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मोबाइल एप बताएगा क्या है धरोहर का इतिहास, नहीं पड़ेगी गाइड की जरूरत
Thu, 25 Jun 2020 02:32 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Thu, 25 Jun 2020 02:32 PM IST
सार
- राजकीय बौद्ध संग्रहालय में पर्सनल डिजिटल गाइड लगाने का काम पूरा
- पांच गैलरी में मौजूद सभी इतिहासिक धरोहरों का राज बताएगा
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एप
- फोटो : social media
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विस्तार
राजकीय बौद्ध संग्रहालय में रखी मौर्य काल, गुप्त काल और मध्यकालीन मूर्तियों का इतिहास अब पर्यटकों को उनका मोबाइल ही बताएगा। इसके लिए उन्हें किसी गाइड की जरूरत नहीं होगी, बल्कि उनका मोबाइल ही डिजिटल गाइड के तौर पर काम करेगा।
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इसे लेकर बौद्ध संग्रहालय में लगाए जा रहे डिजिटल पर्सनल गाइड उपकरण को लगाने का काम पूरा हो गया है। कार्यदायी संस्था यूपी डेस्को ने ट्रायल के तौर पर इसे शुरू कर दिया है। जल्द ही ये सुविधा पर्यटकों को मिलने लगेगी।
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शहर के तारामंडल क्षेत्र में स्थित राजकीय बौद्ध संग्रहालय सैलानियों के लिए पर्यटन का महत्वपूर्ण स्थान है। इस संग्रहालय में मौजूद पांच गैलरी में पाषाण काल से लेकर मध्य काल तक की पुरातात्विक चीजें धरोहर के रूप में रखी गई हैं। इस संग्रहालय में बुद्ध, हिंदू और जैन धर्म से जुड़ी ऐसी तमाम पेटिंग, मूर्तियां और अन्य सामान हैं जो प्राचीन भारत के इतिहास से सैलानियों को अवगत कराती हैं।
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कई बार सैलानियों को इन धरोहरों के बारे में जानकारी के लिए गाइड का सहारा लेना पड़ता था। ऐसे में उप्र संग्रहालय ने इसके लिए डिजिटल पर्सनल गाइड बनाने का प्रस्ताव शासन में भेजा था। शासन के पिछले वर्ष 33.07 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की। अब जाकर इसका काम पूरा हुआ है।
क्या है डिजिटल पर्सनल गाइड
डिजिटल पर्सनल गाइड एक कंप्यूटरीकृत उपकरण होगा, जो यहां रखे विशेष धरोहरों का इतिहास बताएगा। परिसर में दाखिल होते हुए पर्यटक को अपने मोबाइल पर वाईफाई का सिग्नल मिलेगा। वाईफाई को चुनते ही नीचे दिए डाउनलोड लिंक पर उन्हें राजकीय बौद्ध संग्रहालय की एप मिलेगी।
डाउनलोड करने के बाद नंबर पंजीकृत कराने पर संग्रहालय में मौजूद पांचों गैलरी में रखी धरोहरें मोबाइल पर नजर आने लगेंगे। संबंधित धरोहर को छूते ही उसका इतिहास ऑडियो और वीडियो के रूप में आपके सामने आ जाएगा।
ये जानकारी मिलेगी
मोबाइल पर धरोहर को विकल्प के रूप में चुनने के बाद उसके इतिहास के बारे में जानकारी मिलेगी कि ये मूर्ति कहां पाई गई। किस काल से जुड़ी है, उसका अध्यात्मिक या एतिहासिक विशेषता क्या है। ये देश में कहां-कहां पाई जाती है।
संग्रहालय में मौजूद अमूल्य धरोहरें
बौद्ध संग्रहालय में मौजूद अमूल्य धरोहरों में त्रिशूलधारी शिव, स्थानक विष्णु, शेषशायी विष्णु, नृत्यरत गणेश, बोधिसत्व, अभय मुद्रा में बुद्ध, दाढ़ीयुक्त लामा, गज लक्ष्मी, संगीत का आनंद लेते हुए राधा कृष्ण, महिषादुर मर्दिनी, त्रिपुर सुंदरी, माखनचोर कृष्ण, विभास रागिनी, पंचतंत्र, देवी चंदा, शाक्य बुद्ध, बौद्ध देवता मंजूश्री, पद्मपाणि, नवग्रह, वाराही, अभय मुद्रा में स्थानक बुद्ध, प्रभामंडलयुक्त विष्णु, तांत्रिक तामपत्र, बुद्ध का अंकनयुक्तहस्त कुठार, भेड़ा गाड़ी, मकर पर बैठा बंदर आदि मौजूद हैं।
डॉ. मनोज गौतम, उपनिदेशक राजकीय बौद्ध संग्रहालय राजकीय बौद्ध संग्रहालय में डिजिटल पर्सनल गाइड लगाने का काम पूरा हो गया है। ट्रायल के माध्यम से सुविधा की जांच की जा रही है। जल्द ही धरोहरों का इतिहास पर्यटक अपने मोबाइल से जान सकेंगे।
डाउनलोड करने के बाद नंबर पंजीकृत कराने पर संग्रहालय में मौजूद पांचों गैलरी में रखी धरोहरें मोबाइल पर नजर आने लगेंगे। संबंधित धरोहर को छूते ही उसका इतिहास ऑडियो और वीडियो के रूप में आपके सामने आ जाएगा।
ये जानकारी मिलेगी
मोबाइल पर धरोहर को विकल्प के रूप में चुनने के बाद उसके इतिहास के बारे में जानकारी मिलेगी कि ये मूर्ति कहां पाई गई। किस काल से जुड़ी है, उसका अध्यात्मिक या एतिहासिक विशेषता क्या है। ये देश में कहां-कहां पाई जाती है।
संग्रहालय में मौजूद अमूल्य धरोहरें
बौद्ध संग्रहालय में मौजूद अमूल्य धरोहरों में त्रिशूलधारी शिव, स्थानक विष्णु, शेषशायी विष्णु, नृत्यरत गणेश, बोधिसत्व, अभय मुद्रा में बुद्ध, दाढ़ीयुक्त लामा, गज लक्ष्मी, संगीत का आनंद लेते हुए राधा कृष्ण, महिषादुर मर्दिनी, त्रिपुर सुंदरी, माखनचोर कृष्ण, विभास रागिनी, पंचतंत्र, देवी चंदा, शाक्य बुद्ध, बौद्ध देवता मंजूश्री, पद्मपाणि, नवग्रह, वाराही, अभय मुद्रा में स्थानक बुद्ध, प्रभामंडलयुक्त विष्णु, तांत्रिक तामपत्र, बुद्ध का अंकनयुक्तहस्त कुठार, भेड़ा गाड़ी, मकर पर बैठा बंदर आदि मौजूद हैं।
डॉ. मनोज गौतम, उपनिदेशक राजकीय बौद्ध संग्रहालय राजकीय बौद्ध संग्रहालय में डिजिटल पर्सनल गाइड लगाने का काम पूरा हो गया है। ट्रायल के माध्यम से सुविधा की जांच की जा रही है। जल्द ही धरोहरों का इतिहास पर्यटक अपने मोबाइल से जान सकेंगे।