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जानें डेढ़ सौ साल पुराने टाउन एरिया का इतिहास, अब मिला नगर पालिका परिषद का दर्जा
Fri, 03 Jan 2020 03:01 PM IST
विजय जैन
गुफरान अहमद कूंज, अमर उजाला, सिसवा बाजार।
गुफरान अहमद कूंज, अमर उजाला, सिसवा बाजार।
Published by: विजय जैन
Updated Fri, 03 Jan 2020 03:01 PM IST
सार
- टाउन एरिया पहले प्रशासक एम.जॉन रहे
- 1871 में इस टाउन एरिया का गठन किया गया था
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टाउन एरिया को अब नगर पालिका परिषद का दर्जा मिला
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
डेढ़ सौ साल पुराने टाउन एरिया को अब नगर पालिका परिषद का दर्जा मिल गया है। अंग्रेजों द्वारा 1871 में इस टाउन एरिया का गठन किया गया था। जिसके पहले प्रशासक अंग्रेज अधिकारी एम जॉन बनाये गए। उसके बाद जमीदार परिवार के लोगों ने आज़ादी के पहले तक प्रशासक के रूप में अपनी सेवाएं दी।
आज़ादी के बाद टाउन एरिया एक्ट के तहत चुनाव कराया गया। जिसमें 1953 में पहली बार सिसवा इस्टेट के नवल किशोर सिंह अध्यक्ष बने। अब तक बारह अध्यक्षों ने अपनी सेवाएं दी है।
1872 से 1953 तक जमींदार परिवार के कंचन सिंह, राम प्रसाद सिंह ठाकुर नवल किशोर सिंह प्रशासक रहे। 1957 से 1961 तक हरिराम कमानी ने अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाली। 1962 से 1972 तक शिव कुमार सिंह, दिवाकर पांडेय, रामचंद्र पूरी ,गोकरन प्रसाद ने सेवाएं दी। 1972 में शारदा प्रसाद जायसवाल चुन कर आए। 1977 तक अध्यक्ष पद पर बने रहे। उसके बाद 11 साल तक प्रशासक के हाथों में नगर पंचायत की बाग डोर रही। 1988 के चुनाव में पुनः शारदा प्रसाद निर्वाचित हो कर अध्यक्ष बन गए और 1993 तक रहे।
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कार्यकाल समाप्त होने के बाद चुनाव में देरी हुई और दो साल तक पुनः प्रशासक कार्यकाल रहा। 1995 के चुनाव में उमेश पूरी ने विजय हासिल की। 2000 के चुनाव में शारदा प्रसाद तीसरी बार पुनः अध्यक्ष पद के लिए निर्वाचित हो गए। 2002 में शारदा प्रसाद की लंबी बीमारी के कारण निधन हो गया। उसके बाद रिक्त हुए अध्यक्ष पद के लिये मध्यावधि चुनाव कराया गया जिसमें सिसवा के आयकर अधिवक्ता जगदीश प्रसाद जायसवाल निर्वाचित हुए और 2005 तक रहे। उसके बाद प्रभावती देवी निर्वाचित हो कर 2011 तक अध्यक्ष रही।
2012 में अशोक जायसवाल जीते और 2017 तक नगर पंचायत अध्यक्ष बने रहे। 2018 के चुनाव में रागिनी जायसवाल नगर पंचायत का बागडोर संभाला।
सिसवा विधायक प्रेमसागर पटेल ने बताया कि जनता के किए वादे को पूरा किया। अब सिसवा कस्बे के विकास को गति मिलेगी। साथ ही नगर पालिका में शामिल गांव को नगरीय सुविधा जल्दी मिलेगी।
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आज़ादी के बाद टाउन एरिया एक्ट के तहत चुनाव कराया गया। जिसमें 1953 में पहली बार सिसवा इस्टेट के नवल किशोर सिंह अध्यक्ष बने। अब तक बारह अध्यक्षों ने अपनी सेवाएं दी है।
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1872 से 1953 तक जमींदार परिवार के कंचन सिंह, राम प्रसाद सिंह ठाकुर नवल किशोर सिंह प्रशासक रहे। 1957 से 1961 तक हरिराम कमानी ने अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाली। 1962 से 1972 तक शिव कुमार सिंह, दिवाकर पांडेय, रामचंद्र पूरी ,गोकरन प्रसाद ने सेवाएं दी। 1972 में शारदा प्रसाद जायसवाल चुन कर आए। 1977 तक अध्यक्ष पद पर बने रहे। उसके बाद 11 साल तक प्रशासक के हाथों में नगर पंचायत की बाग डोर रही। 1988 के चुनाव में पुनः शारदा प्रसाद निर्वाचित हो कर अध्यक्ष बन गए और 1993 तक रहे।
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कार्यकाल समाप्त होने के बाद चुनाव में देरी हुई और दो साल तक पुनः प्रशासक कार्यकाल रहा। 1995 के चुनाव में उमेश पूरी ने विजय हासिल की। 2000 के चुनाव में शारदा प्रसाद तीसरी बार पुनः अध्यक्ष पद के लिए निर्वाचित हो गए। 2002 में शारदा प्रसाद की लंबी बीमारी के कारण निधन हो गया। उसके बाद रिक्त हुए अध्यक्ष पद के लिये मध्यावधि चुनाव कराया गया जिसमें सिसवा के आयकर अधिवक्ता जगदीश प्रसाद जायसवाल निर्वाचित हुए और 2005 तक रहे। उसके बाद प्रभावती देवी निर्वाचित हो कर 2011 तक अध्यक्ष रही।
2012 में अशोक जायसवाल जीते और 2017 तक नगर पंचायत अध्यक्ष बने रहे। 2018 के चुनाव में रागिनी जायसवाल नगर पंचायत का बागडोर संभाला।
सिसवा विधायक प्रेमसागर पटेल ने बताया कि जनता के किए वादे को पूरा किया। अब सिसवा कस्बे के विकास को गति मिलेगी। साथ ही नगर पालिका में शामिल गांव को नगरीय सुविधा जल्दी मिलेगी।