दहशत का मंजर: उफनाईं नदियां तो दरकने लगे बांध, लोगों को सताने लगा बाढ़ का डर
मलौनी बंधे पर करीब पांच किलोमीटर तक जगह-जगह रेनकट मिले। इसमें कुछ तो ऐसे हैं जो बाढ़ आने पर पानी की धार से बंधे को धराशायी कर देंगे। कठउर में बंधे से रमेश के घर तक जाने वाले मोड़ पर बड़ा गड्ढा मिला।
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बारिश से नदियों का जलस्तर जहां बढ़ने लगा है, वहीं रेनकट से बंधों की हालत खराब होने लगी है। मूसलाधार बारिश से जहां-तहां गड्ढे बन जा रहे हैं। यदि नदियों में बाढ़ आई तो बदहाल बंधे पानी का दबाव नहीं झेल पाएंगे। लोगों का कहना है कि रेनकट की मरम्मत जरूरी है। बंधे के हालात अभी से डराने लगे हैं। सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने बताया कि नदियों में जलस्तर को देखते हुए बंधों पर नजर रखी जा रही है। तत्काल रेनकट की मरम्मत के संबंध में निर्देश दिए गए हैं।
शहर के दक्षिणी छोर पर राप्ती नदी के किनारे मलौनी बंधा बना है। महेवा चुंगी से शुरू होकर कुईं बाजार तक बाढ़ के पानी से यह बंधा बचाता है। वर्ष 1998 में आई बाढ़ के कारण यह बंधा टूट गया था। इससे हर साल बाढ़ आने पर लोग आशंकित रहते हैं। बारिश होने पर लहसड़ी से लेकर अजवनियां तक रिसाव होता है। ऐसे में राप्ती नदी का बढ़ाव देखकर लोग सशंकित होने लगे हैं।
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बृहस्पतिवार की दोपहर 01.05 बजे कठउर गांव के सामने बंधे के किनारे सुग्रीव निषाद, विद्या सागर और रामसहाय नाव की मरम्मत कर रहे थे। तभी अचानक बारिश होने लगी। इसलिए तीनों बरामदे में जाकर बैठ गए। सुग्रीव ने कहा कि ऐसे ही बारिश होती रही तो बाढ़ आनी तय है। बंधों के जो हालत हैं, उससे तो डूबना तय है। उसी समय विद्या बोले कि भईया, नाव की मरम्मत जरूरी है।
करीब सात मिनट के बाद बारिश बंद हो गई। इसके बाद बाहर निकलकर रामसहाय नाव की कील ठीक करने लगे। यहां से आगे बढ़ने पर खिरवनिया के सामने दुर्गा मंदिर है, जिसके बगल में चुन्नीलाल की चाय की दुकान है। यहां गांव के साधु, प्रदीप, राहुल, इंदल, रामबरन, अमित आदि मौजूद थे। मंदिर के पास ही पीपल के पेड़ के नीचे नदी कीओर बंधे में रेनकट को लेकर सभी चर्चा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अभी इतनी ही बारिश हुई तो यह हाल है तो आगे चलकर क्या होगा।
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बारिश ने बिगाड़ी बंधे की सूरत, दरकने लगा पिच रोड
मलौनी बंधे पर करीब पांच किलोमीटर तक जगह-जगह रेनकट मिले। इसमें कुछ तो ऐसे हैं जो बाढ़ आने पर पानी की धार से बंधे को धराशायी कर देंगे। कठउर में बंधे से रमेश के घर तक जाने वाले मोड़ पर बड़ा गड्ढा मिला। यहां से आगे सेमरा देवी प्रसाद गांव के सामने रामसजीवन की जनरल स्टोर की गुमटी के पास रेनकट से बिजली का खंभा लटका था। रामसजीवन ने बताया कि बारिश से मिट्टी बह गई है तो यह पोल लटक गया है। यदि यह सड़क पर गिर गया तो किसी राहगीन की जान चली जाएगी। यहां से आगे खिरवनिया शिव मंदिर के पास रेनकट बन गए हैंं।
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ग्रामीणों ने बताया कि तेज बारिश होने पर मिट्टी के साथ पिच रोड भी बह जा रही है। इसका एक ही उपाय है कि बालू भरी बोरियां डालकर मरम्मत की जाए। इस बंधे से सेंदुली बेंदुली, लहसड़ी, डुहिया, विशुनपुरा, लालपुर टीकर, भसवा, नदुआ, बीस बिगहा, चिरइहवा, हथिया परास, नौवा डुमरी, कजाकपुर कालोनी, सेंदुली बेंदुली, गायघाट, बरबसपुर सहित अन्य गांवों की सुरक्षा होती है। कमोवेश यही हालत राप्ती और रोहिन नदी के अन्य जगहों पर बंधों की हो गई है।
मटियारी में घुस जाएगा नदी का पानी
इस बंधे पर जगह- जगह रेनकट हो गए हैं। क्षेत्र के रामहरक, कोमल, दयानंद ने बताया कि बाढ़ का खतरा बना हुआ है। गोला प्रतिनिधि के अनुसार सरयू नदी के जलस्तर में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। कटान वाले स्थानों पर बोल्डर पीचिंग का कार्य हो जाने से कटान का खतरा कम हुआ है। नदी के किनारे पर बारानगर, तीरागांव, कोहना, बिसरा व रामामऊ की ओर बाढ़ का पानी चढ़ रहा है।