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Gorakhpur News: खान मुबारक के जरिए मुख्तार खड़ा कर रहा था सिंडिकेट

Sat, 30 Mar 2024 01:03 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 30 Mar 2024 01:03 AM IST
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Mukhtar was setting up a syndicate through Khan Mubarak
गोरखपुर। माफिया मुख्तार अंसारी की मौत के बाद उसके कारनामों की चर्चा सभी जगहों पर हो रही है। पुलिस सूत्रों की मानें तो जेल में बंद होने के बावजूद मुख्तार अंसारी बाहुबली गुरु के बाद खान मुबारक के जरिए पूर्वांचल में वसूली का सिंडिकेट खड़ा कर रहा था। स्पेशल टॉस्क फोर्स (एसटीएफ) ने 6 जून 2021 को गैंगस्टर खान मुबारक के साथी परवेज को मुठभेड़ में मार गिराया था। यह मुठभेड़ गोरखपुर के चिउटहा पुल के पास हुई थी।
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मुठभेड़ के बाद एसटीएफ को जानकारी मिली कि मारा गया यह अपराधी आंबेडकरनगर के माफिया खान मुबारक का शूटर परवेज था। यूपी में योगी शासन और पूर्वांचल के बाहुबली के घटते रसूख की वजह से खान मुबारक के जरिए मुख्तार गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, समेत सिद्धार्थनगर, सुल्तानपुर तक अपना सिंडिकेट फैलाना चाह रहा था। चूंकि, जेल में होने और शासन की सीधी नजर होने से माफिया ने बीच की कड़ी के तौर पर खान मुबारक के सिंडिकेट को मुफीद समझा। उनके जरिए वह खोई जमीन तैयार भी करने का प्रयास कर रहा था।
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इसी बीच एसटीएफ ने एक लाख के इनामी परवेज को मुठभेड़ में मार गिराया। 12 जून 2023 को खान मुबारक की अस्पताल में मौत हो गई। पूर्वांचल के बाहुबली की मौत भी पिछले वर्ष बीमारी से हो गई। फिर 28 मार्च को कार्डियक अरेस्ट ने माफिया मुख्तार की भी जान ले ली।
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एसटीएफ के सूत्र बताते हैं कि 80 के दशक में मुख्तार अंसारी सीधे पूर्वांचल के बाहुबली गैंग के तब खास रहे गाजीपुर के दो भाई साधू और मकनू सिंह के संपर्क में आ गया। इन दोनों ने अपने अपराध की हनक भी पूर्वांचल के इसी बाहुबली के शरण में रहकर बनाया था। ये उस समय का दौर था, जब मुख्तार पढ़ाई करता था और मनबढ़ था। इसी दौरान बाहुबली विधायक बन गए तो उसने उन्हें अपना गुरु बनाते हुए बाबा कहने लगा था।



साधू और मकनू सिंह की वजह से बाहुबली से करीबी होती गई और मुख्तार रेलवे के ठेके में ''''नो ऑब्जेक्शन'''' लेते हुए अपने चहेतों को आजमगढ़, बनारस, मिर्जापुर समेत आस-पास रेलवे के ठेके में काम दिलाते गया। साधू और मकनू सिंह की मौत के बाद गिरोह की पूरी कमान सीधे अपने हाथों में ले ली थी।



एसटीएफ के सूत्र बताते हैं कि उस समय पूर्वांचल की एक धूरी ठाकुर-ब्राह्मण के बीच सिमट गई, जबकि गाजीपुर से लेकर आजमगढ़, बनारस, मिर्जापुर और आस-पास बृजेश सिंह और मुख्तार के बीच रार बढ़ती चली गई। एसटीएफ सूत्रों ने बताया कि 2012 के बाद पूरी तरह से इनका सिस्टम सिमटने लगा। योगी सरकार में अपराधियों पर सख्ती देख इन बड़े अपराधियों ने अपनी कड़ी ढूंढनी शुरू कर दी थी। मुख्तार के खास मुन्ना बजरंगी ने आंबेडकरनगर जेल में बंद माफिया खान मुबारक से मुख्तार के कनेक्शन को जोड़ते हुए पूर्वांचल में वसूली, पैक्सफेड विभाग में ठेके, विवादित जमीनों के समझौते की कड़ी तैयार की।



खान मुबारक का खास गुर्गा परवेज अपने गुर्गाें से गोरखपुर समेत आस-पास के जिलों में वसूली और अन्य धंधे संचालित करने लगा। परवेज की नेपाल में भी बढ़िया पकड़ थी। इसमें शामिल गोरखपुर के कुछ लोगों के नाम एसटीएफ के सामने आए थे। नेपाल से अवैध असलहे और गोलियों की खेप इन्हीं के सहारे लेकर परवेज आता था।



एसटीएफ सूत्रों ने बताया कि जब परवेज के साथ मुठभेड़ हुआ तो वह नेपाल से ही आ रहा था। उसने देवरिया के एक व्यापारी की हत्या की साजिश रची थी। यह सुपारी भी सिंडिकेट के कहने पर ही परवेज ने ली थी, लेकिन इसके पहले ही एसटीएफ ने मुठभेड़ में ढेर कर दिया। ऐसे में मुख्तार और खान मुबारक की बनाई कड़ी भी टूट गई।





शहर के बाहुबली ने ही कराई थी पैरवी



शहर के दो चर्चित युवाओं के बीच व्यापार को लेकर मतभेद हो गया था। सूत्रों ने बताया कि धर्मशाला से बरगदवां के बीच रहने वाले एक व्यापारी ने मऊ-गाजीपुर के माफिया को दूसरे व्यापारी की हत्या की सुपारी दी थी। इस बात की जानकारी होने पर विवाद न बढ़े, व्यापारी ने शहर के बाहुबली से इस बात की चर्चा कर पूरी बात बताई थी। बाहुबली ने मुख्तार से फोन पर बात कर पूरी जानकारी दी और व्यापारी को अपना करीबी बताया। इसके बाद समझौता हुआ और मामला ठंडे बस्ते में चला गया। यही कारण रहा कि मामले में लिखा-पढ़ी भी नहीं की गई। सूत्र बताते हैं कि अगर मामले में मुख्तार से सीधे संपर्क नहीं होता तो सुपारी को अंजाम दे दिया जाता।



लखनऊ जेल के गेट पर रोक लिया था मुख्तार को



2014 अगस्त से लेकर 2015 मई के दौर में गोरखपुर के कुछ अपराधी भी लखनऊ जेल में बंद थे। उस दौरान मुख्तार भी इसी जेल में था। जेल से छूटे एक सूत्र ने बताया कि हत्या और अन्य गंभीर अपराध में निरुद्ध गोरखपुर के एक माफिया ने जेल के गेट पर मुख्तार का रास्ता रोक दिया था। दरअसल, जेल में रहने के दौरान और पेशी पर जाते-आते समय मुख्तार, सपा और बसपा सरकार के समय वाले रौब में रहा करता था। सूत्र ने दावा किया कि उसे मिलने वाली सुविधाओं से नाराज होकर गोरखपुर के माफिया ने मानवाधिकार आयोग को भी पत्र लिख दिया था। इसे लेकर जांच भी बैठ गई थी। सूत्र ने बताया कि इसके बाद मुख्तार और गोरखपुर के माफिया को एक सी सुविधा मिलने लगी थी।





श्रीप्रकाश गैंग को हनुमान पांडेय ने दी थी इनोवा, जेल में आया था मुलाकाती



सितंबर 2012 में मुख्तार अंसारी का खास गुर्गा राकेश पांडेय उर्फ हनुमान गोरखपुर जेल में दो रात रुका था। राकेश, कृष्णानंद राय हत्याकांड में भी आरोपी था। मऊ जिले के मामले में पेशी के लिए दो दिन की तारीख पड़ी थी। ऐसे में पेशी के लिए नजदीक जेल में राजेश को गोरखपुर शिफ्ट किया गया था। श्रीप्रकाश शुक्ल गैंग के बदमाश राकेश पांडेय से मिलने जेल गया था। उसके साथ एक छात्रनेता और दो लोग और थे। उसी दिन जेल में हत्या में निरुद्ध चार अन्य अपराधियों से भी उन्होंने मुलाकात की थी। सूत्र बताते हैं कि ये नजदीकी इतनी थी कि राकेश पांडेय ने इसे चलने के लिए इनोवा गाड़ी तक गिफ्ट में दी थी। इसके बाद 28 मार्च 2016 को फिर राकेश पांडेय को गोरखपुर जेल में निरुद्ध कर रखा गया था। 14 अप्रैल को गोरखपुर जेल से राकेश पांडेय को बाराबंकी जेल भेज दिया गया। इसी के कुछ दिन बाद राकेश रिहा हो गया था। फिर एसटीएफ के साथ मुठभेड़ में मारा गया।



गुर्गे ने जेल अधिकारी की हत्या के लिए जेल पर ही बुलवा लिए थे गुर्गे



श्याम बाबू पासी नाम का मुख्तार का गुर्गा भी 2012 में गोरखपुर जेल में बंद था। तत्कालीन जेलर ने तलाशी में इसके पास से संदिग्ध सामान पकड़ लिया था। इसी के बाद की कार्रवाई से गुर्गा नाराज रहने लगा। एजेंसी के सूत्रों ने बताया कि इसी घटना के बाद एक दिन सुबह जेल पर मुख्तार के गुर्गे पहुंच गए थे। जेल के अंदर कैदी गिनती चल रही थी। तब एजेंसी के अधिकारियों ने फोन कर जेलर को सर्विलांस से उनकी हत्या किए जाने की बात बताते हुए बाहर आने से रोक दिया था। जब तक टीम पहुंचती, गुर्गे जेल से फरार हो गए थे। आजमगढ़ में निर्माण निगम के प्रबंधक को धमकी के मामले में आजमगढ़ जेल से गोरखपुर मंडलीय कारागार भेजा गया था। हालांकि, बाद में एसटीएफ ने इन्हें गिरफ्तार भी कर लिया था।




वर्जन



मुख्तार के अपराध का एक बड़ा सिंडिकेट था। गोरखपुर समेत आस-पास वह खान मुबारक के जरिए अपने नेटवर्क को जोड़कर अपराध को फिर से बढ़ाना चाह रहा था। इसी फिराक में गोरखपुर आए खान मुबारक के गुर्गे और एक लाख रुपये के इनामी परवेज को एसटीएफ ने मुठभेड़ में मार गिराया था। मुख्तार के आपराधिक गुरु साधू और मकनू सिंह गोरखपुर के तत्कालीन बाहुबली का शिष्य था। इसी कनेक्शन के जरिए रेलवे के टेंडर और अन्य आपराधिक वारदातों से आर्थिक तौर पर भी मुख्तार मजबूत होते चले आ रहा था।



-अमिताभ यश, एडीजी एसटीएफ व एलओ (यूपी)
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