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कानपुर-पटना के कोचिंग संस्थानों से जुड़े पेपर सॉल्वर गिरोह के तार, अब एसटीएफ के रडार पर हैं ये लोग

Mon, 30 Nov 2020 10:37 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 30 Nov 2020 10:37 AM IST
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Paper solver gang connection coaching institutes of Kanpur-Patna in case of Delhi Police Recruitment Examination fraud
गिरफ्तार किए गए आरोपी। - फोटो : अमर उजाला।
कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) मध्य क्षेत्र की ओर से आयोजित दिल्ली पुलिस की कांस्टेबल (कार्यकारी) भर्ती परीक्षा-2020 में सेंधमारी से कानपुर और पटना के कुछ कोचिंग संस्थानों के नाम भी जुड़ गए हैं। इस सिलसिले में एसटीएफ की गोरखपुर इकाई ने रिपोर्ट तैयार करके मुख्यालय लखनऊ भेजी है। गिरफ्तार पेपर सॉल्वर पिंटू यादव और अभिषेक कुमार यादव कानपुर की काकादेव कोचिंग मंडी में पढ़ते हैं। अब एसटीएफ ने कोचिंग संचालकों को भी रडार पर लिया है।
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दिल्ली पुलिस भर्ती परीक्षा 27 नवंबर से 16 दिसंबर के बीच कराई जानी है। एसटीएफ की गोरखपुर इकाई ने शुक्रवार को सॉल्वर गिरोह के 12 सदस्यों को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया है। एसटीएफ के मुताबिक गिरोह के गुर्गे पढ़ने में तेज, लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को निशाना बनाते हैं।
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इस मामले में भी ऐसा हुआ है। पटना व कानपुर के कोचिंग संस्थानों से संपर्क करके पहले पढ़ाई में तेज विद्यार्थियों का ब्योरा निकलवाया गया, फिर निर्धारित धनराशि देने का लालच देकर पेपर सॉल्वर बनाया गया। अपराध की गंभीरता से अनजान विद्यार्थी सॉल्वर बन गए।
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रानीडीहा के फोटो स्टूडियो संचालक की तलाश

सरकारी एजेंसियों की पकड़ से दूर रहें, इस दिशा में गिरोह के गुर्गों ने बहुत काम किया था। जिस विद्यार्थी की जगह सॉल्वर बैठाना था, उससे मिलते-जुलते व्यक्ति को ढूंढा गया। एक ही तरह की हेयर स्टाइल व कपड़े बनवाए गए। फोटो मिक्स करके फर्जी प्रवेश पत्र बनाया गया। अभ्यर्थी की जगह सॉल्वर की फोटो लगाने का काम बिहार के रोहतास जिले के विक्रमगंज थाना क्षेत्र का महेश कुमार करता था। महेश का अपना स्टूडियो है।

पकड़े गए आरोपी 27 नवंबर से शहर के चार ऑनलाइन सेंटरों पर पर आयोजित प्रतियोगी परीक्षा में गड़बड़ी करने की फिराक में थे। इससे पहले ही एसटीएफ इंस्पेक्टर सत्यप्रकाश सिंह की अगुवाई वाली टीम ने दबोच लिया। साथ ही कैंट थाने में आरोपियों के खिलाफ साजिश के तहत कूटरचित दस्तावेज तैयार कर जालसाजी करने का केस दर्ज करा दिया।
 
एसटीएफ कैंट इलाके के रानीडीहा में फोटो स्टूडियो संचालक की तलाश में जुटी है। जांच एजेंसी के मुताबिक फोटो स्टूडियो संचालक भी परीक्षा की धांधली वाले वाले गिरोह से जुड़ा था। वह अभ्यर्थी की जगह परीक्षा देने वाले सॉल्वर का फर्जी प्रवेश पत्र और आधार कार्ड बनाता था।

फर्जीवाड़े में शामिल बिहार के रोहतास के विक्रमपुर के धारूपुर गांव का रहने वाला महेंद्र सिंह खोराबार क्षेत्र में किराए पर कमरा लेकर रहता था। एसटीएफ को महेंद्र के पास से जो डायरी मिली है, उसमें  65 अभ्यर्थियों के नाम हैं। इन सबको ई-परीक्षा केंद्र जंगल धूसड़ और नौसड़ स्थित स्वास्तिक ऑनलाइन केंद्र पर परीक्षा देनी थी। अब एसटीएफ सबकी कुंडली खंगाल रही है। पांच और सॉल्वरों की तलाश चल रही है।

कंप्यूटर सेंटर कर्मियों की मिलीभगत से गड़बड़ी

ऑनलाइन परीक्षा के लिए बने कंप्यूटर संस्थानों के कर्मचारियों से मिलीभगत करके गड़बड़ी की गई है। एसटीएफ की जांच रिपोर्ट के मुताबिक फर्जीवाड़े में ई-परीक्षा टेक्निकल कैंपस जंगल धूसड़ के कर्मचारी जयप्रकाश की भूमिका पाई गई है। इसी तरह की भूमिका स्वास्तिक ऑनलाइन सेंटर नौसड़ के कर्मचारी विकास सिंह की भी रही है। दोनों को गिरफ्तार करके जेल भेजा गया है। एसटीएफ के मुताबिक इन ऑनलाइन केंद्रों की परीक्षा में धांधली की रिपोर्ट पहले भी मिल चुकी है। इस बार पूरी रिपोर्ट एसटीएफ मुख्यालय भेजी जा रही है। इस तरह की धांधली में शामिल कंप्यूटर संस्थान संचालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। नौसड़ के स्वास्तिक ऑनलाइन सेंटर में काम करने वाली युवती की भी तलाश चल रही है।     
 
बांसगांव का अच्युतानंद भागा
नौसड़ के स्वास्तिक सेंटर से गिरफ्तार विकास सिंह ने एसटीएफ की पूछताछ में कई राज उगले हैं। विकास ने बताया है कि बासंगांव के डोनखर वार्ड नंबर-5 का रहने वडाला अच्युतानंद यादव भी सॉल्वर गैंग से जुड़ा है। वह भाग निकला है। अच्युतानंद ने राहुल यादव की जगह सॉल्वर बैठाने के लिए 50 हजार रुपये लिए थे।
 
यह है पूरा मामला
एसटीएफ ने शुक्रवार देर रात दिल्ली पुलिस भर्ती की ऑनलाइन परीक्षा में गड़बड़ी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया था। एसटीएफ ने कैंट क्षेत्र के पैड़लेगंज से सासाराम (बिहार) के रहने वाले गिरोह के सरगना महेंद्र सिंह, दो सॉल्वर समेत 12 लोगों को गिरफ्तार किया था। बिहार, गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, संतकबीरनगर, प्रयागराज, इटावा और औरैया के रहने वाले आरोपितों के कब्जे से 12 हजार रुपये, 11 मोबाइल फोन, 14 आधार कार्ड, एक डायरी, छह कूट रचित प्रवेश पत्र, 44 मोबाइल के स्क्रीन शॉट, हार्ड कापी और छह  बाइक बरामद हुई थीं।
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