फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   Rajghat If statues made of oil paint are not buried in the pit, pollution will spread.

Gorakhpur News: राजघाट में ऑयल पेंट से बनी प्रतिमाओं को गड्ढे में न दबाया तो फैलेगा प्रदूषण, करनी होंगी नष्ट

Wed, 29 Nov 2023 10:35 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Wed, 29 Nov 2023 10:35 AM IST
सार

प्रतिमा विसर्जन के बाद तालाब के पानी में सड़ने वाले पदार्थों को बाहर निकालकर उन्हें गड्ढा खोदकर दबाना था। लेकिन ऐसा करने की बजाय तालाब के किनारे जमा अवशेषों पर ब्लीचिंग पाउडर आदि का छिड़काव कर छोड़ दिया गया।

विज्ञापन
Rajghat If statues made of oil paint are not buried in the pit, pollution will spread.
कृत्रिम तालाब में सड़ रहे अवशेष। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

गोरखपुर जिले में राप्ती नदी के किनारे बनाए गए कृत्रिम तालाब में सड़ रहे अवशेषों का अगर जल्दी निस्तारण नहीं किया गया तो यह वायु के अलावा जल प्रदूषण का भी कारण बनेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि तालाब में पड़ीं पीओपी और पेंट से बनी प्रतिमाओं को नष्ट करना आसान नहीं है। इसके लिए इन्हें गड्ढे में दबाना होगा। ऐसा इसलिए कि ऑयल पेंट पानी में घुलनशील नहीं होता है।

विज्ञापन


इन अवशेषों से उत्सर्जित गैसों का असर ओजोन परत पर भी होता है, इसीलिए इनका सुरक्षित तरीके से निस्तारण बेहद जरूरी है। इस मामले में अभी तक न तो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से कोई पहल की गई है और न ही नगर निगम या प्रशासन की ओर से ही। मजबूरी में लोग नाक पर रुमाल रखकर उधर से गुजरने को मजबूर हैं।
विज्ञापन


दशहरा और लक्ष्मी पूजा के लिए बनी देवी प्रतिमाओं का विसर्जन राप्ती नदी में न हो, इसके लिए एकला बांध के किनारे तीन कृत्रिम तालाब बनाए गए थे। इन तालाबों में पहले दुर्गा प्रतिमाएं और फिर लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमाएं विसर्जित की गईं।
विज्ञापन
विज्ञापन


इसे भी पढ़ें: एक्यूआई @ 205: सहालग की धूम से फिर जहरीली हुई गोरखपुर की हवा...घुटने रहा है दम

प्रतिमा विसर्जन के बाद तालाब के पानी में सड़ने वाले पदार्थों को बाहर निकालकर उन्हें गड्ढा खोदकर दबाना था। लेकिन ऐसा करने की बजाय तालाब के किनारे जमा अवशेषों पर ब्लीचिंग पाउडर आदि का छिड़काव कर छोड़ दिया गया। विसर्जित की गई प्रतिमाओं के साथ कपड़ा, फूल, चावल, वस्त्र आदि भी तालाब में डाले गए थे, जो अब सड़ने लगे हैं।

इसकी दुर्गंध के चलते अगल-बगल से गुजरने वालों को दिक्कत हो रही है। एकला बांध पर पहले से ही शहर का कूड़ा गिराया जाता है, अब बगल में पानी भी सड़ने लगा है। इसकी वजह से अगल-बगल वालों की मुश्किलें बढ़ी हुई हैं।

इसे भी पढ़ें: गोरखपुर विश्वविद्यालय: अभद्र टिप्पणी पर छात्रों के दो गुटों में चाकू चले, तीन घायल

पांच फुट से अधिक गहराई में दबाएं अवशेषों को
गोरखपुर विश्वविद्यालय के रसायन विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. उमेश नाथ त्रिपाठी बताते हैं कि प्रतिमाएं बनाने के लिए प्लास्टर ऑफ पेरिस का प्रयोग हो रहा है। इसे मजबूती देने के लिए उसमें फाइबर मिलाया जाता है। इसे ऑयल पेंट से रंगा जाता है। वाष्पशील पेट्रोलियम पदार्थ का वाष्पन पर्यावरण के लिए हानिकारक होता है।

पानी में पड़े इन अवशेषों को नष्ट करने के लिए जब इन पर ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव होता है तो रासायनिक क्रियाओं के फलस्वरूप क्लोरिन समेत कई हानिकारक गैस उत्सर्जित होती हैं। यह स्थिति जलीय जीवों के लिए भी घातक होती है।

इसे भी पढ़ें: गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर लगेंगे 317 कैमरे, अपराधियों पर रहेगी नजर

निस्तारण के लिए होना चाहिए प्रबंध
विशेषज्ञाें का कहना है कि देवी प्रतिमाओं के निर्माण व निस्तारण में वैज्ञानिक पद्धति का विशेष ख्याल रखना होगा, क्योंकि पहले इनके निर्माण में जहां मिट्टी में नष्ट होने वाले सामान और प्राकृतिक रंगों का प्रयोग होता था, वहीं अब कृत्रिम पेंट व अन्य ऐसे सामान प्रयुक्त होते हैं, जो आसानी से नष्ट नहीं होते। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी अनिल कुमार शर्मा का कहना है कि प्रतिमाओं के विसर्जन से होने वाली हानियों को देखते हुए ही इन्हें कृत्रिम तालाब में निस्तारित कराया जाता है। इसके अलावा निस्तारण उपायों पर भी निगरानी रखी जाती है।

इसे भी पढ़ें: नासिक में हुई बारिश तो आढ़तियों ने बढ़ा दिए प्याज के भाव

ये करना होगा उपाय
  • प्रतिमाओं की संख्या सीमित करनी होगी तथा इनके निर्माण में प्राकृतिक सामान व रंगों का प्रयोग करना चाहिए।
  • प्रतिमा विसर्जन के बाद अघुलनशील वस्तुओं को छांटकर तालाब के पानी से बाहर निकलें।
  • अवशेष पदार्थों को सूखी जमीन पर पांच फुट से अधिक गहराई में गड्ढा खोदकर दबाएं।
  • जिस जगह यह गड्ढा खोदा जाए, वहां जलस्तर 40 फुट से अधिक गहरा होना चाहिए।
  • पानी में पड़े सड़ रहे अवशेषों पर ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव नहीं कराना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed