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Gorakhpur News: नवरात्र 10 दिन का, हाथी पर आएंगी माता
Sat, 03 Oct 2026 02:43 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Sat, 03 Oct 2026 02:43 AM IST
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गोरखपुर। शारदीय नवरात्र का शुभारंभ 11 अक्तूबर से होगा और 20 अक्तूबर को विजयादशमी को समापन होगा। हाथी पर माता का आगमन, सुख-समृद्धि और अच्छी वर्षा का संकेत माना गया है। वाराणसी के पंचांग के अनुसार, विजयादशमी के दिन माता का गमन मुर्गे पर होगा। इससे लोगों में थोड़ी अशांति हो सकती है।
11 अक्तूबर को सूर्योदय सुबह 6:13 बजे होगा और आश्विन शुक्ल प्रतिपदा तिथि रात 8:37 बजे तक रहेगी। चित्रा नक्षत्र रात 10:49 बजे तक रहेगा। चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग में कलश स्थापना का निषेध माना गया है। ऐसे में अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:36 से दोपहर 12:24 बजे तक कलश स्थापना के लिए विशेष शुभ रहेगा। हालांकि सूर्योदय के बाद से सूर्यास्त 5:47 बजे तक सामान्य रूप से कलश स्थापना की जा सकती है।
17 अक्तूबर को मूल नक्षत्र युक्त सप्तमी तिथि होने के कारण इसी दिन शहर के दुर्गा पूजा पंडालों में मां दुर्गा की प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी। 18 अक्तूबर की रात अष्टमी तिथि होने के कारण इसी रात महानिशा पूजा का विधान रहेगा।
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अष्टमी का व्रत भी 18 को ही होगा, हालांकि अष्टमी तिथि 19 को भी मिल रही है इससे अष्टमी दो दिन की मानी जा रही है। लेकिन नवमी का पूजन भी 19 को होगा, इसी दिन कन्या पूजन व हवन भी होगा। 20 अक्तूबर को भी सुबह नवमी तिथि मिल रही है, इसके बाद व्रत का पारण किया जाएगा। मध्याह्न में श्रवण नक्षत्र युक्त दशमी होने के कारण इसी दिन 20 अक्तूबर को विजयादशमी भी मनाई जाएगी। इस कारण नवरात्र दस दिनों का माना जा रहा है।
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11 अक्तूबर को सूर्योदय सुबह 6:13 बजे होगा और आश्विन शुक्ल प्रतिपदा तिथि रात 8:37 बजे तक रहेगी। चित्रा नक्षत्र रात 10:49 बजे तक रहेगा। चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग में कलश स्थापना का निषेध माना गया है। ऐसे में अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:36 से दोपहर 12:24 बजे तक कलश स्थापना के लिए विशेष शुभ रहेगा। हालांकि सूर्योदय के बाद से सूर्यास्त 5:47 बजे तक सामान्य रूप से कलश स्थापना की जा सकती है।
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17 अक्तूबर को मूल नक्षत्र युक्त सप्तमी तिथि होने के कारण इसी दिन शहर के दुर्गा पूजा पंडालों में मां दुर्गा की प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी। 18 अक्तूबर की रात अष्टमी तिथि होने के कारण इसी रात महानिशा पूजा का विधान रहेगा।
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अष्टमी का व्रत भी 18 को ही होगा, हालांकि अष्टमी तिथि 19 को भी मिल रही है इससे अष्टमी दो दिन की मानी जा रही है। लेकिन नवमी का पूजन भी 19 को होगा, इसी दिन कन्या पूजन व हवन भी होगा। 20 अक्तूबर को भी सुबह नवमी तिथि मिल रही है, इसके बाद व्रत का पारण किया जाएगा। मध्याह्न में श्रवण नक्षत्र युक्त दशमी होने के कारण इसी दिन 20 अक्तूबर को विजयादशमी भी मनाई जाएगी। इस कारण नवरात्र दस दिनों का माना जा रहा है।