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बीटेक प्रवेश फर्जीवाड़ा: MMMUT में पांच से ज्यादा शिक्षक और कर्मचारियों पर गिर सकती है गाज, कल लगेगी मुहर

Wed, 19 Jul 2023 10:53 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 19 Jul 2023 10:53 AM IST
सार

विश्वविद्यालय के सूत्रों के मुताबिक, जांच में पाया गया है कि बीटेक प्रवेश की काउंसिलिंग के दौरान जिम्मेदारों ने फर्जी दस्तावेजों की जांच नहीं की। बाकायदा उसे स्वीकृति देकर प्रवेश की अनुमति दे दी। वहीं लिपिकों ने भी काउंसिलिंग के लिए बनी सूची की जांच-पड़ताल किए ही सारी औपचारिकताएं पूरी करा दीं।

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More than five teacher and employees may fall in B Tech admission forgery in MMMUT
MMMUT - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) में फर्जी दस्तावेज के आधार पर बीटेक में 40 छात्रों के प्रवेश के मामले में जांच समिति ने रिपोर्ट विश्वविद्यालय प्रशासन को सौंप दी है। प्रवेश की प्रक्रिया में लापरवाही बरतने का मामला सामने आया है। इस मामले में पांच से ज्यादा शिक्षकों व कर्मचारियों पर गाज गिर सकती है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने 20 जुलाई को कार्य परिषद की बैठक बुलाई है, जिसमें इस प्रकरण को लेकर आगे की कार्रवाई का निर्णय लिया जाएगा।

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विश्वविद्यालय में सितंबर-2022 में बीटेक की कक्षाओं में फर्जी दस्तावेज के आधार पर प्रवेश लेने का मामला सामने आया था। शक के आधार पर कुलपति प्रो. जेपी पांडेय ने तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दी। कमेटी में अवध विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. रामअचल सिंह के अलावा विश्वविद्यालय के आचार्य प्रो. गोविंद पांडेय व प्रो. पीके सिंह को रखा गया। जांच में कमेटी को 40 छात्र ऐसे मिले, जिन्होंने फर्जी ढंग से विश्वविद्यालय के बीटेक के अलग-अलग पाठ्यक्रमों में प्रवेश लिया था। इनमें 2020-21 बैच के 22 और 2021-22 बैच के 18 छात्र शामिल हैं।
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विश्वविद्यालय ने इन छात्रों को साक्ष्य देने के लिए मौका दिया। इसके बाद प्रवेश निरस्त कर दिया गया। वहीं विश्वविद्यालय के शिक्षकों व कर्मचारियों की मिलीभगत की बात सामने आई। पूरे प्रकरण से राज्यपाल आनंदी बेन पटेल व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अवगत करा दिया गया। मामले में शामिल नेटवर्क की जांच कराकर कार्रवाई का आदेश मुख्यमंत्री व राजभवन से मिला।

इसके बाद कुलपति प्रो. राम अचल सिंह की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दी गई। कमेटी ने जांच कर अपनी रिपोर्ट दे दी। 13 जुलाई 2023 को विश्वविद्यालय की विद्या परिषद की बैठक में कार्रवाई को लेकर विधिक राय लेने का निर्णय लिया गया। अब विश्वविद्यालय को विधिक राय भी मिल गई है। 20 जुलाई को कार्य परिषद की बैठक बुलाई गई गई।


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काउंसिलिंग के दौरान फर्जी दस्तावेजों को चेक ही नहीं किए

विश्वविद्यालय के सूत्रों के मुताबिक, जांच में पाया गया है कि बीटेक प्रवेश की काउंसिलिंग के दौरान जिम्मेदारों ने फर्जी दस्तावेजों की जांच नहीं की। बाकायदा उसे स्वीकृति देकर प्रवेश की अनुमति दे दी। वहीं लिपिकों ने भी काउंसिलिंग के लिए बनी सूची की जांच-पड़ताल किए ही सारी औपचारिकताएं पूरी करा दीं।

इसमें प्रवेश कार्य से जुड़े दो से तीन शिक्षक व चार कर्मचारी जांच के दायरे में हैं। कार्य परिषद से अगर कार्रवाई की हरी झंडी मिलती है तो इन्हें मेजर चार्जशीट अलग से इनके खिलाफ जांच शुरू कराई जाएगी। वहीं फर्जी दस्तावेजों के आधार पर प्रवेश लेने वाले छात्रों के खिलाफ केस दर्ज कराया जा सकता है।

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हाईकोर्ट से भी छात्रों को नहीं मिली राहत
प्रवेश निरस्त होने के बाद 40 में से 35 छात्रों ने हाईकोर्ट की शरण ले ली। हाईकोर्ट के निर्देश पर 31 जनवरी तक छात्रों को साक्ष्य उपलब्ध कराने का समय दिया गया। 31 छात्रों ने साक्ष्य उपलब्ध करा दिए। विश्वविद्यालय की जांच समिति ने साक्ष्यों का परीक्षण कराया और उसे विद्या परिषद के समक्ष रखा गया। विद्या परिषद ने प्रवेश पर रोक लगाने के फैसले को बहाल रखा। छात्रों ने हाईकोर्ट में परीक्षा कराने के लिए याचिका दाखिल की। कोर्ट के निर्देश पर विवि ने छात्रों की परीक्षा कराकर इस सील करा दिया।

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ऐसे पकड़ा गया फर्जीवाड़ा

कंप्यूटर साइंस विभाग की एक छात्रा की संदिग्ध गतिविधियों का संज्ञान लेते हुए एक प्रोफेसर ने उससे प्रवेश का आवंटन पत्र मांगा। उसने जो पत्र दिया, वह तो फर्जी था ही, प्रवेश के लिए जमा की गई फीस की रसीद भी फर्जी मिली।

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प्रोफेसर ने जब यह जानकारी विश्वविद्यालय प्रशासन को दी, तो कुलपति प्रो. जेपी पांडेय ने सभी ब्रांच के प्रवेश की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन कर दिया। जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। शुल्क और आवंटन पत्र के मिलान में पाया गया कि कई छात्रों का प्रवेश सूची से भिन्न नामों से है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने जांच के बाद 40 छात्रों का प्रवेश निरस्त कर दिया था।

एमएमएमयूटी कुलपति प्रो. जेपी पांडेय ने कहा विश्वविद्यालय में 20 जुलाई को कार्य परिषद की बैठक बुलाई गई है। इसमें बीटेक प्रवेश में फर्जीवाड़े की जांच कर रही कमेटी की रिपोर्ट रखी जाएगी। रिपोर्ट को लेकर विधिक राय भी ले ली गई है। कार्य परिषद में लिए गए निर्णय के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

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