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Gorakhpur News: राम वन गमन का वर्णन सुनकर भावुक हुए श्रद्धालु
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डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के शाहपुर स्थित समयमाता मंदिर पर आयोजित संगीतमय श्रीराम कथा में छठवें
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समयमाता मंदिर पर कथावाचक पंडित राकेश शास्त्री ने सुनाई संगीतमय श्रीराम कथा
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के शाहपुर स्थित समयमाता मंदिर पर आयोजित संगीतमय श्रीराम कथा में छठवें दिन रविवार की रात कथावाचक पं. राकेश शास्त्री ने श्रीराम सीता विवाह से लेकर राम वन गमन का प्रसंग सुनाया। राम वनगमन का वर्णन सुनकर उपस्थित श्रद्धालु भावुक हो गए।
कथा वाचक पंडित राकेश शास्त्री ने कहा कि भगवान राम, मां सीता और सभी भाइयों के विवाह के बाद अवध में आ जाते हैं। महाराज दशरथ गुरु से आज्ञा लेकर राम को युवराज बनाने की घोषणा करते हैं। पूरे अयोध्या में खुशी छा जाती है। सभी देवता यह जानकर परेशान हो जाते हैं कि अगर राम का राज्याभिषेक हो जाएगा तो राक्षसों का वध कैसे होगा। मां सरस्वती से सभी प्रार्थना करते हैं और सरस्वती जी मंथरा की बुद्धि को पलट देती हैं। वह कैकेयी को अपने दो वरदान राजा दशरथ से मांगने के लिए कहती हैं।
कैकेयी कोपभवन में चली जाती है और दशरथ से दो वरदान मांगती है कि भरत को राज्य और राम को वनवास। राजा दशरथ अचेत हो जाते हैं। रामजी लक्ष्मण और सीता के साथ वन को चले जाते हैं। श्रीराम वन गमन का वर्णन सुनकर श्रद्धालु भावुक हो गए। इस दौरान आयोजक बबुआ सिंह, मनजीत, धनीराम बाबा, त्यागी, राजन, शुभम, गोलू, गिरीश आदि मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के शाहपुर स्थित समयमाता मंदिर पर आयोजित संगीतमय श्रीराम कथा में छठवें दिन रविवार की रात कथावाचक पं. राकेश शास्त्री ने श्रीराम सीता विवाह से लेकर राम वन गमन का प्रसंग सुनाया। राम वनगमन का वर्णन सुनकर उपस्थित श्रद्धालु भावुक हो गए।
कथा वाचक पंडित राकेश शास्त्री ने कहा कि भगवान राम, मां सीता और सभी भाइयों के विवाह के बाद अवध में आ जाते हैं। महाराज दशरथ गुरु से आज्ञा लेकर राम को युवराज बनाने की घोषणा करते हैं। पूरे अयोध्या में खुशी छा जाती है। सभी देवता यह जानकर परेशान हो जाते हैं कि अगर राम का राज्याभिषेक हो जाएगा तो राक्षसों का वध कैसे होगा। मां सरस्वती से सभी प्रार्थना करते हैं और सरस्वती जी मंथरा की बुद्धि को पलट देती हैं। वह कैकेयी को अपने दो वरदान राजा दशरथ से मांगने के लिए कहती हैं।
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कैकेयी कोपभवन में चली जाती है और दशरथ से दो वरदान मांगती है कि भरत को राज्य और राम को वनवास। राजा दशरथ अचेत हो जाते हैं। रामजी लक्ष्मण और सीता के साथ वन को चले जाते हैं। श्रीराम वन गमन का वर्णन सुनकर श्रद्धालु भावुक हो गए। इस दौरान आयोजक बबुआ सिंह, मनजीत, धनीराम बाबा, त्यागी, राजन, शुभम, गोलू, गिरीश आदि मौजूद रहे।
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