Gorakhpur News: एमएमएमयूटी में विद्यार्थियों को उद्योग की बारीकियों की जानकारी देंगे 'प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस'
एमएमएमयूटी कुलपति, प्रो. जेपी सैनी ने कहा कि इंजीनियरिंग के पढ़ाई के साथ छात्र कक्षा में उद्योग से जुड़ी जानकारी भी हासिल कर सकेंगे। इसके लिए उद्योग से जुड़े विशेषज्ञ की ''प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस'' पद पर तैनाती की जाएगी। इसके लिए उनका अनुभव 15 वर्ष होना अनिवार्य है।
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मदनमोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के इंजीनियरिंग के छात्र उद्योग और अर्थव्यवस्था की बारीकियों से भी रूबरू होंगे। इसके लिए उद्योग से जुड़े विशेषज्ञ उनको इंडस्ट्री के कामकाज और माहौल से अवगत कराते हुए उनके कौशल का विकास करेंगे। इसको लेकर उद्योग से जुड़े विशेषज्ञ की ''प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस'' पद पर नियुक्ति की जाएगी। विश्वविद्यालय इसकी तैयारी में जुट गया है। 28 अक्तूबर को होने वाली विद्या परिषद और 3 नवंबर को होने वाली प्रबंध बोर्ड की बैठक से अनुमोदन होने के बाद नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में स्नातक कार्यक्रमों को समग्र और बहु-विषयक दृष्टिकोण के साथ संशोधित किया गया है। इंडस्ट्री (उद्योग) के अनुसार विशेष कौशल वाले इंजीनियर को तैयार करने के उद्देश्य से ''प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस'' की तैनाती करने का प्रावधान दिया है। एमएमएमयूटी ने इस प्रावधान पर अमल शुरू कर दिया है। इसके संचालन के लिए पाठ्यक्रम एवं रूपरेखा तैयार कर लिया गया है। अब उसको विद्या परिषद से अनुमाेदन के बाद प्रबंध बोर्ड रखा जाएगा।
प्रबंध बोर्ड की मोहर लगने के बाद उद्योग से जुड़े विशेषज्ञ का कम से कम एक साल और अधिकतम चार साल के लिए नियुक्ति किया जाएगा। उनको गेस्ट फैकल्टी की तरह निर्धारित मानदेय भी दिया जाएगा। इसके अलावा तीन कैटेगरी में उनका चयन करने का निर्णय लिया जाएगा। इसमें वालंटियर, शार्ट टाइमर व फुल टाइमर के तौर पर नियुक्त किया जाएगा।
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प्रशिक्षित कर इंडस्ट्री के योग्य किया जाएगा तैयार
आज का उद्योग विशिष्ट कौशल वाले स्नातकों की तलाश करता है। लेकिन उच्च शिक्षा प्रणाली ऐसे स्नातकों को तैयार कर रही है जिनके पास आवश्यक कौशल की कमी है। परिणामस्वरूप, कई उद्योग अब स्नातकों को नियुक्त करते हैं और उन्हें नियोजित करने से पहले पर्याप्त प्रशिक्षण प्रदान करते हैं। शिक्षण में उद्योग जगत के विशेषज्ञों को शामिल करने से उद्योग और उच्च शिक्षण संस्थानों दोनों को लाभ होगा। उनको पढ़ाई के दौरान प्रशिक्षण देकर इंडस्ट्री के योग्य तैयार किया जाएगा।
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प्रशिक्षित स्नातक तैयार करने को यूजीसी ने बनाई गाइड लाइन
यूजीसी ने प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस नामक पदों की एक नई श्रेणी के माध्यम से उद्योग और अन्य पेशेवर विशेषज्ञता को शैक्षणिक संस्थानों में लाने के लिए एक नई पहल की है। इससे वास्तविक दुनिया की प्रथाओं और अनुभवों को कक्षाओं में ले जाने में मदद मिलेगी और उच्च शिक्षा संस्थानों में संकाय संसाधनों में भी वृद्धि होगी। बदले में, उद्योग और समाज को प्रासंगिक कौशल से लैस प्रशिक्षित स्नातक मिल सकेंगे।
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