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Gorakhpur News: अब वाशिंग पिट में भी जनरेटर की जगह हो रहा बिजली का प्रयोग
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- ट्रेनों की धुलाई के दौरान लगातार हाई स्पीड डीजल से चलता था जनरेटर
- 740 वोल्ट विद्युत उपकरणों के प्रयोग से रेलवे को हुआ फायदा
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन ने एलएचबी (लिंक हाफमैन बुश) रेकों के पिट अनुरक्षण के दौरान जेनरेटर सेट के स्थान पर 750 वोल्ट विद्युत आपूर्ति का प्रयोग शुरू किया है। जेनरेटर सेट के स्थान पर विद्युत आपूर्ति का उपयोग करने से व्यय में कमी आई है। साथ ही इससे प्रदूषण भी कम हो रहा है।
सीपीआरओ पंकज कुमार सिंह ने बताया कि अभी तक एलएचबी रेकों के पिट अनुरक्षण के दौरान जेनरेटर सेट का प्रयोग होता था। एलएचबी रेक के पिट अनुरक्षण कार्य में अधिक समय लगता है। इस वजह से जेनरेटर सेट में हाईस्पीड डीजल (एचएसडी) की खपत भी अधिक होती थी। इसकी जगह अब पूर्वोत्तर रेलवे के 21 वाशिंग पिटों पर एलएचबी कोचों के अनुरक्षण का कार्य 750 वोल्ट विद्युत आपूर्ति से किया जा रहा है। इससे 1211.429 किलो लीटर हाई स्पीड डीजल की बचत हुई है।
इससे वित्त वर्ष 2023-24 में 11.15 करोड़ के रेल राजस्व की बचत हुई है। इसके अलावा 63 जोड़ी ट्रेनों को 85 रेकों में हेड ऑन जेनरेशन (एचओजी) तकनीकी का उपयोग किया जा रहा है, जिससे 17326.391 किलो लीटर हाईस्पीड डीजल की बचत हुई है। इससे वित्त वर्ष 2023-24 में 159.50 करोड़ के रेल राजस्व की बचत हुई है।
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- 740 वोल्ट विद्युत उपकरणों के प्रयोग से रेलवे को हुआ फायदा
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन ने एलएचबी (लिंक हाफमैन बुश) रेकों के पिट अनुरक्षण के दौरान जेनरेटर सेट के स्थान पर 750 वोल्ट विद्युत आपूर्ति का प्रयोग शुरू किया है। जेनरेटर सेट के स्थान पर विद्युत आपूर्ति का उपयोग करने से व्यय में कमी आई है। साथ ही इससे प्रदूषण भी कम हो रहा है।
सीपीआरओ पंकज कुमार सिंह ने बताया कि अभी तक एलएचबी रेकों के पिट अनुरक्षण के दौरान जेनरेटर सेट का प्रयोग होता था। एलएचबी रेक के पिट अनुरक्षण कार्य में अधिक समय लगता है। इस वजह से जेनरेटर सेट में हाईस्पीड डीजल (एचएसडी) की खपत भी अधिक होती थी। इसकी जगह अब पूर्वोत्तर रेलवे के 21 वाशिंग पिटों पर एलएचबी कोचों के अनुरक्षण का कार्य 750 वोल्ट विद्युत आपूर्ति से किया जा रहा है। इससे 1211.429 किलो लीटर हाई स्पीड डीजल की बचत हुई है।
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इससे वित्त वर्ष 2023-24 में 11.15 करोड़ के रेल राजस्व की बचत हुई है। इसके अलावा 63 जोड़ी ट्रेनों को 85 रेकों में हेड ऑन जेनरेशन (एचओजी) तकनीकी का उपयोग किया जा रहा है, जिससे 17326.391 किलो लीटर हाईस्पीड डीजल की बचत हुई है। इससे वित्त वर्ष 2023-24 में 159.50 करोड़ के रेल राजस्व की बचत हुई है।
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