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सम्मान: मूर्तिदेवी पुरस्कार से सम्मानित होंगे प्रो. विश्वनाथ तिवारी, दिल्ली में होगा समारोह

Sat, 11 Dec 2021 01:41 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sat, 11 Dec 2021 01:41 AM IST
सार

प्रो. विश्वनाथ प्रसाद तिवारी को यह पुरस्कार उनकी कृति, ‘अस्ति व भवति’ के लिए दिया जा रहा है। जो 2014 में राष्ट्रीय पुस्तक, न्यास, दिल्ली से प्रकाशित हुई थी।

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Moortidevi Award will be conferred by Prof Vishwanath Tiwari
DDU Gorakhpur - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

साहित्य अकादमी के पूर्व अध्यक्ष और जाने माने कवि-आलोचक प्रोफेसर विश्वनाथ प्रसाद तिवारी को भारतीय ज्ञानपीठ के प्रतिष्ठित 33वें मूर्तिदेवी पुरस्कार से नवाजा जाएगा। उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू 18 दिसंबर को राष्ट्रीय साहित्य अकादमी सभागार, दिल्ली में भारतीय ज्ञानपीठ की ओर से आयोजित एक समारोह में सम्मानित करेंगे।  

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प्रो. विश्वनाथ प्रसाद तिवारी को यह पुरस्कार उनकी कृति, ‘अस्ति व भवति’ के लिए दिया जा रहा है। जो 2014 में राष्ट्रीय पुस्तक, न्यास, दिल्ली से प्रकाशित हुई थी। प्रो. तिवारी गोरखपुर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में आचार्य और वर्ष 2013 से 2017 तक केंद्रीय साहित्य अकादमी, दिल्ली के अध्यक्ष रहे हैं। मूर्तिदेवी पुरस्कार भारतीय संविधान में स्वीकृत 22 भाषाओं में से किसी एक भाषा की चयनित कृति को दिया जाता है। इस पुरस्कार के निर्णायक मंडल में कई भाषाओं के सदस्य होते हैं। यह पुरस्कार पहली बार 1983 में कन्नड़ लेखक सीके नागराज राव को प्राप्त हुआ था।

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‘अस्ति व भवति’ है जीवन का आईना

प्रो. तिवारी कृत ‘अस्ति व भवति’ उनके 50 से अधिक वर्षों के सार्वजनिक जीवन का आईना है। इसमें डॉ. तिवारी ने देश की समस्याओं, संकटों, विकास, राजनीतिक टकरावों, लेखकों के विचारों, वैश्वीकरण के दौर में बदले मूल्यों से लेकर घर-परिवार, गांव-दुनिया से जुड़ी स्मृतियों का जीवंत चित्रण प्रस्तुत किया है।

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‘दस्तावेज’ के संपादक हैं प्रो. तिवारी

कुशीनगर जिले में स्थित रायपुर भैंसही-भेड़िहारी गांव में 20 जून 1940 को पैदा हुए प्रो. विश्वनाथ प्रसाद तिवारी गोरखपुर विश्वविद्यालय में हिंदी विभाग के अध्यक्ष भी रहे हैं। वह साहित्यिक पत्रिका ‘दस्तावेज’ के संपादक भी हैं। साहित्य के लिए वह इंग्लैंड, मॉरीशस, रूस, नेपाल, अमरीका, नीदरलैंड, जर्मनी, फ्रांस, लक्जमबर्ग, बेल्जियम, चीन, आस्ट्रिया, जापान और थाईलैंड आदि देशों की यात्रा कर चुके हैं।

मिल चुके हैं ये सम्मान

प्रो. विश्वनाथ तिवारी को तमाम पुरस्कार मिल चुके हैं। उन्हें साहित्य अकादमी का महत्तर सम्मान मिला। उन्हें व्यास सम्मान, रूस का पुश्किन सम्मान, शिक्षक श्री सम्मान, साहित्य भूषण सम्मान, हिंदी गौरव सम्मान, महापंडित राहुल सांस्कृत्यायन सम्मान, महादेवी वर्मा गोयनका सम्मान, भारतीय भाषा परिषद का कृति सम्मान मिल चुका है।

रचनाओं का सफर

प्रो. तिवारी 1978 से हिंदी की साहित्यिक पत्रिका दस्तावेज का लगातार संपादन-प्रकाशन कर रहे हैं। दस्तावेज के लगभग दो दर्जन विशेषांक प्रकाशित हुए हैं। दस्तावेज को सरस्वती सम्मान भी मिल चुका है। उनके शोध व आलोचना के 12 ग्रंथ, सात कविता संग्रह, चार यात्रा संस्मरण, तीन लेखकीय-संस्मरण व एक साक्षात्कार प्रकाशित हो चुका है।

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