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गोरखपुर: 90 तालाब-पोखरों में मात्र तीन की ही खोज-खबर, अतिक्रमण को लेकर हुई थी शिकायत

Wed, 14 Jun 2023 02:35 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 14 Jun 2023 02:35 PM IST
सार

सदर तहसीलदार विकास कुमार सिंह ने कहा कि ताल पोखरों के संबंध में जानकारी ली जाएगी। पूर्व में क्या कार्रवाई हुई है। इसको अपडेट कराया जाएगा। इसकी पूरी जानकारी लेकर ही कुछ कह पाएंगे।

 

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Out of 90 ponds and puddles only three were discovered
असुरन पोखरा। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

प्रदेश सरकार की ओर अमृत सरोवर योजना के लिए ताल पोखरों को संरक्षित किया जा रहा है। लेकिन, शहर के भीतर अधिकांश ताल-पोखरे अब लापता हो चुके हैं। नगर निगम क्षेत्र में करीब 90 तालाब और पोखरे हैं, जिनमें से महज तीन की खोज-खबर जिला प्रशासन ले पाया है। खरैया पोखरा, गंगा नगर और सुमेर सागर की तलाश करके नगर निगम और जीडीए सुंदरीकरण की प्रक्रिया में जुटा है, लेकिन अन्य की तलाश नहीं की जा रही है।

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शहर के सुमेर सागर पोखरे को रामगढ़ताल की तरह विकसित करने के लिए जीडीए ने योजना तैयार की है। नगर निगम की ओर से खरैया पोखरे का कब्जा हटवाकर उसे सुरक्षित किया गया है। भेड़ियागढ़ पोखरा पर हुए अवैध निर्माण कार्य के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया दो साल से चल रही है।
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इसके अलावा राप्तीनगर के गंगा नगर पोखरे, मानबेला में झुंगिया पोखरा ओर इंजीनियरिंग कॉलेज क्षेत्र में भैरोपुर पोखरे का चयन अमृत सरोवर योजना में किया गया था। लेकिन, अन्य पोखरों और तालाबों के बारे की कोई सुधि नहीं ली गई। बताया जाता है कि यदि छानबीन हो तो अन्य ताल- पोखरे भी सामने आएंगे।
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ताल पोखरे होते तो नहीं होता जलभराव

शहर क्षेत्र में ताल पोखरों का अतिक्रमण होने की वजह से जलभराव की नौबत आई है। जानकारों का कहना है कि मोहल्लों में प्राकृतिक जल संग्रह होने से बरसात का पानी उसमें चला जाता था। अतिक्रमण होने की वजह से सभी पट गए हैं, इसलिए जलभराव की नौबत आ जाती है। बारिश का पानी इकट्ठा होने से भूमि जल संरक्षण होता था। गर्मियों में वायुमंडल ठंडा रखने में मदद करते थे। साथ ही मिट्टी में नमी बनी रहती थी। पशुओं के लिए पीने का पानी उपलब्ध हो जाता था।

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इनकी इतनी हैं जमीनें, अतिक्रमण की जद में अधिकांश हिस्सा

गोरखपुर शहर के प्रमुख तालाबों, पोखरों और गड़ही की अधिकांश भूमि पर अतिक्रमण हो चुका है। इसमें शामिल भेड़ियागढ़ 3.820 हेक्टयेर में फैला हुआ है। तकिया कवलहदह 0.020 हेक्टेयर, ताल सुमेर सागर 0.781 हेक्टेयर, पुर्दिलपुर 0.179 हेक्टेयर, दिलेजाकपुर 0.898 हेक्टेयर, बशारतपुर 0.894 हेक्टेयर, घोषीपुर 0.054 हेक्टेयर, अलीनगर सुमली 0.333 हेक्टेयर, जंगल शिवपुर उर्फ साहबगंज 0.283 हेक्टेयर और खूनीपुर 1.406 हेक्टेयर भूमि शामिल है। इनके अलावा अन्य भी अतिक्रमण की जद में हैं।

सदर तहसीलदार विकास कुमार सिंह ने कहा कि ताल पोखरों के संबंध में जानकारी ली जाएगी। पूर्व में क्या कार्रवाई हुई है। इसको अपडेट कराया जाएगा। इसकी पूरी जानकारी लेकर ही कुछ कह पाएंगे।

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