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राख से परेशान हैं लोग: छोटे-मोटे कार्यक्रम होते नहीं, अब शादी-विवाह की सता रही चिंता

Thu, 20 Apr 2023 01:30 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 20 Apr 2023 01:30 PM IST
सार

मोहल्लावासी शांति देवी ने कहा कि हम लोगों ने वर्ष 2016 में मकान बनवाया है। अब पछतावा हो रहा है। इस तरफ फैक्टरी से किसी तरह का नुकसान नहीं था। लेकिन ऐसा लग रहा है कि यहां पर मकान बनवाकर हम लोगों ने बड़ी गलती कर दी है।

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People troubled by ashes of factories running near Sahabajganj sahajanwa Gorakhpur
फर्श पर जमी राख। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

यहां घर बनाकर बसे तो कभी नहीं सोचा था कि ऐसी हालत होगी। राख के कारण छोटे-मोटे कार्यक्रम भी नहीं होते हैं। जन्मदिन की पार्टी हो या अन्य कोई कार्यक्रम, कुछ भी नहीं हो पा रहा है। यहां लोगों को शादी-विवाह की चिंता सताने लगी है। फैक्ट्री चलने से हमारी तो खुशियां राख हो गई हैं।

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वर्ष 2009 में मकान जब बना तो यहां खूब हरियाली थी। अब पेड़ों को देखिए, उके पत्ते कैसे काले पड़ गए हैं। यही हाल रहा तो बच्चों के भविष्य का क्या होगा? इतनी बात कहकर निशा सिंह फैक्ट्री की तरफ देखने लगीं। फैक्ट्री की चिमनी से निकला काला धुंआ आसमान में गुम होने के बजाय लोगों को डराने में लगा हुआ है। लोग रोज-रोज तिल-तिलकर इसकी दहशत में जी रहे हैं। किसी को खुद की बीमारी का खतरा सता रहा तो कोई अपने बच्चों की सेहत को लेकर फिक्रमंद है।
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सहबाजगंज मोहल्ले में बसे लोगों के माथे पर आने वाले भविष्य की चिंता साफ झलकती है। सूरज निकले या ना निकले। इस मोहल्ले में रहने वालों को कोई फर्क नहीं पड़ता। क्यों कि यहां कपड़े धोने के बाद लोग घरों में ही सुखाते हैं। धुएं और राख के कारण लोग धीरे-धीरे यह भूलते जा रहे हैं कि घरों की छत भी है। कभी-कभी रात में बिजली कट जाने पर गर्मी से बेहाल लोग अपनी छतों पर मच्छरदानी तानकर नहीं सो सकते हैं। मोहल्ले के अभिषेक कहते हैं कि आखिर यह सब कब तक चलता रहेगा। अब तो इस बात की चिंता होने लगी है कि ऐसा ही माहौल रहा तो यहां के युवकों की शादी नहीं होगी।

मोहल्ले में रहने वाली रंजू और मंजू का कहना है कि लोग यहां सेहत को लेकर ज्यादा चिंतित हैं। यहां के अधिकांश लोगों की सांसें फूलने लगी हैं। अक्सर ही खांसी की शिकायत रहती है। 40 साल से अधिक उम्र के लोग दमा के मरीज होने लगे हैं। बच्चों की त्वचा नाजुक होती है। इसलिए अधिकांश बच्चों को खुजली की शिकायत होती है। फैक्ट्री की चिमनियों से निकली राख के बदन में रगड़ जाने पर मिर्च लगने जैसी जलन होती है। इससे बच्चे व्याकुल हो उठते हैं। अक्सर ही डॉक्टरों के पास जाना पड़ता है। दोनों ने कहा कि यहां के हालात कतई ठीक नहीं हैं।
 

People troubled by ashes of factories running near Sahabajganj sahajanwa Gorakhpur
फैक्ट्री से निकलता धुआ, सामान छुने से काले हो जाते है हाथ। - फोटो : अमर उजाला।

शांति देवी ने बताया कि उनके परिवार में बेटी श्वेता और बेटे अभय प्रताप हैं। दोनों को एलर्जी की शिकायत हो गई है। खांसी, सर्दी और जुकाम तो सामान्य सी बात है। फेफड़ों में धूल के कण जाएंगे तो आगे क्या हाल होगा। यह सिर्फ शांति देेेवी की समस्या नहीं है। बल्कि यहां रहने वाले हर किसी की है, जो फैक्टरी के आसपास रहते हैं।

सता रही चिंता लगन में कैसे होंगे कार्यक्रम
मई माह में लगन की शुरुआत हो जाएगी। इस बात की चिंता लोगों को अभी से सताने लगी है। मोहल्ले के एक मैरेज हाल के संचालक प्रदीप कुमार ने बताया कि अगले माह में तिलक, शादी-विवाह के कार्यक्रम होंगे। ऐसे में उनको कैसे संपन्न कराया जाएगा। इसकी चिंता सता रही है, क्योंकि कुछ ही देर में पूरे मैरेज हाल में राख भर जाती है। इन परिस्थितियों में सारी साजो सजावट बर्बाद हो जाएगी। इसके अलावा इस मोहल्ले के लोगों की सबसे बड़ी चिंता है कि यदि आगे भी ऐसा ही माहौल रहा तो बच्चों के शादी-विवाह नहीं हो पाएंगे। कोई भी अपनी बेटी को यहां ब्याहने से बचेगा। गांव में बहुएं नहीं आ पाएंगी।

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लोगों ने क्या कहा

मोहल्लावासी निशा सिंह ने कहा कि हमारे मोहल्ले में छोटे-मोटे कार्यक्रम भी नहीं हो रहे हैं। बच्चों की बर्थडे पार्टी या अन्य कोई आयोजन नहीं किया जा रहा है। ऐसे में शादी विवाह के कार्यक्रम कैसे होंगे। इसकी चिंता सभी को सता रही है।

मोहल्लावासी मंजू राय ने कहा कि बच्चों की त्वचा पर राख का असर तेजी से पड़ रहा है। बच्चों के बदन में खुजली होने लगती है। यह परेशानी बढ़ती जा रही है।

मोहल्लावासी अभिषेक कुमार ने कहा कि ज्यादा देर तक बाहर रहने पर आंखों में खुजली होने लगती है। राख के कण पड़ जाने पर आंखें लाल हो जाती हैं। हवा चलने पर लोग काफी बच बचाकर निकलते हैं। अगर ऐसा ही माहौल रहा तो आगे चलकर युवाओं की शादी-विवाह का संकट खड़ा हो जाएगा।
 

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घर के अंदर जमी राख को साफ करती महिला। - फोटो : अमर उजाला।
मोहल्लावासी शांति देवी ने कहा कि हम लोगों ने वर्ष 2016 में मकान बनवाया है। अब पछतावा हो रहा है। इस तरफ फैक्टरी से किसी तरह का नुकसान नहीं था। लेकिन ऐसा लग रहा है कि यहां पर मकान बनवाकर हम लोगों ने बड़ी गलती कर दी है।

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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी पंकज यादव ने कहा कि गीडा क्षेत्र में दो फैक्ट्रियों से प्रदूूषण की शिकायत मिली थी। सुधार के लिए पहले ही सात दिन का अल्टीमेटम दिया जा चुका है। इसके बाद भी कोई गड़बड़ी सामने आएगी तो कार्रवाई की जाएगी। 


 
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