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Gorakhpur News: प्रो. दिव्या रानी सिंह को छात्र कल्याण की जिम्मेदारी
Fri, 02 Oct 2026 03:05 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Fri, 02 Oct 2026 03:05 AM IST
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गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में गृह विज्ञान विभाग की प्रोफेसर व विभागाध्यक्ष और महिला अध्ययन केंद्र की निदेशक प्रो. दिव्या रानी सिंह को नया अधिष्ठाता छात्र कल्याण (डीएसडब्ल्यू) नियुक्त किया गया है। कुलपति प्रो. केपी सिंह ने उनकी नियुक्ति की है।
प्रो. दिव्या रानी सिंह को उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी की विजिटर नॉमिनी भी हैं। जीबी पंत कृषि व प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय और सोफिया कॉलेज, अजमेर से शिक्षा प्राप्त प्रो. सिंह के नाम 94 शोध-पत्र और 25 पुस्तकें व पुस्तक-अध्याय प्रकाशित हैं।
उन्होंने 12 शोधार्थियों के पीएचडी शोध का निर्देशन और 92 परास्नातक शोध-प्रबंधों का मार्गदर्शन किया है। उन्हें डिस्टिंग्विश्ड साइंटिस्ट, यंग साइंटिस्ट और रिसर्च एक्सीलेंस अवॉर्ड समेत कई सम्मान मिल चुके हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के 88 सम्मेलनों में उन्होंने शोध-पत्र प्रस्तुत किए हैं।
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महिला सशक्तीकरण, पोषण, स्वास्थ्य, किशोर विकास और सामुदायिक कल्याण उनके प्रमुख कार्यक्षेत्र रहे हैं। छात्र कल्याण से जुड़ी गतिविधियों की नई जिम्मेदारी में उनके अनुभव से विद्यार्थियों से जुड़े विषयों को संस्थागत स्तर पर मजबूती मिलने की उम्मीद है।
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प्रो. दिव्या रानी सिंह को उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी की विजिटर नॉमिनी भी हैं। जीबी पंत कृषि व प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय और सोफिया कॉलेज, अजमेर से शिक्षा प्राप्त प्रो. सिंह के नाम 94 शोध-पत्र और 25 पुस्तकें व पुस्तक-अध्याय प्रकाशित हैं।
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उन्होंने 12 शोधार्थियों के पीएचडी शोध का निर्देशन और 92 परास्नातक शोध-प्रबंधों का मार्गदर्शन किया है। उन्हें डिस्टिंग्विश्ड साइंटिस्ट, यंग साइंटिस्ट और रिसर्च एक्सीलेंस अवॉर्ड समेत कई सम्मान मिल चुके हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के 88 सम्मेलनों में उन्होंने शोध-पत्र प्रस्तुत किए हैं।
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महिला सशक्तीकरण, पोषण, स्वास्थ्य, किशोर विकास और सामुदायिक कल्याण उनके प्रमुख कार्यक्षेत्र रहे हैं। छात्र कल्याण से जुड़ी गतिविधियों की नई जिम्मेदारी में उनके अनुभव से विद्यार्थियों से जुड़े विषयों को संस्थागत स्तर पर मजबूती मिलने की उम्मीद है।