाहार ग्रहण कर रात्रि जागरण करके भजन कीर्तन करने करें। एकादशी का व्रत द्वादशी तक चलता है। द्वादशी तिथि को सुबह उठकर विष्णु जी का पूजन करें। उसके बाद ब्राह्मण को भोजन कराएं और दक्षिणा दें। फिर स्वयं भी व्रत का पारण करें।
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रमा एकादशी का महत्व
पंडित अरविंद गिरि के अनुसार रमा एकादशी का नाम भगवान विष्णु की पत्नी लक्ष्मी जी के नाम पर है। माता लक्ष्मी का एक नाम रमा भी है। इस पावन एकादशी के बारे में मान्यता है कि इस दिन उपवास रखने वालों श्रद्धालुओं पर भगवान विष्णु के साथ ही माता लक्ष्मी की कृपा बरसती है और व्रती को सभी सुखों की प्राप्ति होती है। अंत में वह सभी पापों से मुक्त होकर मोक्ष को प्राप्त करता है।
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एकादशी व्रत और पूजा विधि
ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार एकादशी के दिन ब्रह्ममुहूर्त में स्नानादि करने के पश्चात व्रत का संकल्प लें और भगवान विष्णु की पूजा करें। भगवान विष्णु के समक्ष दीप जलाएं धूप दिखाएं, फल-फूल व मिष्ठान के साथ तुलसी के पत्ते अर्पित करें। दिनभर फलाहार ग्रहण कर रात्रि जागरण करके भजन कीर्तन करने करें। एकादशी का व्रत द्वादशी तक चलता है। द्वादशी तिथि को सुबह उठकर विष्णु जी का पूजन करें। उसके बाद ब्राह्मण को भोजन कराएं और दक्षिणा दें। फिर स्वयं भी व्रत का पारण करें।
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