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गोरखपुर: धान क्रय केंद्र प्रभारियों ने दी कार्य बहिष्कार की चेतावनी, सौंपा ज्ञापन

Sat, 01 Jan 2022 11:18 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sat, 01 Jan 2022 11:18 AM IST
सार

यूपी फूड एंड सिविल सप्लाइज इंस्पेक्टर्स, ऑफिसर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने संभागीय खाद्य नियंत्रक को सौंपा ज्ञापन।

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Paddy purchasing center in-charge warned of boycott
धान क्रय केंद्र। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

धान खरीद में आ रही समस्याओं के समाधान के लिए शुक्रवार को यूपी फूड एंड सिविल सप्लाइज इंस्पेक्टर्स, ऑफिसर्स एसोसिएशन के पदाधिकारी संभागीय खाद्य नियंत्रक (आरएफसी) से मिले। इस दौरान ज्ञापन सौंपकर उन्होंने समस्याओं से अवगत कराया। इस मामले में उचित पहल न होने पर धान क्रय केंद्र प्रभारियों द्वारा कार्य का बहिष्कार करने की चेतावनी दी। वहीं  संभागीय खाद्य नियंत्रक ने समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया है।

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आरएफसी से मिलने पहुंचे पदाधिकारियों की अगुवाई कर रहे मंडलीय संरक्षक नरसिंह प्रसाद सिंह का कहना था कि शासन ने धान खरीद नीति की निर्धारित प्रक्रिया में कुछ जटिलताएं बढ़ा दी हैं, जिसके कारण क्रय केंद्र प्रभारियों को किसानों के गुस्से का शिकार होना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि राइस मिलर्स को धान भेजने की जटिल ऑनलाइन प्रक्रिया समाप्त करने या धान खरीद केंद्रों की भंडारण क्षमता निर्धारित करने की मांग की गई।
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किसी भी क्रय केंद्र पर धान के सुरक्षित भंडारण की व्यवस्था नहीं होने पर चिंता व्यक्त की गई। उन्होंने बताया कि क्रय केंद्रों को 50 प्रतिशत बोरे राइस मिलर्स उपलब्ध कराते हैं। बीते वर्षों में बोरों का भुगतान नहीं किए जाने के कारण इस वर्ष राइस मिलर्स बोरे नहीं दे रहे हैं। समस्या से प्रशासनिक अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। ज्ञापन देने वालों में विनय कुमार दुबे, दीपक कुमार शुक्ला, अनुज सिंह, पवन कुमार पांडेय, राघवेंद्र शाही आदि शामिल हैं।

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कोरोना के मद्देनजर फ्रंटलाइन वर्कर घोषित करने की मांग

कोरोना संक्रमण के मद्देनजर धान क्रय से जुड़े सप्लाई इंस्पेक्टर, ऑफिसर्स को फ्रंटलाइन वर्कर घोषित करने की मांग की गई। इसके अलावा क्रय केंद्र प्रभारियों को बूस्टर डोज लगवाने, संक्रमित होने पर कैशलेस इलाज की सुविधा और मृत्यु की स्थिति में 50 लाख रुपये कोरोना बीमा कवर देने की मांग की गई। वहीं कैडर को दो वर्ष में कम से कम एक माह का प्रशिक्षण देने के बाद ही ऑनलाइन टोकन व्यवस्था को शुरू करने का आग्रह किया गया।

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