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Gorakhpur News: बीआरडी मेडिकल कॉलेज कैंपस में ही बनेगा नया ट्राॅमा सेंटर
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शासन ने 150 बेड वाले लेवन वन ट्राॅमा सेंटर बनाने को दी मंजूरी
नए ट्राॅमा सेंटर में 50 बेड का आईसीयू और 100 बेड क्रिटिकल केयर के होंगे
गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल काॅलेज कैंपस में ही नया ट्रॉमा सेंटर बनाया जाएगा। यह ट्रॉमा सेंटर कॉलेज के टीबी अस्पताल के पास ही बनेगा। इसके लिए जो भवन इस्तेमाल नहीं हो रहे हैं, उन्हें तोड़ा जाएगा। बाहर जमीन नहीं मिलने की वजह से इसे मेडिकल कॉलेज परिसर में बनाने का निर्णय लिया गया है। कुल 150 बेड वाला यह ट्रॉमा सेंटर लेवल वन का होगा। वहीं पुराने ट्रामा सेंटर को इमरजेंसी ट्रामा सेंटर बनाया जाएगा और इसमें एक प्रोफेसर और तीन असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्ति होगी।
नया ट्रॉमा सेंटर दो हजार वर्ग मीटर में बनेगा। 150 बेड वाले इस ट्राॅमा सेंटर में 50 बेड आईसीयू के होंगे। जबकि, 100 बेड क्रिटिकल केयर के होंगे, जिन पर ऑक्सीजन, सक्सन और मॉनिटर की सुविधा होगी। पर्याप्त डाॅक्टरों और स्टाफ के साथ ट्राॅमा सेंटर में सीटी स्कैन, एमआरआई, सी-आर्म, अल्ट्रासाउंड, एक्सरे मशीनें भी लगाई जाएंगी। इसके अलावा विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती भी की जाएगी। पुराने ट्रामा सेंटर न विशेषज्ञ डॉक्टर हैं और न ही पर्याप्त संख्या में मशीनें।
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पुराने ट्राॅमा सेंटर से हर दिन आठ से 10 मरीज होते हैं रेफर
बीआरडी मेडिकल काॅलेज के ट्रामा सेंटर की हालत बेहद खराब है। ट्राॅमा सेंटर में आईसीयू को छोड़कर 30 बेड इमरजेंसी के हैं। इनमें सर्जरी, आर्थो और पीओपी के 10-10 वार्ड शामिल हैं। पीओपी वार्ड में ऑपरेशन के बाद मरीजों को भर्ती किया जाता है। इसी वार्ड को 15 नंबर वार्ड भी कहा जाता है। जबकि, ट्रामा सेंटर में 10 बेड का आईसीयू है। इसमें केवल छह बेड पर ही वेंटीलेटर हैं। एक मशीन न होने से ट्राॅमा आईसीयू में नौ बेड इस वक्त संचालित है। जबकि, पुरानी इमरजेंसी में छह बेड आईसीयू और मेडिसिन में 20 बेड आईसीयू के हैं। इन आईसीयू में हर वक्त मरीज भर्ती रहते हैं। इसकी वजह से हर दिन आठ से 10 मरीजों को ट्रॉमा सेंटर से रेफर करना पड़ता है।
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हर दिन 50 से 60 मरीज इलाज के लिए आ रहे
बीआरडी मेडिकल काॅलेज में इस समय 40 बेड का ट्राॅमा सेंटर है। यह लेवल-दो का है। इसमें 10 बेड आईसीयू के हैं। एक आपरेशन थियेटर है। इसमें सर्जरी और आर्थाे की टीम रहती है। जबकि, बीआरडी मेडिकल कॉलेज के ट्राॅमा सेंटर में प्रतिदिन 50 से 60 मरीज इलाज के लिए आते हैं। इनमें सर्जरी, आर्थो, मेडिसिन और न्यूरो सर्जरी के मरीज सबसे अधिक हैं। इनमें न्यूरो सर्जरी के 80 से 90 फीसदी मरीजों को रेफर करना पड़ता है। क्योंकि, इमरजेंसी में न्यूरो सर्जरी की टीम नहीं बैठती है। जबकि, अब तक सुपर स्पेशियलिटी में इमरजेंसी सेवा की शुरुआत भी नहीं की गई है।
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सर्जरी और आर्थाें के अलावा ट्रॉमा में नहीं बैठते हैं अन्य विशेषज्ञ डॉक्टर
ट्राॅमा सेंटर में हर तरह के मरीज इलाज के लिए आते हैं। लेकिन, इसके बाद भी यहां पर विशेषज्ञ डॉक्टरों की पूरी टीम नहीं बैठती है। इस मामले की शिकायत भी हो चुकी है। इसके बाद भी केवल सर्जरी और आर्थाे के डॉक्टर ट्रॉमा में बैठते हैं। जबकि, नियम के तहत मेडिसिन, स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ, बाल रोग, न्यूरो की टीम ट्रॉमा सेंटर में बैठनी चाहिए, जिससे की मरीजों को एक ही छत के नीचे सभी विशेषज्ञ मिल सके।
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मेडिकल कालेज में लेवल वन का ट्राॅमा सेंटर के निर्माण की मंजूरी मिल गई है। कैंपस में ही नया ट्रॉमा सेंटर बनाया जाएगा। कैंपस में जमीन पर्याप्त है। नया ट्राॅमा सेंटर बन जाने से मरीजों को रेफर करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसके अलावा पुराने ट्रॉमा सेंटर में मेडिसिन, सर्जरी, गायनी की टीम को बैठने के निर्देश दिए गए हैं। समय-समय पर इसकी जांच के लिए औचक निरीक्षण किया जाएगा।
डॉ. गणेश कुमार, प्राचार्य, बीआरडी मेडिकल कॉलेज
नए ट्राॅमा सेंटर में 50 बेड का आईसीयू और 100 बेड क्रिटिकल केयर के होंगे
गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल काॅलेज कैंपस में ही नया ट्रॉमा सेंटर बनाया जाएगा। यह ट्रॉमा सेंटर कॉलेज के टीबी अस्पताल के पास ही बनेगा। इसके लिए जो भवन इस्तेमाल नहीं हो रहे हैं, उन्हें तोड़ा जाएगा। बाहर जमीन नहीं मिलने की वजह से इसे मेडिकल कॉलेज परिसर में बनाने का निर्णय लिया गया है। कुल 150 बेड वाला यह ट्रॉमा सेंटर लेवल वन का होगा। वहीं पुराने ट्रामा सेंटर को इमरजेंसी ट्रामा सेंटर बनाया जाएगा और इसमें एक प्रोफेसर और तीन असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्ति होगी।
नया ट्रॉमा सेंटर दो हजार वर्ग मीटर में बनेगा। 150 बेड वाले इस ट्राॅमा सेंटर में 50 बेड आईसीयू के होंगे। जबकि, 100 बेड क्रिटिकल केयर के होंगे, जिन पर ऑक्सीजन, सक्सन और मॉनिटर की सुविधा होगी। पर्याप्त डाॅक्टरों और स्टाफ के साथ ट्राॅमा सेंटर में सीटी स्कैन, एमआरआई, सी-आर्म, अल्ट्रासाउंड, एक्सरे मशीनें भी लगाई जाएंगी। इसके अलावा विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती भी की जाएगी। पुराने ट्रामा सेंटर न विशेषज्ञ डॉक्टर हैं और न ही पर्याप्त संख्या में मशीनें।
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पुराने ट्राॅमा सेंटर से हर दिन आठ से 10 मरीज होते हैं रेफर
बीआरडी मेडिकल काॅलेज के ट्रामा सेंटर की हालत बेहद खराब है। ट्राॅमा सेंटर में आईसीयू को छोड़कर 30 बेड इमरजेंसी के हैं। इनमें सर्जरी, आर्थो और पीओपी के 10-10 वार्ड शामिल हैं। पीओपी वार्ड में ऑपरेशन के बाद मरीजों को भर्ती किया जाता है। इसी वार्ड को 15 नंबर वार्ड भी कहा जाता है। जबकि, ट्रामा सेंटर में 10 बेड का आईसीयू है। इसमें केवल छह बेड पर ही वेंटीलेटर हैं। एक मशीन न होने से ट्राॅमा आईसीयू में नौ बेड इस वक्त संचालित है। जबकि, पुरानी इमरजेंसी में छह बेड आईसीयू और मेडिसिन में 20 बेड आईसीयू के हैं। इन आईसीयू में हर वक्त मरीज भर्ती रहते हैं। इसकी वजह से हर दिन आठ से 10 मरीजों को ट्रॉमा सेंटर से रेफर करना पड़ता है।
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हर दिन 50 से 60 मरीज इलाज के लिए आ रहे
बीआरडी मेडिकल काॅलेज में इस समय 40 बेड का ट्राॅमा सेंटर है। यह लेवल-दो का है। इसमें 10 बेड आईसीयू के हैं। एक आपरेशन थियेटर है। इसमें सर्जरी और आर्थाे की टीम रहती है। जबकि, बीआरडी मेडिकल कॉलेज के ट्राॅमा सेंटर में प्रतिदिन 50 से 60 मरीज इलाज के लिए आते हैं। इनमें सर्जरी, आर्थो, मेडिसिन और न्यूरो सर्जरी के मरीज सबसे अधिक हैं। इनमें न्यूरो सर्जरी के 80 से 90 फीसदी मरीजों को रेफर करना पड़ता है। क्योंकि, इमरजेंसी में न्यूरो सर्जरी की टीम नहीं बैठती है। जबकि, अब तक सुपर स्पेशियलिटी में इमरजेंसी सेवा की शुरुआत भी नहीं की गई है।
सर्जरी और आर्थाें के अलावा ट्रॉमा में नहीं बैठते हैं अन्य विशेषज्ञ डॉक्टर
ट्राॅमा सेंटर में हर तरह के मरीज इलाज के लिए आते हैं। लेकिन, इसके बाद भी यहां पर विशेषज्ञ डॉक्टरों की पूरी टीम नहीं बैठती है। इस मामले की शिकायत भी हो चुकी है। इसके बाद भी केवल सर्जरी और आर्थाे के डॉक्टर ट्रॉमा में बैठते हैं। जबकि, नियम के तहत मेडिसिन, स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ, बाल रोग, न्यूरो की टीम ट्रॉमा सेंटर में बैठनी चाहिए, जिससे की मरीजों को एक ही छत के नीचे सभी विशेषज्ञ मिल सके।
मेडिकल कालेज में लेवल वन का ट्राॅमा सेंटर के निर्माण की मंजूरी मिल गई है। कैंपस में ही नया ट्रॉमा सेंटर बनाया जाएगा। कैंपस में जमीन पर्याप्त है। नया ट्राॅमा सेंटर बन जाने से मरीजों को रेफर करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसके अलावा पुराने ट्रॉमा सेंटर में मेडिसिन, सर्जरी, गायनी की टीम को बैठने के निर्देश दिए गए हैं। समय-समय पर इसकी जांच के लिए औचक निरीक्षण किया जाएगा।
डॉ. गणेश कुमार, प्राचार्य, बीआरडी मेडिकल कॉलेज