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Etawah Burning Train: यात्रियों ने बताई आपबीती, चारों तरफ आग और धुआं था; बस समझ लीजिए मौत से बचे

Thu, 16 Nov 2023 12:01 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 16 Nov 2023 12:01 PM IST
सार

देवरिया जिले के तरकुलवा के रहने वाले विजेंद्र भी उसी नई दिल्ली-दरभंगा क्लोन एक्सप्रेस में सवार थे, जिसमें इटावा में बुधवार की शाम को आग लगी थी। तरकुलवा में रहने वाले तरुण ने यात्रा कर रहे भाई विजेंद्र से टेलीफोन पर बात कराई।

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New Delhi Darbhanga Clone Express caught fire in Etawah on Wednesday
Etawah Burning Train - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 बस इतना समझ लीजिए कि मौत सामने थी और हम लोगों को छठ मइया ने बचा लिया। ट्रेन की बोगी जिस तरह से जल रही थी, अगर कुछ मिनट पहले बाहर नहीं निकले होते तो हड्डी की राख ही मिलती। ट्रेन अब कानपुर आ गई है, लेकिन अभी भी डर लग रहा है। बस किसी तरह घर पहुंच जाएं तो जाकर चैन मिलेगा।

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देवरिया जिले के तरकुलवा के रहने वाले विजेंद्र भी उसी नई दिल्ली-दरभंगा क्लोन एक्सप्रेस में सवार थे, जिसमें इटावा में बुधवार की शाम को आग लगी थी। तरकुलवा में रहने वाले तरुण ने यात्रा कर रहे भाई विजेंद्र से टेलीफोन पर बात कराई।
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विजेंद्र ने बताया कि वे जनरल कोच में थे। ट्रेन के स्टेशन पर रुकते ही आग लगने का शोर सुनकर सब डिब्बे से बाहर निकलने लगे। लोग एक दूसरे पर गिरते-पड़ते बाहर निकल रहे थे। मैं बीच में फंसा था, जहां से गेट तक आते-आते लगा कि अब नहीं निकल पाऊंगा। तब तक पीछे से भीड़ ने धक्का दिया और मैं प्लेटफार्म पर गिर पड़ा। उठकर फिर भागा कुछ दूर जाकर पलट कर देखा तो पीछे कोच से लपटें निकलने लगी थीं। मेरा बैग कोच में अंदर ही रह गया।

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विजेंद्र के साथ थावे के सरजू यादव भी थे, जिन्हें गोरखपुर उतरकर यहां से कुशीनगर के रास्ते घर जाना है। छठ के दिन घर में कोशी भरी जानी है, जिसके लिए साड़ी-कपड़े व अन्य सामान खरीदकर चले थे। सारा सामान कोच में ही जल गया। सरजू का कहना था कि छठी मइया की कृपा से जान बच गई, यही बड़ी बात है।

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करीब ढाई घंटे विलंब हो गई ट्रेन

हादसे के चलते यह ट्रेन करीब ढाई घंटे की देरी से चली। इसे गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर रात करीब 12.45 बजे पहुंचना था, लेकिन अब इसके रात में करीब साढ़े तीन बजे पहुंचने की उम्मीद है।


 

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