गोरखपुर में डीजे दे रहा जख्म: बच्चों के कानों में रुई लगाते, कोई बीमार तो कोई सदमे में... बर्तन जमीन पर आ जाते
मोहल्ले की गायत्री चंद्रावत ने बताया कि डीजे की वजह से सबका चैन सुकून छीन जाता है। तेज आवाज की वजह से पूरा घर हिलता है। उन्होंने बताया कि जुलूसों के दौरान बच्चों के कानों में रुई डालनी पड़ती है, ताकि उनको सोने में कोई समस्या न आए। लेकिन आवाज का असर कई दिनों तक रहता है। अचानक बच्चे नींद से जाकर चिल्लाने लगते हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
गोरखपुर शहर के जिन इलाकों में देवी-देवताओं की प्रतिमाएं स्थापित होती हैं या जुलूस निकलता हैं वहां के लोगों का दर्द पूछिए...। तेज आवाज में बजते डीजे से लोग बीमार हो रहे हैं। लोग अपने बच्चों को कान में रुई लगाकर सुलाते हैं पर जब डीजे का शोर होता है तो उनकी नींद अचानक खुल जाती है। यही नहीं, कंपन करती तेज आवाज से लोगों के किचन के बर्तन तक गिर जाते हैं।
हृदय रोगियों के लिए तो समय काटना मुश्किल हो जाता है। इन समस्याओं को झेलते हुए अब लोग सब्र खोने लगे हैं। यही वजह है कि कई मोहल्लों के लोगों ने सामूहिक तौर पर एकजुट होकर मोर्चा खोला है। सभी चाहते हैं कि अब यह शोर बंद हो।
शहर में जुलूस, प्रतिमा विसर्जन और शोभायात्रा के दौरान तेज आवाज में डीजे बजते हैं। आजिज आकर लोगों ने डीजे की तेज आवाज के खिलाफ जनजागरण अभियान शुरू कर दिया है। बसंतपुर स्थित रामजानकी मंदिर परिवार, दुर्गा मिलन चौक की ओर से पूरे शहर में बैनर लगाए जा रहे हैं, ताकि लोगों को जागरूक किया जा सके।
इसे भी पढ़ें: नवरात्र में मिलेगा फूड पार्क का तोहफा...सीएम योगी से उद्घाटन की तैयारी
ऐसा करने वाले उनकी पीड़ा को समझें। लोगों ने प्रशासनिक अधिकारियों को पत्र देकर इस पर रोक लगाने की मांग की है। इस मोहल्ले से अधिकांश जुलूस और प्रतिमाएं गुजरती हैं। इससे लोगों को काफी दिक्कत होती है। तेज आवाज में डीजे बजने से खासकर उन लोगों को समस्या होती हैं, जो पहले से बीमार हैं। उनका उपचार चल रहा है।
गीता को दस साल पहले हुआ ब्रेन हैमरेज... तेज आवाज से होती हैं बेचैन
बसंतपुर मोहल्ले के दुर्गा मिलन चौक के पास ही पूर्णिमा सैनी का मकान है। उनके जेठ दुर्गेश चंद सैनी और जेठानी गीता सैनी को गंभीर बीमारी है। मंगलवार की दोपहर 02.20 बजे पूर्णिमा सैनी सामान लेने के लिए मोहल्ले के किराना दुकान पर पहुंचीं।
इसे भी पढ़ें: गोरखपुर में आज से शुरू होगी 161 साल पुरानी बर्डघाट की रामलीला, जानिए पूरा शेड्यूल
उनसे जब पूछा गया कि डीजे बजाने से क्या समस्या आ रही है, तो बोलीं-मेरी जेठानी को करीब 10 साल पहले ब्रेन हेमरेज हुआ था। जेठ का उपचार चल रहा है। डीजे की आवाज सुनते ही वह लोग बैचेन हो जाते हैं। उनको घर में सारे खिड़की दरवाजे बंद करके पीछे के कमरे में ले जाना पड़ता है। गीता और दुर्गेश के अलावा इस मोहल्ले में अन्य लोग डीजे बजने से परेशान हो जाते हैं।
अचानक जागकर चिल्लाने लगते हैं बच्चे
मोहल्ले की गायत्री चंद्रावत ने बताया कि डीजे की वजह से सबका चैन सुकून छीन जाता है। तेज आवाज की वजह से पूरा घर हिलता है। उन्होंने बताया कि जुलूसों के दौरान बच्चों के कानों में रुई डालनी पड़ती है, ताकि उनको सोने में कोई समस्या न आए। लेकिन आवाज का असर कई दिनों तक रहता है। अचानक बच्चे नींद से जाकर चिल्लाने लगते हैं। उनको संभालने में पूरी रात गुजर जाती है।
इसे भी पढ़ें: धुरियापार में नए औद्योगिक क्षेत्र के लिए 823 करोड़ की दरकार, शासन से लगाई गुहार
किचन में गिरते हैं बर्तन, चार से पांच दिन तक सिरदर्द
मोहल्ले की रीना आर्या ने बताया कि डीजे की तेज आवाज से हर कोई परेशान है। जुलूस या प्रतिमा विसर्जन के बाद जब डीजे बजना बंद हो जाता हैं तो इसका असर चार से पांच दिनों तक रहता है। सिरदर्द से परेशानी होती है। कई दिनों तक नींद नहीं आती। कभी-कभी तो नींद की गोली खानी पड़ती है, तब जाकर रात गुजर पाती है।
रीना ने कहा कि जब डीजे बजता है तो किचन में रखे बर्तन गिर जाते हैं। गणेश प्रतिमा विसर्जन के दौरान उनको बुखार था। वह दवा खाकर सोईं। रात में अचानक बर्तन गिरने से वह डर गईं। इसी मोहल्ले के बलवंत ने बताया कि डीजे बजने पर उनको चक्कर आ जाता है। इसलिए वह घर से बाहर नहीं निकलते हैं।
इसे भी पढ़ें: बदल रहा है गोरखपुर: इस महीने के अंत तक बन जाएगी तीसरी लाइन के लिए डीपीआर
उपचार कराने लखनऊ गईं रेनू, बढ़ जाता है ब्लडप्रेशर
लोग बोले
मेरे जेठ और जेठानी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। जब डीजे बजता हैं तो दोनों लोगों को पीछे के कमरे में ले जाना पड़ता है। सारे खिड़की और दरवाजे बंद करने के बाद भी राहत नहीं मिलती है।-पूर्णिमा सैनी, बसंतपुर।
इसे भी पढ़ें: बिना बरसे वापस लौटा दक्षिण-पश्चिम मानसून, अब पूरे महीने सताएगी गर्मी
जितने दिनों तक डीजे बजता है। उतने दिनों तक बच्चे सो नहीं पाते हैं। पूरा मकान हिलता है। बच्चों को सुलाने के लिए उनके कानों में रूई लगानी पड़ती है। फिर भी वह परेशान हो जाते हैं। इससे वह अगले दिन स्कूल नहीं जा पाते हैं।-गायत्री चंद्रावत, बसंतपुर।
मेरा बेटा डीजे की आवाज से परेशान होकर रात में चिल्लाता है। कई बार उसकी तबीयत खराब हो चुकी है। इसलिए हम लोगों ने सोचा कि इस पर रोक लगने से सबको राहत मिलेगी। मोहल्ले के लोगों संग मिलकर पूरे शहर में अभियान चलाया जाएगा।-अजय कुमार, बसंतपुर।
इसे भी पढ़ें:
इस बार गणेश प्रतिमा विसर्जन के दौरान मुझे बुखार था। रात में डीजे बजने की वजह से किचन के बर्तन गिरने पर मैं काफी डर गई। बुखार के बाद तेज सिरदर्द से काफी परेशान रही। इससे उबरने में पांच दिन लग गए।-रीना आर्या, बसंतपुर।
तेज ध्वनि से खराब होती हैं कान की नसें, तनाव और एंजाइटी का बनता है कारण
आजकल सामाजिक व धार्मिक आयोजनों में तेज आवाज वाले साउंड बॉक्स व डीजे का चलन बढ़ रहा है, लेकिन इसका आम आदमी के जीवन पर गहरा असर हो रहा है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. आदित्य पाठक बताते हैं कि 20 से 30 डेसिबल के बीच की आवाज स्पष्ट सुनाई देती है।
कहा कि इससे दिक्कत नहीं होती, लेकिन 40 से 50 डेसिबल तक का शोर इंसान को परेशान करने लगता है।