खत्म नहीं हो रहा विवाद: गोरखपुर विश्वविद्यालय के शिक्षकों के बगावती तेवर, प्रो. संजय को चुनाव अधिकारी किया गया नामित
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दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के शिक्षक संघ का चुनाव होगा। इसे लेकर शिक्षकों ने वाणिज्य संकाय के प्रो संजय बैजल को चुनाव अधिकारी बनाया है। चुनाव समिति भी गठित की गई है। खास बात यह है कि चुनाव का फैसला 175 में से 165 शिक्षकों ने लिया है। इसमें विश्वविद्यालय प्रशासन की सहमति नहीं है। शिक्षकों के इस फैसले को बगावत के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि शिक्षक संघ चुनाव कराने की अर्जी लंबे समय से कुलपति प्रो राजेश सिंह के पास पड़ी है। इस पर अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
गोरखपुर विश्वविद्यालय के शिक्षकों की आमसभा सोमवार को मजीठिया भवन में हुई है। इसमें 165 शिक्षकों ने हिस्सा लिया है। बैठक में शिक्षक संघ का चुनाव कराने सहित कई प्रस्ताव पारित किए हैं। शिक्षक संघ के निवर्तमान अध्यक्ष प्रो. विनोद कुमार सिंह ने आमसभा के समक्ष अपना इस्तीफा रखा, जिसे ध्वनिमत से मंजूर किया गया। प्रो विनोद सिंह ने शिक्षकों के अपमान व नोटिस का मुद्दा उठाया।
इससे पहले प्रो. सुधा यादव की पत्रावलियों पर फैसला न लेने, कारण बताओ नोटिस देने का मामला उठाया गया। प्रो. दिग्विजयनाथ मौर्य ने हिंदी विभाग के निलंबित प्रो. कमलेश कुमार गुप्त की प्रशंसा की और कहा कि मनमाने ढंग से काम किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश विश्वविद्यालय महाविद्यालय शिक्षक महासंघ (फुपुक्टा) के मुख्यालय सचिव प्रो. राजवंत राव ने मनमाने ढंग से प्रवेश, परीक्षा, सिलेबस का मामला उठाया है।
संघर्ष समिति भी बनाई
प्रो उमेश नाथ त्रिपाठी ने बताया कि आमसभा ने संघर्ष समिति का गठन किया है। इसमें शिक्षक संघ के सभी पूर्व अध्यक्ष और महामंत्री को सदस्य बनाया गया है। समिति को जरूरत पड़ी तो और सदस्य चुन सकती है। यह समिति चुनाव होने तक काम देखेगी।
एक सप्ताह में भुगतान की मांग
आमसभा के दौरान कोरोना से दिवंगत शिक्षकों प्रो. मानवेंद्र प्रताप सिंह, प्रो. अशोक तिवारी व डॉ. शरद चंद्र श्रीवास्तव को श्रद्धांजलि दी गई। साथ ही शिक्षकों के परिजनों को सभी लंबित देय एक सप्ताह में देने की मांग रखी गई।
ये प्रस्ताव पारित
- - कुलपति प्रो. राजेश सिंह को कामकाज से रोका जाए। साथ ही उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की जाए।
- - हिंदी विभाग के प्रो. कमलेश कुमार गुप्त का निलंबन और सात शिक्षकों की वेतन कटौती रद्द की जाए।
- - 65 से ज्यादा शिक्षकों को जारी कारण बताओ नोटिस वापस लिया जाए।
- - पठन-पाठन और शिक्षकीय गरिमा को तत्काल बहाल किया जाए।
- - निजी सुविधा वाले वीआईपी कल्चर खत्म किया जाए।
- - शिक्षक संघ के निवर्तमान अध्यक्ष प्रो. विनोद सिंह के इस्तीफे को मंजूर किया गया। साथ ही नई कार्यकारिणी के चुनाव के लिए सर्वसम्मति से प्रो. संजय बैजल को चुनाव अधिकारी नामित किया गया।
- - नई कार्यकारिणी के अस्तित्व में आने तक शिक्षक संघ के पूर्व अध्यक्षों व महामंत्रियों का संघर्ष मोर्चा काम करेगा।
गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो राजेश सिंह ने कहा कि आमसभा में क्या निर्णय हुए हैं, इसकी जानकारी नहीं है। विश्वविद्यालय के हित में जो भी निर्णय होगा, उसे अमल में लाया जाएगा। पूरी जानकारी होने के बाद ही इस मसले पर कुछ कहना उचित रहेगा।
साढ़े चार साल पहले हुआ था शिक्षक संघ का वार्षिक चुनाव
शिक्षक संघ का चुनाव साढ़े चार साल पहले अगस्त 2017 में हुआ था। अध्यक्ष के रूप में प्रो. विनोद सिंह चुने गए थे। महामंत्री पद के लिए लड़ाई बराबरी पर थी। चुनाव अधिकारी ने यह निर्णय लिया था कि पहले छह महीने प्रो उमेश यादव और शेष छह महीने डॉ. ध्यानेंद्र दूबे महामंत्री रहेंगे। एक साल के लिए यह चुनाव होता है। संघ के बाइलॉज के मुताबिक अगस्त 2018 में कार्यकाल समाप्त हो जाना था, लेकिन चुनाव नहीं हुआ। प्रो. विनोद सिंह अध्यक्ष के रूप में कार्य करते रहे। वर्ष 2020 में निवर्तमान महामंत्री प्रो. उमेश यादव ने समिति के अस्तित्व पर सवाल उठाया था।