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Gorakhpur News: खरीफ सीजन में कम पानी वाली फसलें चुनें किसान
Fri, 03 Jul 2026 02:38 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Fri, 03 Jul 2026 02:38 AM IST
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गोरखपुर। मानसूनी हवाएं कमजोर हो जाने से सूखे की स्थिति बनती है। ऐसे में खरीफ के सीजन में किसान कम पानी वाली फसलों को चुन सकते हैं। इससे वे अल नीनो के प्रतिकूल प्रभावों से बच सकेंगे।
यह जानकारी जिला कृषि अधिकारी राज मंगल चौधरी ने दी। उन्होंने बताया कि फसल प्रबंधन और विधिवता के तहत कम पानी वाली फसलों को किसान चुनें, जहां पानी की पर्याप्त मात्रा में उपलब्धता हो वहीं धान की रोपाई करें। धान की फसल डीसीआर पद्धति से लगाएं, इससे 30 से 40 प्रतिशत तक पानी की बचत होती है। जहां पानी की पर्याप्त उपलब्धता नहीं है वहां कम पानी और कम समय (कम अवधि) में पकने वाली फसलों जैसे दलहन (अरहर, मूंग, उड़द). तिलहन (तिल, मूंगफली) और मोटे अनाज (ज्वार, बाजरा) को प्राथमिकता दे सकते हैं।
उन्होंने बताया कि प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक (लगभग 2 डिग्री सेल्सियस) बढ़ जाने से वैश्विक मानसूनी हवाएं कमजोर हो जाती हैं। इसके कारण बारिश कम हो सकती है या लंबे समय तक सूखे की स्थिति बनने की आशंका रहती है। उत्तर प्रदेश में इसका सबसे बड़ा खतरा वर्तमान खरीफ की मुख्य फसलों जैसे धान और मक्का पर पड़ सकता है। अल नीनो के प्रतिकूल प्रभावों से बचने और अपनी फसलों की सुरक्षा के लिए किसानों को उत्पाद में विविधता लानी होगी।
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यह जानकारी जिला कृषि अधिकारी राज मंगल चौधरी ने दी। उन्होंने बताया कि फसल प्रबंधन और विधिवता के तहत कम पानी वाली फसलों को किसान चुनें, जहां पानी की पर्याप्त मात्रा में उपलब्धता हो वहीं धान की रोपाई करें। धान की फसल डीसीआर पद्धति से लगाएं, इससे 30 से 40 प्रतिशत तक पानी की बचत होती है। जहां पानी की पर्याप्त उपलब्धता नहीं है वहां कम पानी और कम समय (कम अवधि) में पकने वाली फसलों जैसे दलहन (अरहर, मूंग, उड़द). तिलहन (तिल, मूंगफली) और मोटे अनाज (ज्वार, बाजरा) को प्राथमिकता दे सकते हैं।
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उन्होंने बताया कि प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक (लगभग 2 डिग्री सेल्सियस) बढ़ जाने से वैश्विक मानसूनी हवाएं कमजोर हो जाती हैं। इसके कारण बारिश कम हो सकती है या लंबे समय तक सूखे की स्थिति बनने की आशंका रहती है। उत्तर प्रदेश में इसका सबसे बड़ा खतरा वर्तमान खरीफ की मुख्य फसलों जैसे धान और मक्का पर पड़ सकता है। अल नीनो के प्रतिकूल प्रभावों से बचने और अपनी फसलों की सुरक्षा के लिए किसानों को उत्पाद में विविधता लानी होगी।
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