शुक्रवार सुबह 09.17 बजे। उरुवा स्वास्थ्य केंद्र पर अफरा-तफरी मची थी। हर तरफ सिर्फ चीख-पुकार। गंभीर रूप से घायल प्रतिभा और साक्षी को एंबुलेंस में ले जाने लगे तो पीछे से दीदी-दीदी की आवाज लगाते दो बच्चों को देखकर एकबारगी स्वास्थ्य कर्मियों के कदम भी ठहर गए। प्रतिभा के भाई आयुष और साक्षी के छोटे भाई मोक्ष की कातर आवाज सुनकर मौके पर मौजूद हर कोई भावुक हो गया।
गोरखपुर में स्कूल बस हादसा: दीदी-दीदी कहते बेहोश हो गया मोक्ष, मिलने की जिद पर अड़ा रहा आयुष
हादसे वाली बस में ये दोनों भी सवार थे। उन्हें भी चोट लगी थी, लेकिन वे अपनी बहनों की हालत गंभीर देखकर साथ जाने की जिद पर अड़ गए। मोक्ष तो रोते-रोते कई बार बेहोश भी हुआ। उसे दवा दी गई। बाद में दोनों के रिश्तेदार उन्हें लेकर घर गए और फिर अस्पताल में मिलाने के बहाने दोनों ही परिवारों ने अपने बच्चों को उनके ननिहाल भेज दिया।
जानकारी के मुताबिक, सगुहा गांव निवासी प्रतिभा के पिता कृष्ण कुमार बेलघाट ब्लॉक में सफाईकर्मी हैं। प्रतिभा के दो छोटे भाई आयुष (10) व आकृष्ट (7) हैं। ये भी उसी बस से स्कूल जा रहे थे। परिजनों का आरोप है कि स्कूल बस की क्षमता से दोगुना बच्चों को ले जाते थे। बस में बेंच पर बच्चों को बैठते थे। बच्चे खड़े होकर भी जाते थे।
प्रतिभा के दोनों भाई भी घायल हैं, जिन्हें प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराकर परिजन ननिहाल भेज दिए हैं। वहीं, साक्षी के बाबा सेवानिवृत्त शिक्षक हैं और पिता सुनील ऑटो चलाते हैं। साक्षी का भाई मोक्ष विश्वकर्मा (6) भी उसके साथ ही बस में था। हादसे के बाद से वह डरा था, लेकिन अपनी दीदी साक्षी का साथ नहीं छोड़ रहा था। उसे अस्पताल से घर ले जाने की कोशिश की जा रही थी कि वह दीदी के साथ जाने की जिद कर रहा था। वह अस्पताल में ही बेहोश होने लगा था। उसे भी दीदी से मिलवाने के बहाने रिश्तेदारों के साथ भेज दिया गया।
बेसुध हो जा रही थीं मां, बाबा बोले...मुझे ही उठा लिए होते भगवान
प्रतिभा के माता-पिता मोर्चरी पर पहुंच गए थे। बेटी को आखिरी बार देखने की मां ने इच्छा जाहिर की तो मोर्चरी का दरवाजा खोलकर दोनों अंदर चले गए। वहां पर बेटी की हालत देखते ही वह बेसुध होकर गिर गईं। उसे किसी तरह से रोते हुए पिता ने संभाला और लेकर बाहर आया। कई रिश्तेदार और दोस्त भी मौके पर पहुंचे थे, वह भी दोनों को संभाल रहे थे। नीयती को कोस रहे थे और खुद को भी संभाल रहे थे। वहीं, साक्षी के बाबा महेश का बुरा हाल था। वह पौत्री साक्षी को देखकर रोने लगे। कहने लगे- हे भगवान! इससे अच्छा होता कि मुझे ही उठा लिए होते। फिर वह बैठकर रोने लगे। गांव से आए लोगों ने उन्हें किसी तरह संभाला।