{"_id":"6a95eb04fece31d2b608c9bf","slug":"proper-planning-of-dg-capacitors-will-reduce-electricity-line-losses-gorakhpur-news-c-7-gkp1062-1436359-2026-09-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Gorakhpur News: डीजी-कैपेसिटर की सही प्लानिंग से कम होगा बिजली का लाइन लॉस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Gorakhpur News: डीजी-कैपेसिटर की सही प्लानिंग से कम होगा बिजली का लाइन लॉस
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
खास खबर
- एमएमएमयूटी के शोध में डिस्ट्रीब्यूटेड जेनरेशन और कैपेसिटर बैंक की सही जगह और क्षमता तय करने का फ्रेमवर्क तैयार
गोरखपुर। बिजली वितरण नेटवर्क में डिस्ट्रीब्यूटेड जेनरेशन (डीजी) और कैपेसिटर बैंक की सही जगह और क्षमता तय कर लाइन लॉस कम किया जा सकता है। साथ ही नेटवर्क के विभिन्न हिस्सों में वोल्टेज स्तर को भी बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) के शोधकर्ताओं ने इसके लिए एक समग्र फ्रेमवर्क तैयार किया है। शोध का उद्देश्य वितरण नेटवर्क को अधिक दक्ष बनाना और बिजली की अनावश्यक ऊर्जा हानि को नियंत्रित करना है।
यह शोध एमएमएमयूटी के विद्युत अभियंत्रण विभाग के बीटेक द्वितीय वर्ष के छात्र प्रखर प्रताप सिंह, गेस्ट फैकल्टी डॉ. प्रियंका मौर्या और विभागाध्यक्ष प्रो. प्रभाकर तिवारी ने संयुक्त रूप से किया है। शोध में डीजी और कैपेसिटर बैंक की स्थापना से जुड़े निर्णयों को वैज्ञानिक तरीके से निर्धारित करने पर जोर दिया गया है।
प्रो. प्रभाकर के अनुसार, वितरण नेटवर्क में डीजी और कैपेसिटर बैंक की स्थापना केवल उनकी संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है। इनकी लोकेशन और क्षमता का सही चयन महत्वपूर्ण है। गलत स्थान या जरूरत से अधिक अथवा कम क्षमता का चयन होने पर अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता। इसके विपरीत, नेटवर्क की जरूरत के अनुसार इनका नियोजन करने से लाइन लॉस कम करने और वोल्टेज प्रोफाइल को बेहतर रखने में सहायता मिल सकती है। (संवाद)
विज्ञापन
लोड सेंटर के करीब होगा बिजली उत्पादन
डिस्ट्रीब्यूटेड जेनरेशन के तहत बिजली का उत्पादन उपभोक्ताओं या लोड सेंटर के नजदीक किया जाता है। इससे बिजली को लंबी दूरी तक पहुंचाने में होने वाली ऊर्जा हानि कम करने में मदद मिल सकती है। वहीं, कैपेसिटर बैंक विद्युत प्रणाली में रिएक्टिव पावर की भरपाई करने में सहायक होता है। इससे वोल्टेज स्तर बनाए रखने और पावर क्वालिटी में सुधार की संभावना रहती है। दोनों के बेहतर संयोजन और वैज्ञानिक प्लानिंग से वितरण नेटवर्क की कार्यक्षमता बढ़ाई जा सकती है।
नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार में उपयोगी
एमएमएमयूटी की कुलपति प्रो. अनुपमा कौशिक शर्मा ने कहा कि सौर ऊर्जा समेत नवीकरणीय और विकेंद्रीकृत ऊर्जा स्रोतों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे स्रोतों को विद्युत वितरण नेटवर्क से जोड़ने के लिए वैज्ञानिक प्लानिंग जरूरी है। शोधकर्ताओं का तैयार फ्रेमवर्क भविष्य में कम ऊर्जा हानि, बेहतर वोल्टेज और अधिक दक्ष वितरण प्रणाली विकसित करने में उपयोगी हो सकता है।
मलयेशिया में मिला बेस्ट पेपर अवार्ड
शोधपत्र को कुआलालंपुर, मलयेशिया में आयोजित प्रथम आईईईई इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन सस्टेनेबल सॉल्यूशंस इन इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजीज एंड अर्थ साइंस में बेस्ट पेपर अवार्ड मिला है। 24 अगस्त को प्रखर प्रताप सिंह और प्रो. प्रभाकर तिवारी ने सम्मेलन में शोधपत्र का व्यक्तिगत रूप से प्रस्तुतीकरण किया जबकि डॉ. प्रियंका मौर्या ऑनलाइन माध्यम से शामिल हुईं।
क्या है डीजी-कैपेसिटर
डीजी यानी बिजली का स्थानीय उत्पादन, जैसे सौर ऊर्जा या छोटे जनरेटर, जो वितरण नेटवर्क के पास बिजली पैदा करते हैं। कैपेसिटर विद्युत प्रणाली में वोल्टेज सुधारने और रिएक्टिव पावर की भरपाई करने वाला उपकरण है। इससे बिजली की गुणवत्ता और वितरण प्रणाली की दक्षता बेहतर होती है।
विज्ञापन
- एमएमएमयूटी के शोध में डिस्ट्रीब्यूटेड जेनरेशन और कैपेसिटर बैंक की सही जगह और क्षमता तय करने का फ्रेमवर्क तैयार
गोरखपुर। बिजली वितरण नेटवर्क में डिस्ट्रीब्यूटेड जेनरेशन (डीजी) और कैपेसिटर बैंक की सही जगह और क्षमता तय कर लाइन लॉस कम किया जा सकता है। साथ ही नेटवर्क के विभिन्न हिस्सों में वोल्टेज स्तर को भी बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) के शोधकर्ताओं ने इसके लिए एक समग्र फ्रेमवर्क तैयार किया है। शोध का उद्देश्य वितरण नेटवर्क को अधिक दक्ष बनाना और बिजली की अनावश्यक ऊर्जा हानि को नियंत्रित करना है।
यह शोध एमएमएमयूटी के विद्युत अभियंत्रण विभाग के बीटेक द्वितीय वर्ष के छात्र प्रखर प्रताप सिंह, गेस्ट फैकल्टी डॉ. प्रियंका मौर्या और विभागाध्यक्ष प्रो. प्रभाकर तिवारी ने संयुक्त रूप से किया है। शोध में डीजी और कैपेसिटर बैंक की स्थापना से जुड़े निर्णयों को वैज्ञानिक तरीके से निर्धारित करने पर जोर दिया गया है।
विज्ञापन
प्रो. प्रभाकर के अनुसार, वितरण नेटवर्क में डीजी और कैपेसिटर बैंक की स्थापना केवल उनकी संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है। इनकी लोकेशन और क्षमता का सही चयन महत्वपूर्ण है। गलत स्थान या जरूरत से अधिक अथवा कम क्षमता का चयन होने पर अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता। इसके विपरीत, नेटवर्क की जरूरत के अनुसार इनका नियोजन करने से लाइन लॉस कम करने और वोल्टेज प्रोफाइल को बेहतर रखने में सहायता मिल सकती है। (संवाद)
विज्ञापन
लोड सेंटर के करीब होगा बिजली उत्पादन
डिस्ट्रीब्यूटेड जेनरेशन के तहत बिजली का उत्पादन उपभोक्ताओं या लोड सेंटर के नजदीक किया जाता है। इससे बिजली को लंबी दूरी तक पहुंचाने में होने वाली ऊर्जा हानि कम करने में मदद मिल सकती है। वहीं, कैपेसिटर बैंक विद्युत प्रणाली में रिएक्टिव पावर की भरपाई करने में सहायक होता है। इससे वोल्टेज स्तर बनाए रखने और पावर क्वालिटी में सुधार की संभावना रहती है। दोनों के बेहतर संयोजन और वैज्ञानिक प्लानिंग से वितरण नेटवर्क की कार्यक्षमता बढ़ाई जा सकती है।
नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार में उपयोगी
एमएमएमयूटी की कुलपति प्रो. अनुपमा कौशिक शर्मा ने कहा कि सौर ऊर्जा समेत नवीकरणीय और विकेंद्रीकृत ऊर्जा स्रोतों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे स्रोतों को विद्युत वितरण नेटवर्क से जोड़ने के लिए वैज्ञानिक प्लानिंग जरूरी है। शोधकर्ताओं का तैयार फ्रेमवर्क भविष्य में कम ऊर्जा हानि, बेहतर वोल्टेज और अधिक दक्ष वितरण प्रणाली विकसित करने में उपयोगी हो सकता है।
मलयेशिया में मिला बेस्ट पेपर अवार्ड
शोधपत्र को कुआलालंपुर, मलयेशिया में आयोजित प्रथम आईईईई इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन सस्टेनेबल सॉल्यूशंस इन इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजीज एंड अर्थ साइंस में बेस्ट पेपर अवार्ड मिला है। 24 अगस्त को प्रखर प्रताप सिंह और प्रो. प्रभाकर तिवारी ने सम्मेलन में शोधपत्र का व्यक्तिगत रूप से प्रस्तुतीकरण किया जबकि डॉ. प्रियंका मौर्या ऑनलाइन माध्यम से शामिल हुईं।
क्या है डीजी-कैपेसिटर
डीजी यानी बिजली का स्थानीय उत्पादन, जैसे सौर ऊर्जा या छोटे जनरेटर, जो वितरण नेटवर्क के पास बिजली पैदा करते हैं। कैपेसिटर विद्युत प्रणाली में वोल्टेज सुधारने और रिएक्टिव पावर की भरपाई करने वाला उपकरण है। इससे बिजली की गुणवत्ता और वितरण प्रणाली की दक्षता बेहतर होती है।