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Gorakhpur News: भारतीय ज्ञान परंपरा को पोषण देती हैं संस्कृत एवं पालि
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गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग में मंगलवार को 'भारतीय ज्ञान परंपरा में संस्कृत में पालि साहित्य का अवदान' विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि संस्कृत और पालि भारतीय ज्ञान परंपरा को पोषण देती हैं। मुख्य अतिथि प्रो. रविशंकर सिंह ने कहा कि आधुनिक भाषा का बीज भारतीय ज्ञान परंपरा में निहित है। संस्कृत ज्ञान-विज्ञान की भाषा है। मुख्य वक्ता इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रो. प्रयाग नारायण मिश्र ने कहा कि भारत की दो ही प्रतिष्ठा है संस्कृत और संस्कृति।
विभागाध्यक्ष प्रो. कीर्ति पांडेय ने स्वागत, संगोष्ठी के संयोजक डॉ. देवेंद्र पाल ने विषय प्रवर्तन व डॉ. सूर्यकांत त्रिपाठी ने संचालन किया। समापन सत्र के मुख्य वक्ता प्रो. हर्ष सिन्हा रहे। संचालन डॉ. धर्मेंद्र सिंह ने किया।
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उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि संस्कृत और पालि भारतीय ज्ञान परंपरा को पोषण देती हैं। मुख्य अतिथि प्रो. रविशंकर सिंह ने कहा कि आधुनिक भाषा का बीज भारतीय ज्ञान परंपरा में निहित है। संस्कृत ज्ञान-विज्ञान की भाषा है। मुख्य वक्ता इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रो. प्रयाग नारायण मिश्र ने कहा कि भारत की दो ही प्रतिष्ठा है संस्कृत और संस्कृति।
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विभागाध्यक्ष प्रो. कीर्ति पांडेय ने स्वागत, संगोष्ठी के संयोजक डॉ. देवेंद्र पाल ने विषय प्रवर्तन व डॉ. सूर्यकांत त्रिपाठी ने संचालन किया। समापन सत्र के मुख्य वक्ता प्रो. हर्ष सिन्हा रहे। संचालन डॉ. धर्मेंद्र सिंह ने किया।
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