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UP: खून के छींटों से मिला घर का रास्ता... अपनी करतूत और पहचान छुपाई; बेगुनाह मासूम की ठंड से गई जान

Wed, 04 Dec 2024 01:50 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर Published by: शाहरुख खान Updated Wed, 04 Dec 2024 01:50 PM IST
सार

गोरखपुर के एक गांव में झाड़ियों में नवजात बच्ची को देखकर महिलाओं ने उसे बाहर निकाला। खून के छींटे के आधार पर एक घर में महिलाएं पहुंचीं तो पता चला कि अविवाहित 19 वर्षीय युवती ने ही बच्ची को जन्म दिया था।

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Newborn baby thrown in bushes in Gorakhpur way home was found through blood stains
नवजात को झाड़ियों में फेंका - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अपनी करतूत और पहचान छिपाने के लिए वह कर दिया, जिससे एक बेगुनाह मासूम की जान चली गई। मामला गोरखपुर के बांसगांव थाना इलाके के एक गांव का है। सोमवार भोर में झाड़ियों में फेंकी गई नवजात बच्ची मिली। 
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उधर से गुजर रहीं गांव की महिलाएं रोने की आवाज सुनकर वहां पहुंचीं और उसे उठा लिया। शंका के आधार पर एक घर में गईं तो पता चला कि नवजात को 19 साल की अविवाहित युवती ने जन्म दिया है। 
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युवती की हालत खराब देखकर किसी ने पुलिस को सूचना दे दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने जच्चा-बच्चा को अस्पताल में भर्ती कराया। युवती के परिजनों के अनुसार, लोकलाज के डर से नवजात को प्रसव के बाद फेंक दिया था। 
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जानकारी के मुताबिक, युवती का गांव के ही एक स्वजातीय युवक से संबंध था। इस बारे में युवती के परिजनों को जानकारी नहीं थी। युवती के गर्भवती होने पर परिजनों को जानकारी हुई तो उसे घर में कैद कर दिया। 
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नौ माह बाद सोमवार को युवती के पेट में दर्द उठने पर परिजनों ने घर पर ही प्रसव कराया। इसके बाद परिजन ठंड में नवजात को बिना कपड़ों के ही गांव में झाड़ियों में फेंक दिया। पुलिस ने मां और बच्चे को पीएचसी पर भर्ती कराया, जहां से उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। 

 

बांसगांव पुलिस ने मामले में एक युवक से पूछताछ की है। पुलिस का कहना है कि परिजन अभी अस्पताल में हैं। तहरीर देते हैं तो आगे कार्रवाई की जाएगी। पुलिस को युवती ने बताया कि घर पर जब परिजनों को पता चला कि वह गर्भवती है तो कई बार उसे मारने का प्रयास किया गया। 

 

एक जानकार ने बताया कि बच्चे पर खतरा होने पर मां के जीवन पर संकट आ सकता है। तब पेट छुपाने के लिए चार माह तक घर से बाहर नहीं निकली। रविवार रात उसे दर्द शुरू हो गया। प्रसव के बाद बच्ची को देख भी नहीं पाई थी। बच्ची ने इलाज के दौरान मंगलवार भोर में दम तोड़ दिया। 
 

खून के छींटों से मिला घर का रास्ता
बांसगांव में जन्म के बाद ही नवजात बच्ची को पांच फीट ऊंचाई से झाड़ियों में फेंक दिया गया। दर्द से तड़पती बच्ची इस ठंड में करीब एक घंटे तक झाड़ियों में रोती रही। शुक्र था कि जानवरों से पहले इंसान की नजर उसपर पड़ गई। जिला अस्पताल में नवजात और उसकी मां को इलाज के लिए भर्ती कराया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। 

सोमवार भोर में पांच बजे गांव की कुछ महिलाओं ने झाड़ी में रोने की आवाज सुनी। देखा तो नवजात बच्ची रो रही थी। महिलाओं ने बच्ची को उठाया। इसी दौरान उनकी नजर अचानक खून के छींटों पर पड़ी। इसके आधार पर वह आगे बढ़ीं तो एक घर के पास खून से ही सने कुछ कपड़े फेंके हुए नजर आए। अंदर जाकर पूछा तो एक महिला ने पहले तो इनकार कर दिया। थोड़ी देर बाद नवजात को स्वीकार कर अपने साथ ले गई। इस बीच किसी ने पुलिस को सूचना दे दी। पुलिस घर में गई तो एक युवती बिस्तर पर लेटी थी। उसे रक्तस्राव हो रहा था। मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों को पीएचसी पहुंचाया। यहां से डॉक्टरों ने जिला अस्पताल रेफर कर दिया।
 

इस संबंध में एसपी दक्षिणी जितेंद्र कुमार तोमर ने बताया कि एक गांव में ऐसा मामला सामने आया है। जच्चा-बच्चा का इलाज कराया जा रहा है। कहीं कोई परेशानी न आए पुलिस भी निगरानी कर रही है। परिजन तहरीर देंगे तो आरोपी युवक पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

 

पहले भी मिले हैं ऐसे कई मामले
26 नवंबर: पीपीगंज-जसवल मार्ग पर एक नवजात बच्ची मिली। परिजन के न मिलने पर पुलिस ने चाइल्ड लाइन को सौंप दिया।
7 अगस्त : कोतवाली क्षेत्र में सड़क किनारे फेंका गया मृत नवजात मिला। शवा को कुत्तों ने नोच खाया था।
28 नवंबर : गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर मिला नवजात। पुलिस ने नवजात को चाइल्डलाइन को सौंप दिया।
 

आज भी भारतीय समाज में लोक-लाज और परंपरा का महत्व है। सामाजिक प्रतिमान और मूल्यों के विपरीत व्यवहार होने पर उसके परिणाम दुःखद स्थिति भी उत्पन्न करते हैं। सही समाजीकरण न होने से कई बार युवा पीढ़ी के लोग सामाजिक आदर्श के विपरीत आचरण तो कर जाते है, लेकिन उनका सामना करने का नैतिक साहस या आत्मबल उनमें नहीं होता है। इसी कारण से ऐसी वीभत्स घटनाएं प्रकाश में आती हैं।- डॉ. मनीष पांडेय, समाजशास्त्री
 
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