Gorakhpur News: फाइटो प्लाज्मा कीट बड़े मक्कार...छिपकर करते हैं वार
गोरखपुर विश्वविद्यालय का बॉयोटेक्नोलॉजी विभाग ने पांच साल के शोध में करीब 200 पौधों में फाइटो प्लाज्मा जनित बीमारियों की पहचान की है। पाया गया है कि इस बीमारी को रोकने के लिए निरंतर पौधों की निगरानी जरूरी है।
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दलहन और तिलहनी फसलों के अलावा सब्जियों पर हमला करने वाले फाइटो प्लाज्मा कीट बहुत ही चालाक-मक्कार माने जाते हैं। कीटनाशक दवाओं का छिड़काव होते ही ये कीट अपना ठिकाना बदल देते हैं। खेत की मेड़ पर उगे खर-पतवार में छिप जाते हैं। जैसे ही कीटनाशक का असर कम होता है फसलों को चट कर जाते है।
गोरखपुर विश्वविद्यालय का बॉयोटेक्नोलॉजी विभाग ने पांच साल के शोध में करीब 200 पौधों में फाइटो प्लाज्मा जनित बीमारियों की पहचान की है। पाया गया है कि इस बीमारी को रोकने के लिए निरंतर पौधों की निगरानी जरूरी है। समय रहते पौधे के ग्रसित टहनी को हटाकर उसके प्रसार को रोका जा सकता है।
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गोरखपुर विश्वविद्यालय के बॉयोटेक्नोलॉजी विभाग की शिक्षिका डॉ. स्मृति मल्ल की निगरानी में फाइटो प्लाज्मा पर शोध कार्य वर्ष 2018 से चल रहा है। बैगन, टमाटर, मिर्च, गेंदे के फूल, अनार आदि के पौधे पर शोध किया गया। इसमें पाया गया कि फाइटो प्लाज्मा का जीवाणु लगते ही उसकी पत्तियां पीली और सिकुड़ने लगती हैं।
इस रोग से ग्रसित होने के शुरुआती दौर में ही पैाधे की टहनी को काट कर हटा दें तो अन्य पौधों को खराब होने से बचाया जा सकता है। इस रोग के लगते ही कीटनाशक टेट्रासाइक्लीन एंटीबॉयोटिक का छिड़काव कारगर है। लेकिन, इसका असर कम होते ही जीवाणु फिर से तेजी से हमला करता है।
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